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श्योपुर: राष्ट्रीय उपभोक्ता दिवस पर वेबिनार आयोजित किया गया

December 25th, 2020 17:32 IST
श्योपुर: राष्ट्रीय उपभोक्ता दिवस पर वेबिनार आयोजित किया गया

डिजिटल डेस्क, श्योपुर। श्योपुर राष्ट्रीय उपभोक्ता दिवस का आयोजन वेबिनार के माध्यम से कलेक्टर कार्यालय श्योपुर के सभागार में किया गया। वेबिनार में खाद्य मा. मंत्री श्री बिसाहूलाल साहू, प्रमुख सचिव खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग श्री फैज अहमद किदवई, संचालक खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग श्री तरूण कुमार पिथोडे द्वारा नवीन राष्ट्रीय खाद्य सरंक्षण अधिनियम 2019 के संबंध में अवगत कराया गया। साथ ही उपभोक्ता अपने अधिकारो का प्रयोग किस तरह करें। इस संबंध में भी अवगत कराया गया। जिला स्तर पर कलेक्टर कार्यालय श्योपुर के सभागार में कलेक्टर श्री राकेश कुमार श्रीवास्तव, जिला आपूर्ति अधिकारी श्री एसएन चौहान, एआरसीएस श्री रविन्द्र शर्मा, नोडल अधिकारी सीसीबी श्री दिनेश गुप्ता, नापतौल निरीक्षक श्री शैलेन्द्र पवार, डीपीओ महिला बाल विकास श्री ओपी पाण्डेय, डीपीएमयू श्री विवेक पाराशर उपस्थित थे। वेबीनार में उपभोक्ता सरंक्षण अधिनियम 1986 अधिनियम एक तीन स्तरीय उपभोक्ता विवाद निवारण तंत्र राष्ट्रीय (एनसीडीआरसी), राज्य (राज्य आयोग) और जिला स्तरों (जिला मंचो) पर प्रदान करता है। उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 की मुख्य विशेषताओं के बारे में अवगत कराया गया। जिसमें उपभोक्ता संरक्षण परिषद, केन्द्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (सीसीपीए), विवाद निपटान प्रक्रिया को आसान बनाया गया, मध्यस्थता, उत्पाद दायितव, ई-कॉमर्स और प्रत्यक्ष बिक्री (डायरेक्ट सेलिंग) संबधी नियम मिलावटी/नकली उत्पादों के लिए जुर्माना के बारे में बताया गया। साथ ही केन्द्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (सीसीपीए) उपभोक्ता के एक वर्ग को राहत प्रदान करना, सशक्त बनाना, सीसीपीए को उपभोक्ता अधिकारों के उल्लघंन की जांच करने और शिकायत दर्ज करने/अभियोजन करने का अधिकार, असुरक्षित वस्तुओं और सेवाओं को वापस लेना, अनुचित व्यापार चलनों और भ्रामक विज्ञापनों को जारी न रखने के आदेश देना। भ्रामक विज्ञापनों के विनिर्माताओं/समर्थनकर्ताओं/प्रकशकों पर जुर्माना लगाने का अधिकार होगा। केन्द्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (सीसीपीए) की स्थापना से संबंधित शासकीय अधिसूचना अभी प्रकाशनाधीन हैं। इसी प्रकार विवाद समाधान प्रकिया का सरलीकरण, मध्यस्थता, उत्पाद दायित्व, उपभोक्ताओं को लाभ, नियम और विनियम के बारें में विस्तार से जानकारी दी गई।

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Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

डिजिटल डेस्क, जबलपुर। किसी के लिए भी प्रॉपर्टी खरीदना जीवन के महत्वपूर्ण कामों में से एक होता है। आप सारी जमा पूंजी और कर्ज लेकर अपने सपनों के घर को खरीदते हैं। इसलिए यह जरूरी है कि इसमें इतनी ही सावधानी बरती जाय जिससे कि आपकी मेहनत की कमाई को कोई चट ना कर सके। प्रॉपर्टी की कोई भी डील करने से पहले पूरा रिसर्च वर्क होना चाहिए। हर कागजात को सावधानी से चेक करने के बाद ही डील पर आगे बढ़ना चाहिए। हालांकि कई बार हमें मालूम नहीं होता कि सही और सटीक जानकारी कहा से मिलेगी। इसमें bhaskarproperty.com आपकी मदद कर सकता  है। 

जानिए भास्कर प्रॉपर्टी के बारे में:
भास्कर प्रॉपर्टी ऑनलाइन रियल एस्टेट स्पेस में तेजी से आगे बढ़ने वाली कंपनी हैं, जो आपके सपनों के घर की तलाश को आसान बनाती है। एक बेहतर अनुभव देने और आपको फर्जी लिस्टिंग और अंतहीन साइट विजिट से मुक्त कराने के मकसद से ही इस प्लेटफॉर्म को डेवलप किया गया है। हमारी बेहतरीन टीम की रिसर्च और मेहनत से हमने कई सारे प्रॉपर्टी से जुड़े रिकॉर्ड को इकट्ठा किया है। आपकी सुविधाओं को ध्यान में रखकर बनाए गए इस प्लेटफॉर्म से आपके समय की भी बचत होगी। यहां आपको सभी रेंज की प्रॉपर्टी लिस्टिंग मिलेगी, खास तौर पर जबलपुर की प्रॉपर्टीज से जुड़ी लिस्टिंग्स। ऐसे में अगर आप जबलपुर में प्रॉपर्टी खरीदने का प्लान बना रहे हैं और सही और सटीक जानकारी चाहते हैं तो भास्कर प्रॉपर्टी की वेबसाइट पर विजिट कर सकते हैं।

ध्यान रखें की प्रॉपर्टी RERA अप्रूव्ड हो 
कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।