विरल देसाई के ‘ट्री गणेशा’ में 6,800 से अधिक विद्यार्थी बने ‘पर्यावरण सेनानी’

सूरत (गुजरात) [भारत], 7 अक्टूबर: पर्यावरणविद् विरल देसाई द्वारा ‘सत्याग्रह अगेंस्ट पॉल्यूशन एंड क्लाइमेट चेंज’ अभियान के अंतर्गत आयोजित ‘ट्री गणेशा 2026’ में इस वर्ष सूरत के विभिन्न स्कूलों और कॉलेजों के 6,800 से अधिक विद्यार्थियों ने भाग लिया। इस दौरान विद्यार्थियों के साथ जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण, जैव विविधता, वृक्षारोपण और पर्यावरण संरक्षण जैसे विषयों पर सीधे संवाद किए गए तथा उन्हें ‘पर्यावरण सेनानी’ के रूप में पर्यावरण के प्रति सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित किया गया।
लगातार आठवें वर्ष आयोजित ‘ट्री गणेशा’ का उद्देश्य गणेशोत्सव जैसे व्यापक जनभागीदारी वाले सांस्कृतिक पर्व को पर्यावरण जागरूकता से जोड़ना है। इसके माध्यम से विशेष रूप से युवा पीढ़ी को पर्यावरणीय चुनौतियों को समझने और जागरूकता को व्यक्तिगत एवं सामूहिक कार्रवाई में बदलने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।
इस वर्ष ‘ट्री गणेशा’ की थीम ‘दस साल बेमिसाल’ रही, जिसके माध्यम से विरल देसाई और हार्ट्स एट वर्क फाउंडेशन द्वारा पिछले एक दशक में किए गए विभिन्न पर्यावरणीय कार्यों की यात्रा को प्रदर्शित किया गया। आयोजन स्थल पर लगाए गए विशेष डिस्प्ले में बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण, मियावाकी अर्बन फॉरेस्ट के निर्माण, जैव विविधता संरक्षण, प्रदूषण के प्रति जागरूकता तथा विद्यार्थियों और युवाओं के साथ लगातार किए गए पर्यावरण संवाद को प्रस्तुत किया गया।
विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए विरल देसाई ने कहा, “गणेशोत्सव हमें आस्था को प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारी से जोड़ने का एक अनूठा अवसर देता है। ‘दस साल बेमिसाल’ हमारे दस वर्षों के निरंतर पर्यावरणीय प्रयासों का प्रतिनिधित्व करता है, लेकिन इससे भी महत्वपूर्ण यह है कि हम इस यात्रा में अगली पीढ़ी को सहभागी बनाएं।”
उन्होंने आगे कहा, “हमारा उद्देश्य केवल विद्यार्थियों को जलवायु परिवर्तन और पर्यावरणीय चुनौतियों के प्रति जागरूक करना नहीं है। हम चाहते हैं कि वे ‘पर्यावरण सेनानी’ बनें और अपनी जागरूकता को वास्तविक पर्यावरणीय कार्रवाई में बदलें।”
इस वर्ष आयोजन का प्रमुख केंद्र विद्यार्थियों के साथ सीधा संवाद रहा। विरल देसाई ने उनसे जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभावों, जैव विविधता के महत्व, विभिन्न प्रकार के प्रदूषण, वृक्षों और शहरी हरित क्षेत्रों की आवश्यकता तथा पर्यावरण संरक्षण में व्यक्तिगत जिम्मेदारी जैसे विषयों पर चर्चा की।
इन संवादों के दौरान पर्यावरण के प्रति विशेष उत्साह और प्रतिबद्धता दिखाने वाले विद्यार्थियों को ‘पर्यावरण सेनानी’ कैप देकर सम्मानित भी किया गया। इसके पीछे उद्देश्य युवाओं में यह भावना विकसित करना था कि पर्यावरण संरक्षण केवल चर्चा या जागरूकता तक सीमित न रहे, बल्कि उनके दैनिक जीवन और व्यवहार का हिस्सा बने।
वर्षों से स्कूल और कॉलेज ‘ट्री गणेशा’ का महत्वपूर्ण हिस्सा रहे हैं। गणेशोत्सव के दौरान बड़ी संख्या में विद्यार्थियों को पर्यावरणीय चर्चाओं और गतिविधियों से जोड़ते हुए इस पहल ने आस्था, युवा सहभागिता और पर्यावरणीय जिम्मेदारी को एक साझा मंच पर लाने का प्रयास किया है।
‘ट्री गणेशा’ को सूरत पुलिस, गुजरात वन विभाग और गुजरात प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (GPCB) का सहयोग प्राप्त है। शैक्षणिक संस्थानों और सरकारी विभागों के सहयोग से इस वर्ष 6,800 से अधिक विद्यार्थियों को इस अभियान से जोड़ा गया।
7.5 लाख वृक्ष, करीब 13 मियावाकी अर्बन फॉरेस्ट
विरल देसाई की पर्यावरणीय यात्रा ‘ट्री गणेशा’ तक सीमित नहीं है। अब तक उनके नेतृत्व में करीब 7.5 लाख वृक्ष लगाए गए हैं और लगभग 13 मियावाकी अर्बन फॉरेस्ट विकसित किए गए हैं।
उनके ‘सत्याग्रह अगेंस्ट पॉल्यूशन एंड क्लाइमेट चेंज’ आंदोलन और इससे जुड़ी विभिन्न पर्यावरणीय पहलों के माध्यम से अब तक 7 लाख से अधिक विद्यार्थियों के साथ पर्यावरण, प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन जैसे विषयों पर प्रत्यक्ष संवाद किया जा चुका है।
विरल देसाई पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन से जुड़े विषयों पर राष्ट्रीय पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से लेखन भी करते हैं। वे ‘द आर्किटेक्ट ऑफ अमृतपथ’ पुस्तक के लेखक हैं, जिसमें भारत में पर्यावरण और सतत विकास से जुड़ी विभिन्न पहलों को प्रस्तुत किया गया है।
इस वर्ष 6,800 से अधिक विद्यार्थियों की भागीदारी के साथ ‘ट्री गणेशा 2026’ ने युवा पीढ़ी को पर्यावरण के प्रति केवल जागरूक करने के बजाय उन्हें ‘पर्यावरण सेनानी’ के रूप में जिम्मेदारी और कार्रवाई से जोड़ने के अपने उद्देश्य को आगे बढ़ाया।
Created On :   7 Oct 2026 6:32 PM IST











