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OnePlus 6T का टीजर जारी, 17 अक्टूबर को हो सकता है लॉन्च

September 20th, 2018 13:56 IST
OnePlus 6T का टीजर जारी, 17 अक्टूबर को हो सकता है लॉन्च

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। चीनी कंपनी OnePlus मौजूदा स्मार्टफोन फीचर को ध्यान में रखते हुए जल्द अपना नया फोन OnePlus 6T लॉन्च करने जा रही है। हाल ही में कंपनी ने Amazon India की वेबसाइट पर OnePlus 6T का डेडिकेटेड टीजर जारी किया है। इसमें OnePlus 6T के साथ Coming Soon लिखा नजर आ रहा है। यह फोन एक्सक्लूसिव तौर पर सिर्फ Amazon पर मिलेगा। वहीं कंपनी ने एक टीवी कमर्शियल भी जारी किया है। जिसमें ब्रांड एंबेसडर अमिताभ बच्चन OnePlus के साथ दिखाई दे रहे हैं, वीडियो में वे फोन को एक अलग अंदाज में अनलॉक करते दिखाई दे रहे हैं। इसे देखते हुए कहा जा सकता है कि इस फोन में इन-डिस्प्ले फिंगरप्रिंट दिया जाएगा। हालांकि CNET को दिए इंटरव्यू में कंपनी द्वारा इस बात की पुष्टि पहले ही की जा चुकी है।

बता दें कि इस प्रीमियम फोन की कुछ स्पेसिफिकेशन पहले लीक हुई हैं, जिसके अनुसार फोन में लेटेस्ट वाटरड्रॉप नॉच डिस्प्ले दिया जा सकता है। खबरों की मानें तो इस फोन की कीमत करीब 39,500 रुपए होगी, जिसे 17 अक्टूबर सुबह 11 बजे लॉन्च किया जाएगा। फिल्हाल इस फोन की लॉन्च डेट या कीमत को लेकर कंपनी ने कोई जानकारी नहीं दी है। कितना खास होगा OnePlus 6T, आइए जानते हैं:-

डिस्प्ले
इस फोन में 6.28 इंच की FHD आॅप्टिक AMOLED डिस्प्ले दी जा सकती है। जो 1080 x 2280 पिक्सल का रेजोल्यूशन देगी। इसमें लेटेस्ट वाटरड्रॉप नॉच डिस्प्ले का उपयोग किया जा सकता है, जिसमें पतले बेजल दिए जाएंगे। डिस्प्ले में फिंगरप्रिंट सेंसर दिया जाएगा, जो सबसे पहले Vivo X21 में देखने को मिला था।

कैमरा
कैमरा की बात करें तो फोन में ट्रिपल सेटअप वाला रियर कैमरा दिया जा सकता है। जो LED फ्लैश लाइट के साथ आएगा। इसके अलावा फोन में 24 मेगापिक्सल का फ्रंट कैमरा दिया जा सकता है।

रैम/ मेमोरी
इस फोन में 8 GB रैम के साथ क्वालकॉम स्नैपड्रैगन 845 चिपसेट प्रोसेसर दिया जा सकता है। OnePlus 6T में नया प्लेटफार्म Android 9 Pie मिल सकता है। फोन में स्टोरेज क्षमता 256 GB दी जाएगी।

बैटरी
फोन में लंबे टाॅकटाइम के लिए 3500 mAh की बिग बैटरी दी जा सकती हैै, जो यह फास्ट चार्ज टेक्नॉलजी को सपोर्ट करेगी।

कनेक्टिविटी
इस फोन में 4G LTE, वाई-फाई 802.11, डुअल बैंड, हाॅटस्पाॅट, ब्लूटूथ 5.0, यूएसबी टाइप-सी, एनएफसी, 3.5 एमएम आॅडियो जैक दिया जाएगा। 

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kuljinder singh September 12th, 2018 11:48 IST

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क्या है ड्रोन ? देश की सुरक्षा के लिए कितना घातक हो सकता है, जानें सबकुछ

क्या है ड्रोन ? देश की सुरक्षा के लिए कितना घातक हो सकता है, जानें सबकुछ

डिजिटल डेस्क, श्रीनगरजम्मू कश्मीर की सीमा के आसपास ड्रोन की हलचलें लगातार तेज होती जा रही हैं। इसके बाद भारत ने भी ये मुद्दा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाया है कि ड्रोन की इस तरह की गतिविधियां न सिर्फ भारत बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सुरक्षा के दृष्टिकोण से घातक साबित हो सकती हैं। इस हमले के बाद से भारत में ड्रोन के इस्तेमाल को लेकर बहस छिड़ गई है। इस रिपोर्ट में जानिए आखिर ड्रोन है क्या और यह कैसे ऑपरेट होते हैं? इसके इस्तेमाल और इससे क्या नुकसान हो सकता है और देश में ड्रोन्स को उड़ाने को लेकर सरकार की क्या गाइडलाइन्स हैं।

ड्रोन क्या होता है?
ड्रोन्स को UAV यानी Unmanned aerial vehicles या RPAS यानी Remotely Piloted Aerial Systems भी कहा जाता है। आम बोल चाल वाली भाषा में इसे मिनी हैलिकॉप्टर भी कहते हैं। अक्सर शादी के दौरान फोटोग्राफी के लिए आपने ड्रोन का इस्तेमाल होते हुए देखा होगा। यह एक ऐसा यंत्र है, जिसमें एचडी कैमरे, ऑनबोर्ड सेंसर और जीपीएस लगा होता है। इसे नियंत्रित करने के लिए एक सॉफ्टवेयर की आवश्यकता होती है। इसके चारों और 4 रोटर्स लगे होते हैं, जिनकी मदद से यह आसमान में ऊंचा उड़ने में सक्षम होता है। एक ड्रोन का वजन 250 ग्राम से लेकर 150 किलोग्राम से भी ज्यादा हो सकता है।

ड्रोन को उड़ाने के लिए सॉफ्टवेयर, जीपीएस और रिमोट की आवश्यकता होती है। रिमोट के जरिए ही ड्रोन को ऑपरेट और कंट्रोल कर सकते हैं। ड्रोन पर लगे रोटर्स की गति को रिमोट की जॉयस्टिक के जरिए कंट्रोल किया जाता है। वहीं, जीपीएस दिशाएं बताता हैं, जीपीएस दुर्घटना होने से पहले ही ऑपरेटर को चेतावनी भेज देता है। 

ड्रोन हमले किस तरह से हो सकते हैं?
ड्रोन का इस्तेमाल कई देशों की सेनाएं कर रही हैं, क्योंकि ये साइज में छोटे होते हैं इसलिए रडार की पकड़ में आसानी से नहीं आ पाते हैं, साथ ही दुर्गम इलाकों में भी गुपचुप घुसपैठ कर सकते हैं। यही कारण है कि सेना में इनका इस्तेमाल बढ़ने लगा है।ड्रोन हमले दो प्रकार से संभव हैं। एक तरीका ये है कि ड्रोन में हथियार या विस्फोटक लगा दिए जाते हैं और ड्रोन इन हथियारों या विस्फोटक को लक्ष्य पर ड्रॉप कर देता है। ड्रोन से हमले का दूसरा तरीका है ड्रोन को खुद ही एक विस्फोटक में बदल दिया जाए। 

कितने घातक हो सकते हैं ड्रोन हमले?
ये ड्रोन के प्रकार और पेलोड पर निर्भर है। पेलोड मतलब ड्रोन कितना वजन अपने साथ लेकर उड़ सकता है। ड्रोन की पेलोड क्षमता जितनी ज्यादा होगी वो अपने साथ उतनी ज्यादा मात्रा में विस्फोटक सामग्री लेकर उड़ सकता है। अमेरिका के MQ-9 रीपर ड्रोन अपने साथ 1700 किलो तक वजन ले जाने में सक्षम हैं।

ड्रोन से अबतक के बड़े हमले
2020 में अमेरिका ने ईरानी मेजर जनरल सुलेमानी को मार गिराया था। इससे पहले 2019 में यमन के हूती विद्रोहियों ने साऊदी अरब की अरामको ऑयल कंपनी पर ड्रोन हमला किया था। पाकिस्तान के वजीरिस्तान में 2009 के दौरान एक ड्रोन हमले में 60 लोग मारे गए थे।

देश में ड्रोन्स के इस्तेमाल को लेकर गाइडलाइन्स 
देश में नागरिक उड्डयन मंत्रालय(Ministry of Civil Aviation) ने ड्रोन उड़ाने पर कई तरह के प्रतिबंध लगा रखे हैं। ड्रोन के वजन और साइज के अनुसार इन प्रतिबंधों को कई वर्ग में बांटा गया है।

1.नेनो ड्रोन्स- इसको उड़ाने के लिए लाइसेंस की आवश्यकता नहीं पड़ती।

2.माइक्रो ड्रोन्स- इसको उड़ाने के लिए UAS Operator Permit-I से अनुमति लेनी पड़ती है और ड्रोन पायलट को SOP(Standard operating procedure) का पालन करना होता है। 

इनसे बड़े ड्रोन उड़ाने के लिए डीजीसीए से परमिट(लाइसेंस ) की आवश्यकता होती है। अगर आप किसी प्रतिबंधित जगह पर ड्रोन उड़ाना चाहते हैं तो इसके लिए भी आपको डीजीसीए से अनुमति लेनी पड़ेगी। बिना अनुमति के ड्रोन उड़ाना गैरकानूनी है और इसके लिए ड्रोन ऑपरेटर पर भारी जुर्माने का भी प्रावधान है।

ड्रोन उड़ाने के लिए प्रतिबंधित जगह

  • मिलिट्री एरिया के आसपास या रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण इलाका।
  • इंटरनेशनल एयरपोर्ट के 5 किलोमीटर और नेशनल एयरपोर्ट के 3 किलोमीटर का दायरा।
  • इंटरनेशनल बॉर्डर के 25 किलोमीटर का दायरा ।
  • इसके अलावा ड्रोन की कैटेगरी को मद्देनजर रखते हुए इन्हें कितनी ऊंचाई तक उड़ाया जा सकता है वो भी निर्धारित है।

ड्रोन उड़ाने के लिए जरूरी हैं लाइसेंस
नैनो ड्रोन्स को छोडकर किसी भी तरह के ड्रोन्स को उड़ाने के लिए लाइसेंस या परमिट की जरूरत पड़ती है।ड्रोन उड़ाने के लिए लाइसेंस दो कैटेगरी के अंतर्गत दिए जाते हैं, जिसमें पहला है स्टूडेंट रिमोट पायलट लाइसेंस और दूसरा है रिमोट पायलट लाइसेंस।इन दोनों लाइसेंस को प्राप्त करने के लिए ड्रोन ऑपरेटर की न्यूनतम उम्र 18 साल और अधिकतम 65 साल होनी चाहिए। लाइसेंस के लिए ऑपरेटर कम से कम 10वीं पास या 10वीं क्लास के बराबर उसके पास किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड से डिग्री होना अति आवश्यक हैं।आवेदन करने वाले व्यक्ति को डीजीसीए स्पेसिफाइड मेडिकल एग्जामिनेशन भी पास करना जरूरी है। लाइसेंस के लिए बैकग्राउंड भी चेक होता है।

जुर्माने का प्रावधान

  • बिना लाइसेंस उड़ाने पर 25000 रुपए का जुर्माना।
  • नो-ऑपरेशन जोन यानी प्रतिबंधित क्षेत्र में उड़ान भरने पर 50000 रुपए का जुर्माना।
  • ड्रोन का थर्ड पार्टी बीमा ना होने पर 10000 रुपए का जुर्माना लग सकता है।