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जेल के भीतर खेती से कमाए 1.65 करोड़, औरंगाबाद की पैठण जेल सबसे आगे
डिजिटल डेस्क, मुंबई। प्रदेश की 29 जेलों में कृषि उत्पादन से राज्य सरकार के जेल विभाग को आर्थिक वर्ष 2018-19 में 1.65 करोड़ रुपए का मुनाफा हुआ है। 2018-19 में खेती पर आधारित उत्पादन में औरंगाबाद की पैठण जेल (खुला कारागार) प्रथम, अहमदनगर की विसापुर जेल द्वितीय और नाशिक रोड जेल तृतीय स्थान पर रहा है। साल 2009-10 से साल 2018-19 के बीच 10 सालों के दौरान जेल विभाग का मुनाफा लगातार बढ़ा है। सिर्फ वर्ष 2011-12 में साल 2010-11 की तुलना में मुनाफा कम हुआ था। प्रदेश सरकार के गृह विभाग के उपसचिव नारायण कराड ने को बताया कि जेल के भीतर होने वाली खेती में कैदियों को भोजन के लिए रोजाना लगने वाली चीजों का उत्पादन किया जाता है।
कैदियों के इस्तेमाल के बाद जो कृषि उत्पाद बचता है, उसे जेल के बाहर स्टॉल लगातार बेच दिया जाता है। कारागार विभाग के अनुसार साल 2018-19 में जेल के भीतर की खेती से 4.09 करोड़ रुपए की उपज मिली थी। इसके लिए 2.44 करोड़ रुपए खर्च करने पड़े थे। इससे 1.65 करोड़ रुपए का मुनाफा हुआ। 2018-19 के दौरान राज्यभर की जेलों में 810 पुरुष और 51 महिला कैदियों को प्रतिदिन खेती का काम मिला। जेलों में सजायाफ्ता कैदियों से ही खेती का काम कराया जाता है। इसके बदले में कैदियों को मेहनताना भी दिया जाता है।
प्रदेश के 29 जेलों में 821.50 हेक्टेयर जमीन है। इसमें से 328.88 हेक्टेयर जमीन खेती के लिए इस्तेमाल की जाती है। 186.52 हेक्टेयर जमीन बगायत और 142.36 हेक्टेयर जमीन का क्षेत्र जिरायत है। जेल में सब्जी, धान, गेहूं, ज्वारी, तुअर, सोयाबीन समेत अन्य फैसलों का उत्पादन किया जाता है। पैठण, कोल्हापुर और विसापुर जेल में गन्ने की खेती होती है। पैठण की जेल में गन्ने से गुड तैयार किया जाता है। कैदियों को रोजगार के जरिए कमाई और पुर्नवसन के लिए जेल के खेतों में सब्जी और अनाज के अलावा मत्स्य पालन उद्योग, मशरूम उत्पादन यूनिट और खाद बनाने वाली परियोजनाएं भी लगाई गई हैं।
पुणे की येरवडा जेल में पुणे मनपा की मदद से 90 लाख रुपए की लागत से बायोगैस परियोजना लगाई गई है। इस परियोजना से प्रतिदिन 140 किलो गैस का उत्पादन होता है। इससे हर महीने 3 लाख रुपए गैस के खर्च में बचत होती है। येरवडा जेल के भीतर 2 एकड़ क्षेत्र मे केले का उत्पादन होता है। जबकि रबी फसल सत्र में येरवडा, नाशिकरोड और पैठण जेल में राज्य बीज महामंडल (महाबीज) के माध्यम से ज्वारी, गेहूं और तुअर के बीज का उत्पादन किया जाता है। नई दिल्ली के राष्ट्रीय औषधि वनस्पति बोर्ड के अनुदान से येरवडा समेत 10 जेलों में चंदन और सुगंधित वनस्पति का उत्पादन किया जा रहा है।
राज्य की जेलों में 10 साल का उत्पादन और मुनाफा
साल उत्पादन मुनाफा (आंकडे करोड़ में)
साल 2009-10 1.78 1.08
साल 2010-11 1.72 0.81
साल 2011-12 1.78 0.63
2012-13 2.17 1.10
साल 2013-14 2.54 1.40
साल 2014-15 3.34 1.71
साल 2015-16 3.64 2.04
साल 2016-17 3.48 1.75
साल 2017-18 3.86 1.59
साल 2018-19 4.09 1.65
Created On :   22 May 2019 6:44 PM IST