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Lifestyle/Health: जानें आपके बच्चों के लिए कितनी ज्यादा जरुरी है सेक्स एजुकेशन ?

Lifestyle/Health: जानें आपके बच्चों के लिए कितनी ज्यादा जरुरी है सेक्स एजुकेशन ?

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। भारतीय समाज में आज भी सेक्स (Sex) को लेकर खुलकर बात नहीं की जाती है। परिवार में न बच्चे अपने माता-पिता से इस विषय पर बात करते हैं न ही माता-पिता बच्चों से चर्चा करते हैं। यही वजह होती है कि बच्चों सेक्स एजुकेशन (sex education) के अभाव में गुमराह हो जाते हैं। अगर बच्चों को उनकी उम्र के हिसाब से सेक्स का जरुरी ज्ञान दिया जाए तो न केवल वे खुद को सुरक्षित कर पाएंगे। बल्कि गुमराह होने से भी बच जाएंगे। आइये जानते है कि बच्चों के लिए क्यों जरुरी है सेक्स एजुकेशन...

शारीरिक बदलाव
समय के अनुरुप पर्यावरण और खान-पान में हुए बदलाव की वजह से आजकल कम उम्र में ही बच्चों के भीतर शारीरिक और हार्मोनल बदलाव देखे जा सकते हैं। बच्चियों में पहली बार पीरियड्स आने पर गलत धारणा पैदा हो जाती है। वे इसे एक बीमारी के तौर पर दिखती हैं और खुद को बीमार महसूस करने लगती हैं। ऐसे में उनसे बातचीत करना चाहिए। उन्हें बताना चाहिए कि ये स्वाभाविक प्रक्रिया है। ये उम्र के साथ होने वाला बदलाव है। जो किसी भी प्रकार से हानिकारक नहीं है। बच्चों को अभिभावकों और स्कूलों शिक्षाकों द्वारा हार्मोनल बदलाव से लेकर गर्भावस्था और मासिक धर्म से संबंधित शिक्षाएं दी जाना आवश्यक है। 

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खुद की सुरक्षा
सेक्स एजुकेशन की सहायता से किशोर और किशोरियां किसी भी तरह के यौन रोगों से खुद को बचाकर अपने शरीर को स्वस्थ रख सकते हैं। कई बार ऐसा देखा जाता है कि बच्चों को यौन शिक्षा न मिल पाने की वजह से कुछ लोग उन्हें भ्रमित करने का काम करते हैं और उनका फायदा उठा लेते हैं। एक सर्वे के मुताबिक यौन शिक्षा के अभाव में ज्यादातर किशोरियां कम उम्र में ही गर्भवती हो जाती है। अगर बच्चों को उम्र के हिसाब से समय पर यौन शिक्षा दी जाती है। तो वे खुद की सुरक्षा आसानी से कर पाएंगे। बच्चों को इस बात की समझ होगी कि उनके साथ जो कुछ भी हो रहा है वह सही है या गलत। वहीं एक सर्वे में ये बात सामने आई थी कि जिन बच्चों को अध्यापकों या अभिभावकों के जरिए सेक्स एजुकेशन प्रदान की गई है वे अपेक्षाकृत अधिक उम्र में जाकर शारीरिक संबंध स्थापित करते हैं और वो भी पूर्ण रूप से सुरक्षित।

विश्व स्वास्थ्य संगठन का निर्देश
बच्चों के स्वास्थ और शिक्षा को लेकर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्देश जारी किया गया कि 12 वर्ष और उससे अधिक उम्र वाले बच्चों को स्कूल में सेक्स एजुकेशन दी जानी शुरू कर देनी चाहिए, ताकि किशोरावस्था में गर्भधारण और यौन संक्रमण से फैलने वाली बीमारियों पर लगाम कसी जा सके। बता दें कि एशिया के बहुत कम देशों में बच्चों को स्कूलों में सेक्स एजुकेशन दी जाती है। 

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बच्चों से खुलकर बातचीत करें
सेक्स एजुकेशन को लेकर माता-पिता को बच्चों से खुलकर बातचीत करना चाहिए। अगर आप अपने बच्चों से इस विषय पर खुलकर बात नहीं कर पाते हैं। तो इसका नुकसान आपको और आपके बच्चों दोनों को हो सकता है। आपको डॉक्टर की सलाह के साथ-साथ खुद ये तय करना है कि बच्चों को किस उम्र में सेक्स का क्या ज्ञान देना जरुरी है। 

यौन अपराधों से बचाती है सेक्स एजुकेशन 
यौन शिक्षा के जानकारों का कहना है कि बच्चों को समय पर सेक्स से जुड़े जरुरी पहलू समझा देना चाहिए। इससे वे किसी भी प्रकार के बहकावे में नहीं आते हैं। न ही कभी इंटरनेट पर मौजूद अशलील सामग्री उन्हें भ्रमित कर पाती है। इसके साथ ही दोस्तों के दबाव में आकर वे कोई गलत कदम उठाते हैं। जानकारों का कहना है कि वे बच्चे जिन्हें स्कूल में ही सेक्स से जुड़े विभिन्न पहलू समझा दिए जाते हैं वह किसी भी प्रकार यौन अपराध में नहीं फंसते हैं। 

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अश्लील साहित्य पोर्न फिल्म
बच्चों अश्लील साहित्य पढ़ने या पोर्न फिल्म देखने से होने वाले मानसिक व शारीरिक नुकसान से जुड़ी जानकारी देना चाहिए। ताकि वे उम्र के हिसाब से इन गलत चीजों से दूर रहें। ऐसा बहुत बार देखा गया है कि बच्चों पोर्न वीडियो देखने के बाद उसे प्रेक्टिकल तौर पर करने की कोशिश करते हैं। ऐसा सेक्स एजुकेशन के अभाव में ही होता है। 

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