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रणनीतिक योजना बनाकर बालाकोट पर किए हमले से हमें अपनी क्षमताओं का पता चला

रणनीतिक योजना बनाकर बालाकोट पर किए हमले से हमें अपनी क्षमताओं का पता चला

डिजिटल डेस्क, नागपुर। बालाकोट पर वायुसेना ने जो हमला किया, उस पर हमें गर्व है। इस तरह की रणनीतिक योजना बनाकर किए गए हमले से हमें अपनी क्षमताओं का पता चला है। यह बातें मुख्य अतिथि के रूप में नागपुर मेंटेनेंस कमांड मुख्यालय एयर मार्शल आरकेएस शेरा ने कही हैं। वह वायुसेना के 87वें स्थापना दिवस व 9वें वार्षिक कार्यक्रम के अवसर पर सेमिनरी हिल्स स्थित नागपुर वेटरनरी कॉलेज के रजत जयंती सभागृह में  बोल रहे थे। कार्यक्रम का आयोजन एयर फोर्स एसोसिएशन (एएफए) और एक्स-एयर वॉरियर्स वेलफेयर एसोसिएशन (ईवान) के तत्वावधान में किया गया। मंच पर विशेष अतिथि के रूप से महाराष्ट्र पशु व मत्स्य विज्ञान विश्वविद्यालय के कुलगुरु कर्नल आशीष पातुरकर, एयर वाइस मार्शल ए. मनिकंटन,  एयर कोमोडोर आशीष चतुर्वेदी, एएफए के अध्यक्ष ग्रुप कैप्टन सुहास पाठक व ईवान के अध्यक्ष मनोहर भातकुलकर उपस्थित थे।

मिहान में एविएशन की काफी संभावनाएं

प्रमुख एयर मार्शल ने कहा कि एविएशन सेक्टर लगातार फैल रहा है। सिविल सेक्टर में भी बहुत काम हो रहा है। नागपुर के मिहान में भी एविएशन सेक्टर में काफी संभावनाएं हैं। चंद्रपुर का सैनिक स्कूल सभी तरह से शायद देश का सबसे अच्छा स्कूल है। ऐसी स्थिति में सभी को प्रेरित करना चाहिए कि वह अपने बच्चों को सैनिक स्कूल में भेजें।

युवाओं को प्रेरित करते हैं

प्रमुख एयर मार्शल ने कहा कि कानपुर से मेंटेनेंस मुख्यालय 1993 में नागपुर शिफ्ट हुआ। वर्तमान में हम लड़ाकू विमान से लेकर हेलिकॉप्टर, राडार, कम्युनिकेशन सिस्टम सभी का ओवरहॉल कर रहे हैं। हम सुरक्षा को लेकर काफी गंभीर हैं और परिवार से लेकर सारे विषय पर ध्यान रखते हैं। यह सोशल मीडिया का वायरल वाला दौर है। इस दौर में राष्ट्रविरोधी तत्वों को ध्यान में रखकर काम किया जाता है। ईवान के अध्यक्ष श्री भातकुलकर ने कहा कि हमारी संस्था विद्यार्थियों को सैन्य सेवाओं से जुड़ने के िलए प्रेरित करती है। एएफए अध्यक्ष श्री पाठक ने कहा कि देश में हमारे 35 हजार सदस्य हैं। तकनीकी कारणों से कुछ वीर नारियों को पेंशन नहीं मिल पाती है, ऐसे में हम उनको शुरुआती 7 साल तक पेंशन के स्वरूप में 3 हजार रुपए देंगे। इस अवसर पर आरकेएस शेरा के हाथों वेटर्न शेखर आत्मने, मंगल सिंह चौहान, लीलाधर वानखेड़े, राजू धांडे व रमेश गायकवाड़ का सम्मान किया गया।

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Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

डिजिटल डेस्क, जबलपुर। किसी के लिए भी प्रॉपर्टी खरीदना जीवन के महत्वपूर्ण कामों में से एक होता है। आप सारी जमा पूंजी और कर्ज लेकर अपने सपनों के घर को खरीदते हैं। इसलिए यह जरूरी है कि इसमें इतनी ही सावधानी बरती जाय जिससे कि आपकी मेहनत की कमाई को कोई चट ना कर सके। प्रॉपर्टी की कोई भी डील करने से पहले पूरा रिसर्च वर्क होना चाहिए। हर कागजात को सावधानी से चेक करने के बाद ही डील पर आगे बढ़ना चाहिए। हालांकि कई बार हमें मालूम नहीं होता कि सही और सटीक जानकारी कहा से मिलेगी। इसमें bhaskarproperty.com आपकी मदद कर सकता  है। 

जानिए भास्कर प्रॉपर्टी के बारे में:
भास्कर प्रॉपर्टी ऑनलाइन रियल एस्टेट स्पेस में तेजी से आगे बढ़ने वाली कंपनी हैं, जो आपके सपनों के घर की तलाश को आसान बनाती है। एक बेहतर अनुभव देने और आपको फर्जी लिस्टिंग और अंतहीन साइट विजिट से मुक्त कराने के मकसद से ही इस प्लेटफॉर्म को डेवलप किया गया है। हमारी बेहतरीन टीम की रिसर्च और मेहनत से हमने कई सारे प्रॉपर्टी से जुड़े रिकॉर्ड को इकट्ठा किया है। आपकी सुविधाओं को ध्यान में रखकर बनाए गए इस प्लेटफॉर्म से आपके समय की भी बचत होगी। यहां आपको सभी रेंज की प्रॉपर्टी लिस्टिंग मिलेगी, खास तौर पर जबलपुर की प्रॉपर्टीज से जुड़ी लिस्टिंग्स। ऐसे में अगर आप जबलपुर में प्रॉपर्टी खरीदने का प्लान बना रहे हैं और सही और सटीक जानकारी चाहते हैं तो भास्कर प्रॉपर्टी की वेबसाइट पर विजिट कर सकते हैं।

ध्यान रखें की प्रॉपर्टी RERA अप्रूव्ड हो 
कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।