comScore

70 सालों से गुरू पूर्णिमा पर खंडवा धाम जा रहे रथ को इस बार अनुमति का इंतजार 

70 सालों से गुरू पूर्णिमा पर खंडवा धाम जा रहे रथ को इस बार अनुमति का इंतजार 

डिजिटल डेस्क छिंदवाड़ा/पांढुर्ना। बीते करीब 70 सालों से पांढुर्ना के टपरिया श्री दादाजी दरबार से श्रीक्षेत्र खंडवा धाम जाने वाले दादाजी महाराज के रथ को इस साल अनुमति का इंतजार है। हर साल गुरू पूर्णिमा से ठीक एक महीने पहले दादाभक्त पैदल खींचते हुए रथ को पांढुर्ना से खंडवा धाम ले जाने के लिए रवाना होते रहे है। परंतु इस साल कोरोना संक्रमण के चलते बनी परिस्थितियों से रथ को खंडवा धाम ले जाने की अनुमति नही मिल सकी है। बताया जा रहा है कि आठ जून को खंडवा में होने वाली ट्रस्ट और प्रशासन की बैठक में रथ निकाले जाने का निर्णय होना है। इस निर्णय का क्षेत्र के दादाभक्तों को बेसब्री से इंतजार है।
मिली जानकारी के अनुसार बीते करीब 70 सालों से एक परंपरा की भांति पांढुर्ना के श्री दादाजी दरबार टपरिया से खंडवा धाम की ओर रथ ले जाने का सिलसिला निरंतर चल रहा है। इस साल कोरोना संक्रमण के चलते रथ को चलाकर खंडवा धाम ले जाने की अनुमति अब तक नही मिल सकी है। हर साल गुरू पूर्णिमा पूजन के लिए रथ खंडवा धाम ले जाया जाता है। इस साल आगामी चार जुलाई को गुरू पूर्णिमा पर्व है, पर अनुमति नही मिलने से फिलहाल अब तक रथ नही निकाला गया है, जबकि दादाभक्तों ने रथ को निकालने की तैयारी पूरी कर लीं है। तीस दिनों में पांढुर्ना से खंडवाधाम की तीन सौ किलोमीटर की यह रथ यात्रा पूरी होती है। पांढुर्ना के दादाभक्तों की रथ यात्रा को लेकर अपार आस्था जुड़ी हुई है।
70 सालों से यूं चल रहा रथ ले जाने का सिलसिला
 दादाभक्त मनोहर अरमरकर ने बताया कि दादाभक्त घनश्याम चउत्रे ने गुरू पूर्णिमा के अवसर पर दादाजी महाराज का रथ खंडवा धाम ले जाने की परंपरा शुरू कीं। करीब 25 सालों तक उन्होंने परंपरा निभाई। इनके बाद मनोहर अरमरकर ने रथ निकाला, अब बीते दो सालों से इनके बेटे पियूष अरमरकर रथ निकालकर खंडवा धाम ले जा रहे है। रथ में बड़े दादाजी और छोटे दादाजी की प्रतिमाओं के साथ निशान सजाए जाते है। लगभग पचास भक्त रथ के साथ चलते है और नियमित पूजन के साथ रथ बैतूल, चिचोली, टिमरनी के रास्ते रथ तीस दिन की यात्रा कर खंडवा धाम पहुंचता है। बाद में वाहन के माध्यम से रथ को वापस पांढुर्ना लाया जाता है।

कमेंट करें
lmR2t