Panna News: हर साल बढ़ रहे हैं टीबी के मामले, पांच साल में ३४२ की मौत, पांच साल में पन्ना जिले में १३०९४ केस मिलें, ११५९६ हुए ठीक ३०९ ने बीच में छोड इलाज

हर साल बढ़ रहे हैं टीबी के मामले, पांच साल में ३४२ की मौत, पांच साल में पन्ना जिले में १३०९४ केस मिलें, ११५९६ हुए ठीक ३०९ ने बीच में छोड इलाज
टीबी उन्मूलन के लिए प्रधानमंत्री के लक्ष्य के बीच भी पन्ना जिले में पिछले पांच वर्षों में इस बीमारी के बढ़ते संक्रमण ने स्वास्थ्य विभाग को गंभीर चिंता में डाल दिया है।

Panna News: टीबी उन्मूलन के लिए प्रधानमंत्री के लक्ष्य के बीच भी पन्ना जिले में पिछले पांच वर्षों में इस बीमारी के बढ़ते संक्रमण ने स्वास्थ्य विभाग को गंभीर चिंता में डाल दिया है। पन्ना जिले में पिछले पांच वर्ष के टीबी को लेकर जो आकंडे उपलब्ध हुए है वर्ष २०२० से वर्ष २०२४ तक पांच वर्ष के दौरान जिले में टीबी की बीमार से संक्रमित हुए कुल १३०९४ मामले सामने आए है। वर्ष २०२० में जहां टीबी के कुल १८६७ मरीज पाए गए थे वहीं वर्ष २०२४ में २९६२ मरीज टीबी से संक्रमित पाए गए। जिले में वर्ष २०२३ को छोड देंवे तो टीबी की मरीजो की संख्या हर साल वृद्धि के रूप दर्ज की गई है। पंाच साल के दौरान जांच में टीबी पॉजटिवि कुल १३०९४ मरीज पाए गए है उनको लेकर संतोषप्रद स्थिति कही जा सकती है कि उपचार पाकर ११५९६ मरीज स्वास्थ्य भी हुए है। टीबी संक्रमित मरीजों के बीच में उपचार छोड देते है पिछले पांच सालो में बीच इलाज छोड देने वाले मरीजों की संख्या ३०९ दर्ज हुई है टीबी की बीमारी अभी भी घातक बनी हुई है पांच साल के दौरान जिलें में कुल ३४२ मरीजो की मौत दर्ज हुई है।

वर्ष २०२५ में अब तक लक्ष्य से अधिक मिले मरीज

टीबी के मामले में पन्ना की स्थिति औसतन रूप से चिंता जनक है वर्ष २०२५ के लिए जिले मेेंं अनुमानित टीबी की मरीजों का लक्ष्य शासन स्तर पर तय किया जाता है किन्तु जिले में अभी तक इस लक्ष्य से अधिक टीबी के २२३० नए मामले सामने आ चुके है। क्षय विभाग की जानकारी के अनुसार जिले में ०२ लाख ५१ हजार ११२ संदिग्धों की पहचान कर जांच का लक्ष्य प्राप्त हुआ है जिसके विरूद्ध ०१ लाख ८३ हजार संदिग्ध की स्कैनिंग की जा चुकी है।

टीबी जांच और उपचार की सुविधाएं उपलब्ध

जिले में जिला अस्पताल पन्ना समेत 12 डीएमसी केंद्रों और दो निजी अस्पतालों में टीबी जांच एवं उपचार नियमित चल रहे हैं। मरीजों की पहचान मुख्यत: बलगम के सैम्पल और एक्सरे जांच द्वारा की जाती है। उपचार के दौरान रोजाना दवा लेने की निगरानी भी होती है।

ड्रग रेजिस्टेंट टीबी का खतरा

अगर मरीज समय पर और नियमित दवाएं नहीं लेते हैं तो बीमारी गंभीर एमडीआर टीबी का रूप ले सकती है जिसका इलाज लंबा और कठिन होता है। पन्ना जिले में डीआर टीबी के 70 मरीज पाए गए हैंए जिनमें मृत्यु दर अधिक है।

पांच सालों में वर्षवार जिले में दर्ज टीबी प्रकरण

वर्ष दर्ज मरीज ठीक हुए मृत

२०२० १८६७ १५१४ ७७

२०२१ २३२१ २०२९ ८०

२०२२ ३०१५ २८४० ५७

२०२३ २९२९ २८२२ ५८

२०२४ २९६२ २३९१ ७०

योग १३०९४ ११५९६ ३४२

उपचार के दौरान टीबी संक्रमित मरीज को हर माह १००० रूपए की मदद

सरकार द्वारा टीबी संक्रमित मरीजों में पोषण की कमी नहीं हो इसके लिए निक्षय पोषण योजना के तहत प्रोटोकाल अनुसार ०६ माह की अवधि सामान्य टीबी के मामले में दवा उपचार के दौरान तक हर माह १००० रूपए की आर्थिक सहायता राशि प्रदान की जाती है मरीज के पंजीयन के साथ ही उसके बैंक खाते की जानकारी प्राप्त कर राशि का भुगतान सीधे उनके आधार लिंक डीबीटी बैंक खाते में भुगतान कर दिया जाता है जिले में निक्षय पोषण योजना के अंतर्गत सभी मरीजो को राशि प्रदान की जा रही है।

जागरूकता का अभाव संक्रमण के उपायों की अनदेखी

टीबी की समय पर जांच और उपचार से इस बीमारी का पूरी तरह इलाज संभव है। यदि किसी व्यक्ति का टीबी संक्रमण हो जाता है तो ०6 माह तक प्रोटोकॉल के अनुसार दवाओं का नियमित सेवन कर बीमारी को ठीक किया जा सकता है। सरकार के डॉट्स प्रोग्राम के तहत जांच उपचार और दवाएं नि:शुल्क उपलब्ध कराई जाती हैं। साथ ही मरीजों को आना-जाना करने के लिए भी वित्तीय सहायता दी जाती है। जिला क्षय रोग अधिकारी जीतेन्द्र यादव के अनुसार टीबी रोग के फैलाव को रोकने के लिए संक्रमण से बचाव के आवश्यक उपायों का पालन अत्यंत जरूरी है। किंतु लोगों में जागरूकता की कमी उपचार के प्रति उदासीनता और लापरवाहीव टीबी के उन्मूलन में बड़ी बाधा बन रही हैं।

टीबी पीडितों की सामाजिक मदद में पीछे पन्ना

टीबी पीडित मरीजों को बेहतर पोषण उपलब्ध हो इसके लिए सामाजिक अभियान के माध्यम से उनके लिए फुड बास्केट को जुटाना और उन्हें उपलब्ध करना निक्षय मित्र कार्यक्रम शामिल है परंतु इस दिशा में प्रशानिक स्तर पर सामाजिक मदद के लिए प्रभावी रूप से पहल नहीं हुई है और अब तक सिर्फ ४१८ फुड बास्केेट ही लोगों की ओर से उपलब्ध हुए है। इस दिशा में प्रशासन को सामाजिक पहल से मिलने वाली मदद पर फोकस किए जाने की जरूरत है जिले में औद्योगिक एवं व्यवसायिक संस्थानो का समर्थन भी सामने नहीं आ रहा है।

जिला अस्पताल में अभी तक नहीं बना अलग से टीबी वार्ड

टीबी एक संक्रामक बीमारी है इस बीमारी से पीडित मरीजों के उपचार के लिए पृथक से वार्ड होना जरूरी है जहां पर संक्रमण की रोकथाम के लिए बेहतर तरीके से प्रबंध हो किन्तु पन्ना जिला चिकित्सालय में अभी तक पृथक से टीबी वार्ड नहीं बना है और टीबी संक्रमित मरीजों के उपचार को लेकर आमतौर यह स्थिति देखी जा सकती है कि सामान्य मरीजों के साथ भर्ती कर उन्हें उपचार दिया जाता है इसके चलते जिला अस्पताल में ही हमेशा टीबी संक्रमण का खतरा बना रहता है जो कि चिंताजनक है।

दो दशक से जिला क्षय अधिकारी का पद खाली, स्टाफ की कमी

जिले में टीबी के संक्रमण की स्थिति चिंताजनक है और टीबी उन्मूलन के लक्ष्य की प्राप्ति के लिए प्राथमिकता के साथ कार्य करने की जरूरत है किन्तु जिले में क्षय उन्मूलन कार्यक्रम को सफलता के साथ क्रियान्वयन करनें के लिए जो जरूरी स्टाफ होना चाहिए वह नहीं है। जिला क्षय अधिकारी का पद पिछले दो दशक से रिक्त पडा हुआ है इसके साथ जिला क्षय केन्द्र में सहायक सांख्यिकी अधिकारी, रेडियोग्राफर, ट्रीटमेंट आर्गनाईजर जैसे महत्वपूर्ण पद रिक्त पडे हुए है। जिला क्षय केन्द्र सहायक ग्रेड-३ के दो कर्मचारियों तथा दो लैब टेक्नीशियनों और दो भृत्यों के भरोसे संचालित हो रहा है। नियमित रूप से स्वच्छता कर्मियों की तैनातगी नहीं होने से जिला शिक्षा केन्द्र के कार्यालय कक्ष के साथ ही लैब और अन्य कक्षों की साफ-सफाई नहीं हो पाती और इसके चलते संवेदनशील क्षेत्र ही संक्रमण के फैलाव की अधिक आशंकाओं को साफ तौर पर समझा जा सकता है। इसी तरह डीएमसी सेन्टरों के लिए जो जरूरी स्टाफ मानवीय संसाधन होने चाहिए उसकी स्थिति भी काफी कमजोर है।

इनका कहना है

टीबी का इलाज पूरी तरह से नि:शुुल्क है प्रोटोकाल के अनुसार ०६ माह तक सामान्य टीबी के मामलों में नियमित रूप से दवा लेने पर मरीज ठीक हो जाता है। भौगोलिक विषमता, जागरूकता की कमी, पलायन, पोषण की कमी के साथ ही नशे की प्रवृत्तियां इसी बीमारी के उपचार और रोकथाम के लिए चुनौती बनी हुई है। वृहद स्तर पर टीबी के मरीजों की पहचान के लिए ग्रास रूट लेवल तक नियमित रूप से स्कैनिंग का कार्य कर रहे है इसके साथ ही टीबी मरीजो के सम्पर्क मेें आने वाले व्यक्तियों के रक्त परीक्षण आईजीआरए टेस्ट की सुविधा पूर्णत: नि:शुल्क है इस पर संक्रमण के संभावित व्यक्तियों की जांच पर भी फोकस कर रहे हैं। सभी मधुमेह कैंसर, डायलिसिस मरीजों हेतु त्वचा परीक्षण सीवाया-टीबी की जांच की सुविधा भी पूर्णत: नि:शुल्क है इस जांच में संक्रमित पाए गए व्यक्तियों को तीन माह की दवा नि:शुल्क रूप से प्रदान की जाती है जिसे टीबी संक्रमण समाप्त हो जाता है।

डॉ. जीतेन्द्र यादव

प्रभारी क्षय अधिकारी जिला पन्ना

Created On :   29 Nov 2025 2:10 PM IST

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