दैनिक भास्कर हिंदी: बचपन में बिछड़ गए थे अमिताभ, पढ़िए बिग बी के बचपन के ऐसे ही रोचक किस्से

October 10th, 2018

डिजिटल डेस्क, मुंबई। सदी के महानायक अमिताभ बच्चन इस बरस 11 अक्टूबर को 76 साल के होने जा रहे हैं। हिंदी सिनेमा में 4 दशक बिता चुके 'एंग्री यंग मैन', शहंशाह और बिग बी के नाम से बी जानें जाते हैं। वो उन सभी के लिए एक उदाहरण हैं जो खुद को रिटायर मानके काम करना बंद कर देते हैं। इस उम्र में भी वो लगातार काम कर रहे हैं और पूरी उर्जा से भरे हुए नजर आते हैं। वो हिन्दी सिनेमा के सबसे बड़े और सबसे प्रभावशाली अभिनेता माने जाते हैं। सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के तौर पर उन्हें 3 बार नेशनल अवॉर्ड और 14 बार फिल्मफेयर अवार्ड भी मिल चुका है। वहीं भारत सरकार ने उन्हें पद्मश्री और पद्मभूषण सम्मान से भी नवाजा गया है।

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बचपन के बारे में वो बातें जो कम ही लोग जानते हैं
अमिताभ बच्चन का जन्म उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद जिले में हुआ था। उनके पिता का नाम हरिवंश राय बच्चन था। उनके पिता हिंदी जगत के मशहूर कवि रहे हैं। उनकी मां का नाम तेजी बच्चन था। उनके एक छोटे भाई भी हैं जिनका नाम अजिताभ है। अमिताभ का नाम पहले इंकलाब रखा गया था लेकिन उनके पिता के साथी रहे कवि सुमित्रानंदन पंत के कहने पर उनका नाम अमिताभ रखा गया।

अमिताभ के पिता श्रीवास्वत और मां पंजाबी थीं। उत्तरप्रदेश के बस्ती जिले का पुराना नाम श्रावस्ती था। श्रावस्ती इसलिए, क्योंकि श्राव नामक राजा ने इसे बसाया था। श्रावस्ती छोड़ कर जो कायस्थ देश में अन्यत्र जा बसे, वो श्रीवास्तव कहलाए, जैसे मथुरावाले माथुर। 

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कवि हरिवंशराय बच्चन ने अगर अपना उपनाम 'बच्चन' नहीं चुना होता, तो वो हरिवंशराय श्रीवास्तव कहलाते। वो पिछली सात पीढ़ियों से इलाहाबाद के वासी थे, जहां हिन्दी सिनेमा के सबसे ज्यादा चमकीले सितारे अमिताभ बच्चन का 11 अक्टूबर 1942 की शाम को जन्म हुआ। 

हिन्दी काव्य में हालावाद के प्रवर्तक हरिवंशराय और उनका परिवार अत्यंत धार्मिक प्रवृत्ति का है और उनके घर में रामचरित मानस तथा श्रीमद् भगवत् गीता का नियमित पाठ होता है। संस्कारवश स्वयं अमिताभ भी गीता-रामायण का नियमित पाठ करते हैं। अमिताभ की माता श्रीमती तेजी बच्चन पंजाबी थी बावजूद इसके वो हनुमानजी को बहुत मानती थीं। कवि बच्चन से तेजी सूरी का विवाह जनवरी 1942 में ही हुआ था और उसी साल उन्हें अमिताभ का जन्म हुआ। 

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तेजी से कवि बच्चन का दूसरा विवाह हुआ था। इससे पहले उनकी पत्नी श्यामा पूरे दस साल तक बीमार रहने के बाद चल बसीं थीं। तेजी से बच्चनजी की मुलाकात बरेली में एक मित्र ज्ञानप्रकाश जौहरी के घर हुई, जिनकी पत्नी लाहौर के फतेहचंद कॉलेज में प्राचार्य थीं और तेजी उसी कॉलेज में मनोविज्ञान पढ़ाती थीं। तेजी बच्चन की कविताओं की प्रशंसक थीं, इसलिए दोनों के बीच प्रेम और विवाह होने में देर नहीं लगी। 

24 जनवरी 1942 को इलाहाबाद के जिला मजिस्ट्रेट की अदालत में उन्होंने अपना विवाह रजिस्टर कराया। उस समय के रूढ़िवादी समाज में ये एक विवादास्पद विवाह था। आजादी के साल 1947 को अमिताभ के भाई अजिताभ का जन्म हुआ। 

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बचपन में बिछड़ गए थे अमिताभ

5 साल की उम्र में अमिताभ लाहौर रेलवे स्टेशन पर अपने माता-पिता से बिछड़कर ओवरब्रिज पर पहुंच गए थे। उस वक्त अमिताभ अपने नाना के घर मीरपुर जा रहे थे। बच्चन दंपति ने पहली बार अपने बेटे को सीख दी थी कि माता-पिता को बताए बगैर बच्चों को कहीं नहीं जाना चाहिए। 

माता पिता से बिछड़ने की वजह से अमिताभ का हाथ भी टूट गया था। मीरपुर में अपने नाना खजान सिंह के लंबे केश देखकर अमित को पहली बार आश्चर्य हुआ था कि ये औरतों जैसे लंबे बाल क्यों रखते हैं। लेकिन तेजी ने अपने बच्चों को सिख बनाए रखने की कोई चेष्टा नहीं की। श्रीवास्तव परंपरा के अनुसार अमिताभ का मुंडन संस्कार विंध्य पर्वत पर देवी की प्रतिमा के आगे बकरे की बलि के साथ होना चाहिए था, मगर बच्चनजी ने ऐसा कुछ नहीं किया। साधारण रूप से मुंडन किया। 

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सांड ने मारी थी टक्कर

जिस दिन अमिताभ का मुंडन था उसी दिन एक सांड उनके दरवाजे पर अमित को पटखनी देकर चला गया। अमित रोया नहीं, जबकि उसके सिर में गहरा जख्म हुआ था और कुछ टांके भी लगे थे। वो इतना जरूर कहते हैं कि ये भिड़ंत उनकी उस सहन शक्ति का 'ट्रायल रन' थी, जिसे उन्होंने अपनी आगे की जिंदगी में विकसित किया।

जब सुमित्रा नंदन पंत से पूछ लिया 'आप कौन' 

वर्ष 1947 में अजिताभ के जन्म के समय घर पर आए सुमित्रानंदन पंत से अमिताभ ने पूछा था, 'आप कौन हैं', तब युवा कवि पंत ने उत्तर दिया था, 'मैं ही लक्ष्मण हूँ और शत्रुघ्न भी।' साथ ही तेजी से कहा था, 'तुम्हारा बालक तो बड़ा सुंदर है।' तब हरिवंशराय बोले थे, 'इसके सीधे हाथ में ज्यादा ताकत है।' पंतजी ने कहा था, 'लेखनी सीधे हाथ में ही रखनी चाहिए। सरस्वती का आशीर्वाद दाएं हाथ को प्राप्त है।' जाहिर है, तब इस तरह की बातें अमिताभ को समझ में नहीं आती थीं। उन्हीं दिनों देश आजाद हुआ और बच्चन परिवार अडेल्फी के मकान में रहने लगा था। 

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पिता से मांग बैठे थे बंदूक 

हरिवंशराय 12 अप्रैल 1952 को बंबई से जा रहे थे, तभी अमिताभ ने उनसे कहा था कि लंदन से मेरे लिए एक बंदूक लाना। बंदूक का नाम सुनकर कवि बच्चन दचका खा गए थे। उन्होंने पूछा, 'बंदूक क्यों?' अमिताभ ने कहा था, 'पक्षी मारने के लिए डैड। मेरी दोस्त शशि के पास एक बंदूक है। वो कभी-कभी मुझे भी चलाने को देती है।' तब बच्चनजी ने मुस्कुराते हुए कहा था, 'उसे बंदूक नहीं मुन्ना, एयरगन कहते हैं। उसमें कारतूस की जगह छर्रे लगते हैं, जिसका आघात पक्षी सह नहीं पाते।' भूल सुधार के बाद अमित ने फिर पूछा था, 'लाओगेना।' बच्चनजी ने कहा था, 'मगर तू पक्षी क्यों मारेगा, उन्होंने तेरा क्या बिगाड़ा है?' अमित ने कहा, 'नहीं मारूंगा, मैं उन्हें पालूंगा।' बच्चनजी ने कहा, 'तू उन्हें पालेगा भी क्यों, वे तो आकाश के राजा हैं। उनको पिंजरे में बंद करना भी अच्छी बात नहीं।  

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लंदन से घर लौटे पिता ने अमित को एयरगन और अजिताभ को चाबी से चलने वाली पांच डिब्बों की रेलगाड़ी दी। अजिताभ को पत्रों को संभालकर रखने के लिए ये आकस्मिक पुरस्कार दिया गया।