Satna News: जिला अस्पताल में एक दिन में 44 प्रसव

जिला अस्पताल में एक दिन में 44 प्रसव
इसमें 20 सिजेरियन सीमित संसाधनों में डिलीवरी कराने का दावा

डिजिटल डेस्क,सतना। शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय से संबद्ध जिला अस्पताल के स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग में मरीजों का दबाव बना हुआ है। विभागीय रिपोर्ट के अनुसार 9 अक्टूबर को यानि एक दिन में 54 महिलाएं भर्ती हुईं इनमें 52 प्रसूति और 2 स्त्री रोग से संबंधित मामले थे। रिपोर्ट के मुताबिक इस दौरान 44 प्रसव कराए गए। इनमें 24 सामान्य और 20 सिजेरियन प्रसव शामिल हैं। सभी 44 नवजात जीवित जन्मे। विभाग में प्रसव के साथ गंभीर और जटिल मामलों के उपचार की जिम्मेदारी भी रहती है।

डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल में ओवरलोड

गौरतलब है कि 400 बिस्तरों के जिला अस्पताल में क्षमता से अधिक मरीज भर्ती होते हैं। मेटरनिटी विंग के अलावा मेल-फीमेल मेडिकल वॉर्ड ओवरक्राउडेड रहता है। सर्वाधिक लोड मेटरनिटी विंग पर रहता है। मेडिकल कॉलेज की स्त्रीरोग विशेषज्ञ, सीनियर रेजीडेंट (एसआर), जिला अस्पताल के स्त्रीरोग विशेषज्ञ और नर्सिंग स्टाफ राउण्ड द क्लॉक ड्यूटी करते हैं। प्रसूति विभाग में सामान्य प्रसव के साथ सिजेरियन ऑपरेशन और आपातकालीन मामलों के प्रबंधन की जिम्मेदारी भी रहती है।

उपचार के साथ पढ़ाने की भी जिम्मेदारी

मेडिकल कॉलेज के फैकल्टी सदस्य अस्पताल में मरीजों का उपचार करने के साथ मेडिकल विद्यार्थियों को व्यावहारिक प्रशिक्षण भी देते हैं। ऐसे में अस्पताल की सेवाओं और चिकित्सा शिक्षा, दोनों की जिम्मेदारी उनके कार्यभार का हिस्सा है। गर्भवती महिलाओं की स्थिति के अनुसार समय पर चिकित्सकीय निर्णय लेना और प्रसव के बाद मां व नवजात की निगरानी करना उपचार का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

5 माह में 6 हजार से ज्यादा प्रसव

जिला अस्पताल के प्रसव के आंकड़ों की बात करें तो वर्ष 2926-27 में अप्रैल से सितंबर माह के बीच कुल 6 हजार 153 गर्भवतियों के प्रसव कराए गए। अपै्रल माह में 884, मई में 858, जून में 824, जुलाई में 1118, अगस्त में 1238 और सितंबर में 1231 प्रसव कराए गए। इनमें से 2170 प्रसव सीजर से कराए गए। सीजर से प्रसव का प्रतिशत 35 फीसदी के करीब है।

इनका कहना है

सामान्य प्रसव और सिजेरियन के प्रबंधन के लिए प्रशिक्षित मानव संसाधन तथा आवश्यक सुविधाएं विशेष महत्व रखती हैं। पर्याप्त संसाधन उपलब्ध होने से मरीजों की सुरक्षा और उपचार की गुणवत्ता को भी बेहतर बनाया जा सकता है।

डॉ. धीरेन्द्र मिश्रा, पीआरओ, शासकीय मेडिकल कॉलेज

सभी विशेषज्ञों और नर्सिंग-पैरामेडिकल स्टाफ के समन्वय से अस्पताल की गतिविधियां सुचारू रूप से संचालित होती हैं। बड़ी खुशी की बात है कि सीजेरियन के अनुपात में सामान्य प्रसव का प्रतिशत ज्यादा है।

डॉ. मंजू सिंह, विभागाध्यक्ष, प्रसूति विभाग, जिला अस्पताल

Created On :   10 Oct 2026 9:22 PM IST

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