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कॉरीडोर से सतना पहुंच गया बांधवगढ़ का टाइगर, उल्टे पैर भागे वनकर्मी

January 02nd, 2019 16:42 IST
कॉरीडोर से सतना पहुंच गया बांधवगढ़ का टाइगर, उल्टे पैर भागे वनकर्मी

डिजिटल डेस्क, सतना। परसमनिया पठार के धनिया बीट के घने जंगल टाइगर की दहाड़ से गूंज उठे। रोपणी में चल रहे काम की निगरानी करने जा रहे वनकर्मियों ने जैसे ही पगडंडी में टाइगर के ताजे पगमार्क देखे, वैसे ही इधर-उधर आहट लेने लगे। कुछ ही देर में उसने अपनी मौजूदगी की तस्दीक दहाड़ लगाकर की। गर्जना सुनते ही वनकर्मी उल्टे पैर भाग खड़े हुए।

मालूम हो कि बीते कुछ सालों से ठंड के दिनों में प्राय: प्रतिवर्ष टाइगर परसमनिया पठार के जंगल में पहुंच जाता है। इस बार धनिया और उरईचुआ के कक्ष क्रमांक पी-417 और पी-413 के बीचों-बीच वनराज ने अपना ठिकाना बनाया है। टाइगर की मौजूदगी के चश्मदीद बीट गार्ड रामदयाल दुबे का दावा है कि यह टाइगर बरही की ओर से यहां आ गया है। यह रास्ता बाघों का पुराना कॉरीडोर है और बाघ 200 सालों तक अपने पुरखों के कॉरीडोर को याद रखते हैं। यह उनके अंदर कुदरती गुण होता है। वन संरक्षक राजीव मिश्र ने कहा कि जिले के जंगल में बाघों के लिए पर्याप्त भोजन-पानी और आश्रय मौजूद है। टाइगर की मौजूदगी के मद्देनजर मैदानी अमले को पूरी तरह से सतर्क कर दिया गया है। उसे हर तरह की सुरक्षा का ध्यान रखा जाएगा। आसपास के ग्रामीणों को हिदायत दी जा रही है कि जंगल की ओर नहीं जाएं। 

और क्या चाहिए ?
बाघों के लिए परसमनिया पठार में पूरी तरह से अनुकूल वातावरण निर्मित हुआ है। यहां सतधारा और बरुआ नाले में भरपूर पानी मौजूद है जो पूरी गर्मी बना रहता है। बाघों के लिए यहां भोजन की कमी नहीं है। एक तो जंगल में हिरण, सांभर और दूसरे शाकाहारी जानवर काफी संख्या में मौजूद हैं। इनके अलावा अन्ना मवेशी भी इन दिनों जंगल के आसपास लावारिश हालत में घूमते रहते हैं। बाघ इनका भी शिकार आसानी से कर लेते हैं। भोजन और पानी के अतिरिक्त बाघों के आश्रय के लिए घना जंगल मौजूद है। उचेहरा रेंजर रमाशंकर त्रिपाठी का कहना है कि बाघ की मौजूदगी को एक टास्क की तरह लेकर उसके मूवमेन्ट पर लगातार नजर रखी जा रही है।

बरही या पन्ना 
परसमनिया पठार में चहलकदमी कर रहे वनराज बरही की तरफ से आए अथवा पन्ना टाइगर रिजर्व की ओर से यहां पहुंचे, इस बात पर लोग एक राय नहीं हैं। कुछ लोगों का मानना है कि यह टाइगर कुछ दिन पहले बरही के आसपास जंगल में धमाचौकड़ी मचा रहा था, वहां पर कई मवेशियों को मारा था। इन दिनों वहां इसकी आहट नहीं मिल रही है, लिहाजा वहीं से यहां पहुंचा। इसके उलट कुछ लोग यह मानते हैं कि साल दर साल पन्ना टाइगर रिजर्व से कोई न कोई बाघ यहां पहुंच जाता है। इस वर्ष भी संभवत: वहीं से यह आ पहुंचा। एक बात साफ है कि इस टाइगर के कालर आईडी नहीं लगी है वरना अब तक टाइगर रिजर्व के प्रबंधन को इसकी लोकेशन के बारे में पता चल गया होता। 

इनका कहना है
मैदानी कर्मचारियों ने उचेहरा रेंज के धनिया-उरईचुआ बीट में टाइगर की मौजूदगी के बारे में सूचना दी है। उसकी पूरी तरह से पुष्टि तथा सुरक्षा के लिए सतर्कता बढ़ा दी गई है। आसपास के ग्रामीणों को भी एहतियाती निर्देश दे दिए गए हैं। 
राजीव मिश्र वन संरक्षक
 

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