दैनिक भास्कर हिंदी: तेंदूपत्ता संग्राहकों को जूतों से हो सकता था केंसर, केन्द्रीय चर्म अनुसंधान संस्थान चैन्नई की रिपोर्ट

August 27th, 2018

डिजिटल डेस्क, कटनी। तेंदूपत्ता संग्राहकों को बांटे गए जूते चप्पलों में कैंसर वाला रसायन मिलने से पूरे प्रदेश में खलबली मच गई। प्री-डिलेवरी टेस्ट में यह बड़ी लापरवाही उजागर हुई है। कटनी जिले में भी तेंदूपत्ता संग्राहकों को खतरनाक रसायन वाले करीब 25 हजार जोड़ी जूते बंटने के लिए आए हुए थे। केन्द्रीय चर्म अनुसंधान संस्थान चैन्नई की लैब में जांच के बाद जूतों का वितरण रोक दिया गया था, जबकि महिला तेंदूपत्ता संग्राहकों को 25 हजार जोड़ी चप्पलों का वितरण कर दिया गया।

जानकारी के अनुसार शासन से तेंदूपत्ता संग्राहकों को वितरण के लिए आए जूतों के इनरसोल का परीक्षण वन विभाग ने जब  केन्द्रीय चर्म अनुसंधान संस्थान चैन्नई की लैब में कराया तो जांच में एजेडओ रसायन मिला। जिससे जूतों का वितरण रोक दिया गया और उन्हें वापस भोपाल भेज दिया गया।

परीक्षण पर सवाल
वन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार कटनी वन मंडल में 50 हजार तेंदूपत्ता संग्राहक हैं, जिनमें 25 हजार महिलाएं हैं। तेंदूपत्ता संग्राहकों को जो जूता-चप्पल बांटे जाना थे उसकी प्री-डिलेवरी केमिकल जांच कराते हुए कटनी भेजा गया था। जब जूते की पोस्ट डिलेवरी जांच कराई गई, तब उसमें एजेडओ रसायन की पुष्टि हुई। जिसके बाद वितरण पर रोक लगा दी गई।

हानिकारक है एजेडओ
विशेषज्ञों के अनुसार एजेडओ केमिकल कई बार हानिकारक हो जाता है। जूते-चप्पल में जिन रंगों का उपयोग होता है। उसे एजेडओ कहते हैं। कई बार एजेडओ कम्पाउड क्रिया कर एमीनो बना लेते हैं। जिन्हें एमाइन कहते हैं। ऐसे में कुछ एमाइन हानिकारक होते हैं।  

25 हजार तेंदूपत्ता संग्राहक वंचित
जूतों के इनरसोल में खतरनाक रसायन की पुष्टि होने से जिले के 25 हजार संग्राहक शासन की सुविधा से वंचित हो गए। यह तो अच्छा हुआ कि उन्हें जूते वितरण नहीं किए गए थे। अन्यथा जिस तरह से रिपोर्ट वर्तमान समय में आ रही है। उससे यहां के तेंदूपत्ता संग्राहक बड़ी मुसीबत में फंस सकते थे।

इनका कहना है
जिले में करीब 25 हजार चप्पलों का वितरण महिला तेंदूपत्ता संग्राहकों को किया जा चुका है। इतने जूते ही बंटने को आए थे। केन्द्रीय चर्म अनुसंधान संस्थान चैन्नई से जूतों के इनरसोल की जांच कराई गई। वितरण के पहले कराई गई जांच में पता चला कि इनर सोल में एजेडओ रसायन है। रिपोर्ट मिलने के बाद जूतों का वितरण नहीं किया गया। केमिकल कितना हानिकारक है, इसकी जानकारी नहीं है।  
- गौरव मिश्रा, एसडीओ  वन विभाग कटनी

 

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