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Pune City News: राज्य में पहली बार एकल माताओं के बच्चों का सर्वे

- शिक्षा विभाग का अनूठा प्रयोग
- जिलेवार आंकड़े किए जा रहे संकलित
- 2011 में थीं 54 लाख एकल माताएं
भास्कर न्यूज, पुणे। राज्य में एकल माताओं के बच्चों को शिक्षा के लिए सुविधाएं देने के उद्देश्य से शिक्षा विभाग द्वारा पहली बार एकल माताओं के बच्चों का सर्वेक्षण शुरू किया गया है। इसमें एकल माताओं के बच्चों के जिलेवार आंकड़े संकलित किए जा रहे हैं। राज्य के प्राथमिक शिक्षा निदेशक शरद गोसावी ने बताया कि अब तक लगभग 14 से 15 जिलों ने आंकड़े प्रस्तुत किए हैं। अगले सात से आठ दिनों में सभी जिलों के आंकड़े प्राप्त होंगे। पूरे राज्य के सभी जिलों से आंकड़े प्राप्त होने के बाद उन्हें सरकार को प्रस्तुत किया जाएगा।
राज्य में एकल माताओं की आर्थिक और सामाजिक स्थिति दयनीय है। एकल माताओं के लिए बच्चों को शिक्षित करना बहुत मुश्किल होता है। इस वजह से कई बार महिलाएं बच्चों को स्कूल से निकाल लेती हैं। इसलिए, एकल माताओं के बच्चों की संख्या संकलित करके उनकी शिक्षा पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। इसलिए प्राथमिक शिक्षा निदेशक ने राज्य के विभागीय शिक्षा उपनिदेशकों, प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा अधिकारियों, शिक्षा निरीक्षकों, मनपाओं और नगर पालिकाओं के प्रशासनिक अधिकारियों को परिपत्र के माध्यम से एकल माताओं के कक्षा पहली से 12वीं तक के बच्चों की संख्या संकलित करने के निर्देश दिए हैं।
निदेशक ने बताया कि एकल माताओं के बच्चों की विभिन्न समस्याएं हैं। एकल माताओं को आर्थिक मदद नहीं मिलती है। इस बात को ध्यान रखते हुए एकल माताओं के बच्चों की संख्या संकलित की जा रही है। अब तक लगभग 14 से 15 जिलों से एकल माताओं के बच्चों की संख्या जुटाई जा चुकी है। राज्य के सभी जिलों से आंकड़े प्राप्त होने के बाद उन्हें सरकार को प्रस्तुत किया जाएगा। यह संख्या देखकर विद्यार्थियों को सुविधाएं देने के संबंध में निर्णय लिया जा सकेगा। साथ ही, सरकार के अन्य विभागों की कोई योजनाएं हैं या नहीं और क्या उनका लाभ दिया जा सकता है, इस बारे में भी विचार किया जा सकता है।
2011 में थीं 54 लाख एकल माताएं
पूरे राज्य में बड़ी संख्या में काफी संख्या में एकल माताएं मिली हैं। 2011 की जनगणना के अनुसार राज्य में लगभग 54 लाख एकल माताएं हैं। हालांकि, एकल माताओं के बच्चों के आंकड़े शिक्षा विभाग के पास उपलब्ध नहीं हैं। एकल माताओं को जिन सामाजिक और आर्थिक समस्याओं का सामना करना पड़ता है, उनके कारण उनके बच्चों की शिक्षा में समस्याएं उत्पन्न होती हैं। बच्चों के लिए कुछ सुविधाएं और रियायतें देने के संबंध में बच्चों का सर्वेक्षण करने की मांग कुछ संगठनों ने स्कूल शिक्षा मंत्री दादा भुसे से की थी। उसके बाद सर्वे शुरू किया गया है। इससे एकल माताओं के बच्चों की सटीक संख्या उपलब्ध हो सकेगी।
इन्हें कहते हैं एकल माता
एकल माता ऐसी महिलाओं को कहा जाता है, जो पति के बिना बच्चों का पालन-पोषण करती हैं। उनमें तलाकशुदा, विधवा या अविवाहित स्त्रियां शामिल हैं। वे बच्चों के पालन-पोषण की सभी जिम्मेदारियां जैसे उन्हें खिलाना-पिलाना, देखभाल, शिक्षा और मार्गदर्शन करना जैसी जवाबदारियां अकेले उठाती हैं।
Created On :   29 Nov 2025 2:00 PM IST












