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बंदरों ने वन विभाग को ऐसा दिया टेंशन कि भोपाल के अधिकारियों से मांग रहे मदद

बंदरों ने वन विभाग को ऐसा दिया टेंशन कि भोपाल के अधिकारियों से मांग रहे मदद

डिजिटल डेस्क  कटनी । शहर और ग्रामीण अंचलों में बंदरों के उत्पात से आम जन परेशान है, तो वन विभाग की नींद उड़ी हुई है। दरअसल बंदरो का यह टेंशन विभाग के ऊपर सीएम हेल्पलाइन में दर्ज कराई गई शिकायतों को लेकर है। वन विभाग में 81 शिकायतें ऐसी हैं, जो बंदरों के आतंक के संबंध में हैं। ये शिकायतें अरसे से पड़ी हुई हैं। जिसके चलते सीएम हेल्पलाइन के निराकरण में वन विभाग को हमेशा अधिकारियों की डांट-फंटकार सुननी पड़ती है और बंदरों के आतंक को लेकर स्थानीय निकाय और वन विभाग आमने-सामने दिखाई दे रहे हैं। वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि इन्हें पकडऩे के लिए वन विभाग के पास किसी तरह की कार्ययोजना नहीं है। यह काम नगरीय क्षेत्र में संबंधित निकायों और ग्रामीण क्षेत्र में पंचायतों का है। लेकिन पूरा दोषारोपण करते हुए वन विभाग के सिर पर ठीकरा फोडऩे का काम स्थानीय निकाय के अधिकारी कर रहे हैं।
मथुरा में हैं एक्सपर्ट
बंदरों को पकडऩे के लिए मथुरा या फिर नैरादेही में युवाओं की एक्सपर्ट टीम है। लेकिन इस टीम को बुलाने के लिए वन विभाग के पास अलग से बजट नहीं है तो स्थानीय निकाय के अधिकारी भी यह कहकर हाथ खड़े कर रहे हैं कि बंदरों का मामला वन विभाग का है। ऐसे में वन विभाग के अधिकारियों की यह जिम्मेदारी बनती है कि बंदरों पर वे नियंत्रण करें।
किसान सर्वाधिक परेशान
इससे सबसे अधिक परेशानी किसानों को हो रही है। जिसमें किसानों ने सीएम हेल्पलाइन में शिकायत दर्ज कराई है कि बंदर उनके खेतों में पहुंचकर सब्जी और अन्य फसलों को नष्ट कर रहे हैं। खेतों की तकवारी एक ही चौकीदार करता है, लेकिन बंदरों का झुण्ड वहां पर इस तरह से पहुंचता है कि चौकीदार के भी हाथ-पैर फूलने लग जाते हैं। शहरी क्षेत्र में भी लोगों की यह समस्या है कि घर का दरवाजा खुला होने पर बंदर उनके घर की सामग्री लेकर बाहर फेंक देते हैं।
शिकायतों से टेंशन
सीएम हेल्पलाइन में लंबित शिकायतों के निराकरण में वन विभाग के अधिकारियों को पसीने छूट रहे हैं। आलम यह है कि शिकायकर्ता के पास जब वे पहुंचते हैं तो वहां पर बंदर नहीं मिलता और शिकायकर्ता अपनी जिद पर अड़ा रहता है कि दोबारा फिर से बंदर यहां पर पहुंचकर उत्पात मचाएगा। इस टेंशन
को मिटाने में ही अधिकारी कीमती समय खर्च कर रहे हैं।
भोपाल से मांगी मदद
बंदरों के आतंक का यह मामला भोपाल भी पहुंच चुका है। जिसमें अधिकारियों ने कहा है कि बेवजह सीएम हेल्पलाइन में लंबित शिकायतों से वन विभाग की किरकिरी हो रही है। जिसे भोपाल स्तर से बंद कराया जाए। हालांकि भोपाल स्तर के अधिकारी भी यह कहकर कन्नी काट लिए हैं कि इन शिकायतों का निराकरण तभी हो सकता है। जब शिकायकर्ता अपनी सहमति दे।
इनका कहना है
 यह परेशानी अकेले जिले की नहीं है। पूरे प्रदेश में इस तरह की परेशानी है। स्थानीय निकायों की यह जिम्मेदारी है कि वे बंदरों पर नियंत्रण करें, लेकिन वे हाथ खड़े कर रहे हैं। विभाग के पास बंदरों के नियंत्रण को लेकर कोई योजना नहीं है। इस संबंध में भोपाल के अधिकारियों से निर्देश मांगे गए हैं।
- ए.के.राय, डीएफओ वन विभाग कटनी
 शहर में फिलहाल इस तरह की समस्या नहीं है। रही बात बंदरों को नियंत्रण करने की तो यह वन्य प्राणी की श्रेणी में आता है। जिस पर किसी भी तरह से कार्यवाही करने का अधिकार वन विभाग को है। इसमें  स्थानीय निकाय सहभागिता निभा सकती है।
-आर.पी. सिंह, कमिश्नर नगर निगम कटनी
 

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