comScore

© Copyright 2019-20 : Bhaskarhindi.com. All Rights Reserved.

ओपन कैप में खराब हो गई 20 करोड़ रुपये की धान

ओपन कैप में खराब हो गई 20 करोड़ रुपये की धान

डिजिटल डेस्क कटनी । प्रशासन इस बार भी राशन दुकानों में गुणवत्ताविहीन चावल बांटने की तैयारी करते हुए खराब धान को जबरदस्ती मिलिंग कराने में लगा हुआ है। शासन के आदेश तो पहले ओपन कैप में रखे धान को मिलिंग कराने का रहा, लेकिन नॉन ने उन गोदामों से धान उठवाया। जहां पर धान सुरक्षित रहे। मझगंवा फाटक के समीप डेढ़ लाख क्विंटल धान को बारिश में सडऩे दिया। सात माह में नॉन के अफसर इस तरफ ध्यान नहीं दिए और डेढ़ लाख क्विंटल में से अभी भी सवा लाख क्विंटल धान यहां पर भण्डारित है। खराब धान को लेकर राइस मिलर्स और नॉन अब आमने सामने आ गए हैं।
पांच लाख क्विंटल धान बचा
पहले तीस सितम्बर तक मिलिंग का समय नॉन को दिया गया था, इसके बावजूद नॉन और मिलर्स के बीच अनुबंध में देरी हुई। जिसके चलते समय पर धान मिलिंग का काम नहीं हो सका। पिछले खरीफ की सीजन में 21 लाख क्विंटल धान की खरीदी हुई थी। इसमेें अभी तक करीब 16 लाख 40 हजार क्विंटल धान की ही मिलिंग हुई है। फिर से एक बार और समय दिया गया है, लेकिन जिस तरह से मिलर्स और नॉन आमने-सामने हैं। उससे यही लग रहा है कि इस बार भी तय सीमा में धान मिलिंग का काम नहीं हो सकेगा।
तीन माह में उठाना था अनाज
खुले में रखी हुई धान को तीन माह के अंदर उठाकर उसे सुरक्षित रुप से रखने के निर्देश दिए थे। इस संबंध में मिलिंग के समय यह निर्देश रहा कि पहले उन जगहों से धान का उठाव करें, जहां पर ये धान असुरक्षित रुप से रखे हुए हैं। इसके बावजूद नागरिक आपूर्ति निगम ट्रांसपोर्टस के इशारे पर नाचता रहा। कम और अधिक दूरी का खेल यहां पर चलता रहा। मझगंवा फाटक में रखी धान खराब होने की कगार पर पहुंच गई है, तब अधिकारियों की नींद खुली और वहां
से मिलर्स को धान उठाने के निर्देश दिए।
राशन दुकानों में होती है खपत
ऐसे अनाजों को राशन दुकानों में खपत किया जाता है। राशन दुकानों में गुणवत्तायुक्त अनाज के लिए शासन ने तो पूरी टीम तैनात कर रखी है। इसके बावजूद राशन दुकानों में जो अनाज पहुंचता है, उसका किसी तरह से टेस्ट करे बगैर उसे उपभोक्ताओं में बांट दिया जाता है। राशन दुकानों में अनाज लेने वाले अधिकांश लोग आर्थिक रुप से कमजोर वर्ग के होते हैं। इस स्थिति में वे भी  किसी तरह से शिकवा-शिकायत करने से बचते हैं, और विभाग इसमें
खेल-खेल रहा है।
इनका कहना है
मझगवां ओपन कैप में धान खराब नहीं हुआ है। यहां से धान का उठाव मिलिंग के लिए किया जा रहा है। कहीं पर कोई खराबी नहीं है।
-पीयूष माली, जिला प्रबंधक नागरिक आपूर्ति निगम कटनी
 

कमेंट करें
gDrkn
NEXT STORY

Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

डिजिटल डेस्क, जबलपुर। किसी के लिए भी प्रॉपर्टी खरीदना जीवन के महत्वपूर्ण कामों में से एक होता है। आप सारी जमा पूंजी और कर्ज लेकर अपने सपनों के घर को खरीदते हैं। इसलिए यह जरूरी है कि इसमें इतनी ही सावधानी बरती जाय जिससे कि आपकी मेहनत की कमाई को कोई चट ना कर सके। प्रॉपर्टी की कोई भी डील करने से पहले पूरा रिसर्च वर्क होना चाहिए। हर कागजात को सावधानी से चेक करने के बाद ही डील पर आगे बढ़ना चाहिए। हालांकि कई बार हमें मालूम नहीं होता कि सही और सटीक जानकारी कहा से मिलेगी। इसमें bhaskarproperty.com आपकी मदद कर सकता  है। 

जानिए भास्कर प्रॉपर्टी के बारे में:
भास्कर प्रॉपर्टी ऑनलाइन रियल एस्टेट स्पेस में तेजी से आगे बढ़ने वाली कंपनी हैं, जो आपके सपनों के घर की तलाश को आसान बनाती है। एक बेहतर अनुभव देने और आपको फर्जी लिस्टिंग और अंतहीन साइट विजिट से मुक्त कराने के मकसद से ही इस प्लेटफॉर्म को डेवलप किया गया है। हमारी बेहतरीन टीम की रिसर्च और मेहनत से हमने कई सारे प्रॉपर्टी से जुड़े रिकॉर्ड को इकट्ठा किया है। आपकी सुविधाओं को ध्यान में रखकर बनाए गए इस प्लेटफॉर्म से आपके समय की भी बचत होगी। यहां आपको सभी रेंज की प्रॉपर्टी लिस्टिंग मिलेगी, खास तौर पर जबलपुर की प्रॉपर्टीज से जुड़ी लिस्टिंग्स। ऐसे में अगर आप जबलपुर में प्रॉपर्टी खरीदने का प्लान बना रहे हैं और सही और सटीक जानकारी चाहते हैं तो भास्कर प्रॉपर्टी की वेबसाइट पर विजिट कर सकते हैं।

ध्यान रखें की प्रॉपर्टी RERA अप्रूव्ड हो 
कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।