Pune City News: टैंकर माफियाओं के कारण महीने के लग रहे 2500 रु.

टैंकर माफियाओं के कारण महीने के लग रहे 2500 रु.
  • सरकारी तंत्र पर ऐसा नियंत्रण की नहीं डालने देते पाइप लाइन, कुछ टाउनशिप में खर्च की राशि ज्यादा
  • चुनाव आते ही दोबारा पाइप लाइन योजना का हुआ भूमिपूजन

भास्कर न्यूज, पुणे। वाघोली क्षेत्र में पानी की अपार समस्या है। यहां सरकार की तरफ से पानी की कोई सुविधा उपलब्ध नहीं है। पूरे क्षेत्र को निजी टैंकर संचालकों के भरोसे रहना पड़ता है। पानी खरीदने को लेकर खर्च की सीमा गर्मियों में और बढ़ जाती है। सामान्य दिनों में ही ढाई हजार रु. से ज्यादा का बजट हर परिवार को पानी खरीदने के नाम पर रखना पड़ता है जो गर्मियों में चार से पांच हजार रुपए तक पहुंच जाता है। पहले यह क्षेत्र ग्राम पंचायत में आता था लेकिन पिछले पांच सालों से इसे पुणे महापालिका (मनपा) ने अपने क्षेत्र में मिला लिया है। लोगों को खुशी थी कि मनपा के अधिकार क्षेत्र में आने से पानी की सुविधा मिलेगी लेकिन उसने तो अभी तक पाइप लाइन डालने का काम भी शुरू नहीं किया है। लोगों का कहना है टैंकर माफियाओं ने मनपा के जिम्मेदारों को नियंत्रण में ले रखा है जिससे वे क्षेत्र में पानी की लाइन डलने ही नहीं दे रहे हैं। यदि मनपा पानी देने लगेगा तो टैंकर माफियाओं को बड़ा नुकसान होगा।

मनपा में शामिल होने के बाद वाघोली के लोगों को लगा था कि हमें अब पानी की समस्या से नहीं जूझना पड़ेगा। टैंकर का गंदा और दूषित पानी इस्तेमाल नहीं करना पड़ेगा, लेकिन पांच साल होने के बाद भी लोगों को टैंकर पर ही निर्भर रहना पड़ रहा है। छोटी से छोटी सोसायटी में प्रतिदिन का 6 से 7 टैंकर लगते हैं। वहीं कई सोसायटी ऐसी भी है, जहां पर डेढ़ से दो हजार लोग रहते हैं। अब इतने लोगों के लिए जलापूर्ति कराने का मतलब है महीने में लाखों रुपये का पानी खरीदना। उसमें भी उन्हें ये पता नहीं रहता है कि पानी कहां से लाया गया है। कभी-कभी पानी में काई दिखती है तो कभी उसमें मिट्टी और पत्थर भी दिखाई देते हैं। एक निवासी ने नाम न बताने की शर्त पर कहा कि यहां पर टैंकर माफियाओं का राज चलता है। हमारी जमीन पर सोसायटी का निर्माण हुआ है तो हमारा ही टैंकर इस्तेमाल करना पड़ेगा। चाहे वो पानी कैसा भी हो कोई फर्क नहीं पड़ता है।

चुनाव आते ही दोबारा पाइप लाइन योजना का हुआ भूमिपूजन

2008-09 में ग्राम पंचायत की ओर से वाघेश्वर मंदिर के सामने बनाई गई पानी की टंकी का निर्माण कार्य पूरा हुआ था। इसका स्टोरेज 40 एमएलडी है। पुरानी कुछ सोसायटियों में पानी की पाइपलाइन डाली गई थी, लेकिन वो पानी भी पर्याप्त नहीं है। गर्मी के मौसम में तो इससे बिल्कुल भी पानी नहीं आता है। वर्तमान में चुनाव को देखते हुए वाघोली-लोहगांव भामा आसखेड़ योजना के तहत पाइप लाइन डालने के काम का भूमिपूजन हुआ है। आपको बता दे साल 2024 में भी इस योजना का भूमिपूजन हो चुका है। तब यह भूमिपूजन तत्कालीन क्षेत्रीय विधायक एड. अशोक पवार ने किया था। यह भूमिपूजन विधानसभा चुनाव से ठीक पहले हुआ था। तब 30 महीने में इस योजना को पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था लेकिन यह योजना कागजों से अब तक जमीन पर नहीं उतरी है और इसका एक मर्तबा फिर भूमिपूजन किया गया है।

हर माह करोड़ों रुपए का खेल

वाघोली क्षेत्र में 100 से ज्यादा टाउनशिप या कॉलोनियां हैं। सामान्य दिनों में यहां 700 से 800 रु. में टैंकर मिलता है लेकिन गर्मियों के दिनों में इसकी कीमत 1000 से 1200 रुपए हो जाती है। लोगों के मुताबिक यहां प्रतिदिन 20 करोड़ रुपए से ज्यादा मूल्य का पानी सप्लाय होता है। टैंकर भी किसी न किसी पार्टी से जुड़े नेता के हैं जिससे कोई यहां टैंकर से पानी सप्लाय का विरोध नहीं करता है। इस पूरे मामले की जांच होने पर कई चेहरे बेनकाब हो सकते हैं।

हम पिछ्ले कई सालों से टैंकर के पानी पर ही निर्भर हैं। सोसायटी की चार बिल्डिंग की देख-रेख हमारी कमेटी कर रही है। इन चार बिल्डिंगों में अगर देखें तो 500 से 600 लोग रहते हैं। मेंटेनेंस में से हमें 2.5 लाख रु. का सिर्फ महीने में पानी खरीदना पड़ता है। वर्षों से पाइपलाइन के इंतजार में हैं ताकि हमारी जेब पर जो बोझ है वो थोड़ा कम हो और इन पैसों का इस्तेमाल अन्य कामों के लिए कर सकें।

- सतनाम सिंग, अध्यक्ष न्याति एलान

हमारी सोसायटी में 12 बिल्डिंग हैं। अभी के समय में प्रतिदिन 30 टैंकर पानी आ रहा है। लगभग 5 लाख रु. का खर्च हम लोग टैंकर पर करते हैं। गर्मी के दिनों में तो इसकी संख्या और बढ़ जाती है। लगभग 45 टैंकर रोजाना आते हैं। गर्मी के समय में तो कभी-कभी ऐसा होता है कि टैंकर मिलना भी मुश्किल हो जाता है। ऐसे में हम तो यही उम्मीद कर रहे हैं जैसे पुणे के अन्य क्षेत्रों में मनपा जलापूर्ति कराती है, वैसे ही वाघोली में भी कराए।

- अभिषेक कुमार, सदस्य, विवेक विहार सोसायटी

Created On :   7 Jan 2026 2:41 PM IST

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