Pune City News: वेस्ट बायोमाइनिंग करने की इच्छुक 18 में से 11 कंपनियों के पास अनुभवहीन

वेस्ट बायोमाइनिंग करने की इच्छुक 18 में से 11 कंपनियों के पास अनुभवहीन
  • बची ज्यादातर कंपनियों के काम को लेकर विभिन्न जगहों पर शिकायतें
  • 573 रुपए प्रति मीट्रिक टन की दर
  • विवादित कंपनियां भी काम लेने की कतार में

भास्कर न्यूज, पुणे। देवाची उरुली स्थित कचरा डिपो में पड़े 28 लाख मीट्रिक टन पुराने कचरे को संसाधित करने के लिए मनपा प्रशासन द्वारा निकाले गए पांच अलग-अलग टेंडरों के लिए 38 निविदाएं आई हैं। 18 ठेकेदार कंपनियों ने 38 निविदाएं भरी हैं। उनमें से 11 ठेकेदार कंपनियों को कचरे को संसाधित करने के काम का बिलकुल अनुभव नहीं है। बची सात कंपनियों में से चार से पांच कंपनियों पर विभिन्न राज्यों की परियोजनाओं में सही तरीके से काम न करने के कारण कार्रवाई की गई है।

अब सवाल खड़ा हो रहा है कि मनपा ने हाई कोर्ट के निर्देशों को नजरअंदाज करते हुए टेंडर की शर्तों में बदलाव आखिर किसके लिए और क्यों किया है? नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के आदेशानुसार पुणे मनपा ने 2018 से देवाची उरुली स्थित कचरा डिपो में जमा लाखों टन कचरे पर प्रसंस्करण का काम शुरू कर दिया है। इसके लिए मनपा करोड़ों रुपए खर्च कर रही है। लगभग 163 एकड़ क्षेत्र में फैले कचरा डिपो परिसर में से अब तक लगभग 20 लाख टन कचरे को संसाधित कर उसका वैज्ञानिक रूप से निपटान किया जा चुका है। वहां कचरे को संसाधित कर जगह खाली की जा रही है। अब तक काम के लिए दो बार निविदा प्रक्रिया कर 20 लाख मीट्रिक टन से अधिक कचरे का निपटान किया जा चुका है और 30 एकड़ से अधिक जमीन खाली की गई है। अब तक मनपा ने ठेकेदार कंपनियों की आर्थिक क्षमता, अनुभव और प्रकृति के लिए हानिकारक प्लास्टिक व अन्य कचरे को आरडीएफ यानी सीमेंट और ऊर्जा उत्पादन में उपयोग होने वाले उत्पाद में परिवर्तित करने की शर्त रखी थी। प्रक्रिया के लिए ठेकेदार को लगभग 970 रुपए टिपिंग फी प्रति टन दी जा रही है। यह काम वर्तमान में भूमि ग्रीन एनर्जी नामक कंपनी द्वारा किया जा रहा है।

573 रुपए प्रति मीट्रिक टन की दर

इस बीच आयुक्त का पदभार संभालने के बाद नवलकिशोर राम ने खर्च कम करने के लिए शेष 28 लाख मीट्रिक टन कचरे को संसाधित करने के लिए एक ही समय में पांच अलग-अलग टेंडर निकालने का निर्णय लिया और टेंडर जारी किए। ये टेंडर निकालते समय केंद्रीय आवास और शहरी कार्य मंत्रालय की गाइडलाइंस में यह छूट दी गई कि निर्माण क्षेत्र की कंपनियां भी पुराने कचरे की बायोमाइनिंग कर सकती हैं और आरडीएफ उत्पादन की शर्त भी शिथिल कर दी गई है। टेंडर के लिए 573 रुपए प्रति मीट्रिक टन की दर तय की गई है। टेंडर की शर्तों में बदलाव के कारण पांचों टेंडरों को अच्छा प्रतिसाद मिला है। पांचों टेंडरों के लिए पांच से 10 कंपनियों ने मिलकर 38 टेंडर भरे हैं।

विवादित कंपनियां भी काम लेने की कतार में

प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार कचरे की बायोमाइनिंग के टेंडर भरने वाली कंपनियों में से 11 कंपनियों को कचरे की बायोमाइनिंग का कोई अनुभव नहीं है। टेंडरों की प्राथमिक जांच में सामने आया है कि शेष सात में से चार कंपनियों को घर-घर जाकर कचरा इकट्ठा करने, उसे अलग करने और उसे प्रोसेस करने का अनुभव है, जबकि दो कंपनियों ने पहले पुराने कचरे पर बायोमाइनिंग प्रक्रिया की है लेकिन निर्धारित समय सीमा में बहुत कम काम करने के कारण उन पर वहां के स्थानीय प्रशासन द्वारा कार्रवाई की गई है। साथ ही पर्यावरण के लिए हानिकारक प्लास्टिक जैसे कचरे का ठीक से निपटान न करने के कारण एनजीटी में मुकदमा भी चल रहा है।

पिछली बार जब मनपा ने बायोमाइनिंग का टेंडर निकाला था, तब आरडीएफ का उचित तरीके से निपटान करना अनिवार्य किया गया था। साथ ही, ठेकेदार काम बीच में न छोड़े और एनजीटी के आदेशानुसार निर्धारित समय सीमा में वैज्ञानिक तरीके से कचरे का निपटान करने के लिए परिवहन खर्च को ध्यान रखकर दरें तय की गई थीं। तब मनपा प्रशासन ने स्पष्टीकरण दिया था कि कचरे से बनने वाले आरडीएफ का वैज्ञानिक निपटान करने वाले सीमेंट कारखाने पुणे से 400 किलोमीटर दूर कर्नाटक में हैं, इसलिए दरें बढ़ी थीं। विशेष बात यह है कि टेंडर शर्तों के खिलाफ एक ठेकेदार ने अदालत का दरवाजा खटखटाया था। उस समय उदालत ने पर्यावरण की दृष्टि से कचरे से उत्पन्न आरडीएफ के वैज्ञानिक तरीके से निपटान की शर्त को पर्यावरण-अनुकूल और सही ठहराते हुए प्रशासन के पक्ष में फैसला सुनाया था।

बायोमाइनिंग संबंधी टेंडर तय गाइडलाइन के अनुसार निकाले गए हैं। बोलियों की तकनीकी जांच चल रही है। जिन ठेकेदारों ने कचरा प्रक्रिया में बिलकुल काम नहीं किया है, वे बाहर हो जाएंगी। टेंडर भरने वालों के पास बायोमाइनिंग प्रक्रिया करने और उससे बनने वाले उत्पादों का निपटान करने की कौनसी तकनीक है, इसका आयुक्त के सामने प्रस्तुतिकरण करना होगा। कंपनियों की पृष्ठभूमि की जांच के बाद ही टेंडर स्वीकार किए जाएंगे।

- पवनीत कौर, अतिरिक्त आयुक्त, मनपा

Created On :   29 Nov 2025 2:07 PM IST

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