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 कोयले में मिलाकर भेजा पत्थर, इन्क्वायरी शुरू-ट्रांसपोर्टर्स व रेल कर्मियों पर गिर सकती है गाज

 कोयले में मिलाकर भेजा पत्थर, इन्क्वायरी शुरू-ट्रांसपोर्टर्स व रेल कर्मियों पर गिर सकती है गाज

डिजिटल डेस्क सिंगरौली(मोरवा)। सिंगरौली रेलवे स्टेशन से शुरू की गई निजी कोयला साइडिंग स्पर नम्बर-3 से बीते महीनों में की गई हेराफेरी की कडिय़ां खुलने लगी हैं। मामले में कोयले के एक बड़े ग्राहक संस्थान ने रेल बोर्ड में शिकायत की है कि उन्हें निर्धारित गेे्रड के कोयले में अधिकांश कोयला घटिया किस्म का भेजा गया है। उसमें भारी मात्रा में पत्थर और राख मिली होने की भी शिकायत की गई है। शिकायत को लेकर रेलवे ने इन्क्वायरी शुरू कर दी है जिसके लिए सिंगरौली रेलवे स्टेशन के रेल कर्मियों और परिवहन कर्ताओं के साथ सांठ-गांठ रखने वाले कर्मचारियों में हडक़म्प की स्थिति बन गयी है। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक इस हेराफेरी में सिंगरौली के स्टेशन के कर्मचारी जांच की जद मे हंै। जिसके लिये रेलवे की उच्च स्तरीय टीम स्टेशन से लेकर मंडल कार्यालय और हाजीपुर जोन तक रिकार्ड ख्ंागाल रही है। बताया तो यह भी जा रहा है आला अधिकारी चपेट में आ सकते हैं। सिंगरौली से गैर प्रांतों में स्थित विद्युत उत्पादक कम्पनियों को कोयला भेजने की धुन में स्पर साइडिंग से दो दर्जन से अधिक निजी ट्रांसपोर्टर्स कोयले के कारोबार में लगे थे। जिसमें नामीगिरामी कम्पनियां भी है। 
शुरूआती दौर में हुआ हेरफेर
शुरूआती दौर से ही बिना प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की अनुज्ञा लिए हुए है लाखों टन कोयला सिंगरौली से दिल्ली, गाजियाबाद और हरियाणा, पंजाब, यूपी व राजस्थान के पावर प्लांटों पर भेज दिया गया है। जिसको लेकर कभी कोयले में पत्थर मिक्स किये जाने तो कभी डिसेलिंग प्लांट से निकले रिजेक्ट कोयले को मिलाकर भेजे जाने की खबरें आम हो रही थी। निर्धारित मात्रा से कई गुना अधिक कोयले का स्टॉक जमाकर वारफेज की धज्जियां उड़ाने वाले ट्रांसपोर्टर्स और रेलवे के गुर्गे इन्क्वायरी सामने आने से सांसत मे हैं। जिसको लेकर शिकंजा कसा जा रहा है यदि जांच निष्पक्ष रूप से हुई तो इस खेल में लगे रेल कर्मचारियों को इसका बड़ा खामियाजा भुगतना पड़ सकता है। जिस तेजी से अप्रैल से लेकर जून के महीने तक कोयले की अंधाधुंध ट्रांसपोॢटंग की गई है उसके परिणाम अब सामने आने लगे हैं।
जमा है हजारों टन जला हुआ कोयला
कोयला परिवहनकर्ताओं की मनमानी से पत्थर राख मिक्स कोयले को मालगाड़ी में लोड करने की लत और रेल कर्मियों की मिलीभगत से किये जाने वाले गोरखधंधे का आलम यह है कि एडवांस रकम लगाकर कोयला खरीदने वाले कोयला कारोबारियों को अपने स्टॉक में हजारों टन कोयला जल जाने की फिक्र नहीं रही। क्योंकि उन्हें क्वालिटी से कोई सरोकार नहीं रहा, किसी भी तरह कोयले की क्वांटिटी पूरी कर लेने से अभी भी कोल स्टॉक यार्ड में हजारों टन जला हुआ कोयला व उसकी राख जमा है।
 

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