दैनिक भास्कर हिंदी: लोगों से आत्मीयता का संबंध जोड़ना जरूरी, यही सबसे बड़ी ताकत -भागवत

November 8th, 2019

डिजिटल डेस्क, नागपुर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ.मोहन भागवत व केंद्रीय भूतल परिवहन मंत्री नितीन गडकरी ने लोगों से आत्मीयता का संबंध जोड़ने का आह्वान किया है। समाज व राजनीति के मामले में व्यक्तिगत संबंध को सबसे बड़ी ताकत कहा है। भागवत ने कहा है कि आत्मीयता ही संघ की विचारधारा है। गडकरी के अनुसार, नेता व कार्यकर्ता के बीच दूरी कम होना चाहिए। कार्यकर्ताओं में नकारात्मकता की वृत्ति को कम करने का काम भी किया जाना चाहिए। 

मिलकर बढ़ने का भाव हो
गुरुवार को संघ विचारक विलास फडणवीस की स्मृति में शिक्षाविद विवेक पांढरीकर को पुरस्कार प्रदान किया गया। दान पारमिता संगठन की सहायता से कार्यक्रम का आयोजन साइंटिफिक सभागृह लक्ष्मीनगर में किया गया। भागवत व गडकरी इसी कार्यक्रम में मंच साझा कर रहे थे। आरंभ में गडकरी ने कहा कि िवलास फडणवीस के जीवन से प्रतिकूल स्थिति में कार्य करने की प्रेरणा मिलती है। राजनीति में चमकेस अर्थात प्रचार में आगे रहनेवालों की कमी नहीं है, लेकिन सामाजिक कार्य के लिए आत्मीयता के भाव की आवश्यकता है। कार्यकर्ता में गुणदोष हो सकता है। दोषों को दूर करना संगठन का काम है। गणितीय सूत्र का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि अलग अलग बढ़ने के बजाय सब साथ मिलकर बढ़ने का भाव होना ही चाहिए। उत्तम आत्मीयता से ही विचारधारा बनती है।

दृष्टि ऐसी हो कि सब अपना लगे
सरसंघचालक डॉ.भागवत ने कहा कि संघ के कार्य का आधार ही शुद्ध सात्विक प्रेम है। संघ के मामले में जिव्हाड़ा अर्थात आत्मीयता ही विचारधारा है। बड़े कार्य करनेवाले महापुरुषों ने भी कमजोरों के विकास के लिए कार्य किया है। इस्तेमाल करने की दृष्टि से नुकसान होता है। दृष्टि ऐसी हो कि सब अपना लगे। चुनाव में परोपकार की प्रवृति देखने को मिलती है, लेकिन परोपकारी स्वभाव प्रेम के बिना नहीं हो सकता है। कार्यक्रम की प्रस्तावना अविनाश संगवई ने रखी। दान पारमिता संगठन के डॉ. विलास डांगरे उपस्थित थे। विवेक पांढरीकर को एक लाख रुपए का पुरस्कार दिया गया। 

गडकरी बोले
हमारी राजनीति में चकमेश अर्थात प्रचार में रहनेवाली कंपनी बहुत है। कार्यकर्ता के प्रति अपनेपन का भाव प्राकृतिक होना चाहिए। वह आर्टिफिशियल अर्थात कृत्रिम नहीं होना चाहिए। कार्यकर्ता के प्रति अपनेपन का भाव होना चाहिए। कार्यकर्ता के गुणदोष स्वीकार किए जाने चाहिए। कार्यकर्ताओं के दोषों को कम करना संगठन की जिम्मेदारी है।

भागवत बोले
 हमारा कार्यकर्ता राज या लोकमान्यता मिलने न मिलने के बाद भी समाधान खोजता है, तब आत्मीयता की याद आती है। हर क्षेत्र में आत्मीयता से कनेक्शन जोड़ने की आवश्यकता है। हर क्षेत्र में अच्छे लोग हैं। ऐसा कुछ नहीं है जो पहले कभी नहीं हुआ हो। कोई न कोई आगे रहेगा। तुम अच्छे हो पर हमारे हो क्या...यह देखा व सोचा जाता है। आत्मीयता का भाव रहा तो कई समस्याएं दूर हो जाएंगी। 

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