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कोरोनावायरस व एलएसी पर तनाव से लद्दाख के पर्यटन पर पड़ा असर (लेह से स्पेशल ग्राउंड रिपोर्ट)

June 19th, 2020 20:01 IST
 कोरोनावायरस व एलएसी पर तनाव से लद्दाख के पर्यटन पर पड़ा असर (लेह से स्पेशल ग्राउंड रिपोर्ट)

हाईलाइट

  • कोरोनावायरस व एलएसी पर तनाव से लद्दाख के पर्यटन पर पड़ा असर (लेह से स्पेशल ग्राउंड रिपोर्ट)

लेह, 19 जून (आईएएनएस)। कोरोनावायरस महामारी फैलने के बाद लद्दाख में जन-जीवन ठहर सा गया था। और, अब इसके साथ इलाके में भारतीय व चीनी सेना के बीच व्याप्त तनाव ने लद्दाख के पर्यटन की चूलें हिला कर रख दी हैं।

मार्च में राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन लागू होने से पहले लेह के मुख्य पर्यटन केंद्रों पर विदेशी और घरेलू पर्यटकों की जमावड़ा देखने को मिल रहा था। पर्यटक चहमकदमी करते हुए खरीदारी करते हुए देखे जा रहे थे, मगर अब पीक टूरिस्ट सीजन में यहां का बाजार सूना पड़ा हुआ है। यहां की दुकानों पर कोई व्यवसाय नहीं हो रहा और खरीदारी के लिए कोई ग्राहक नहीं है। यह जगह अब सुनसान नजर आ रही है।

हिमालय एडवेंचर स्टोर चलाने वाले दोरजी का कहना है कि कारोबार में 90 फीसदी की गिरावट आई है।

उन्होंने कहा, मुख्य कारण कोरोनावायरस है, लेकिन वास्तविक नियंत्रण रेखा पर पनपे हालात ने भी प्रभाव डालना शुरू कर दिया है।

उन्होंने बताया कि हर साल भारतीय क्षेत्र में चीनी घुसपैठ की कुछ घटनाएं होती हैं, लेकिन इस साल यह बहुत बढ़ गई है।

पर्यटन लद्दाख की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। लेह में ज्यादातर लोग आजीविका के लिए पर्यटन पर निर्भर हैं।

लद्दाख स्वायत्त पहाड़ी देव परिषद के उपाध्यक्ष त्सेरिंग सैंदुप ने कहा कि पिछले साल 2.8 लाख पर्यटक लद्दाख आए थे, लेकिन इस साल कोरोनावायरस के कारण लॉकडाउन होने से पहले ही कुछ हजार पर्यटकों ने ही यहां का दौरा किया।

उन्होंने कहा, पर्यटन इस साल शून्य पर आ गया है।

इसका असर होटल और ट्रैवल एजेंसियों पर भी दिख रहा है। कुछ होटल बंद हैं तो कुछ ने परिचालन कम कर दिया है। जो होटल खुले हैं, वे भी ग्राहकों की राह देख रहे हैं।

एक होटल के मालिक ने कहा, यह सबसे मुश्किल समय में से एक है, जिसका सामना फिलहाल हम कर रहे हैं। इससे पहले लद्दाख में पर्यटन कभी इतना कम नहीं देखा गया।

कस्बे में वैसे तो जन-जीवन ठहरा हुआ ही दिख रहा है, फिर भी लेह में खुले एक बाजार में कुछ चहल-पहल देखी जा रही है। विक्रेताओं का कहना है कि वे सप्ताह में केवल तीन दिन बाजार खोलते हैं, लेकिन मुश्किल से ही कोई ग्राहक आ रहा है।

एक विक्रेता ने कहा, ऐसा लगता है कि 2020 साल अपने साथ सभी तरह की समस्याएं एक साथ लेकर आया है।

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छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

डिजिटल डेस्क, भोपाल। 21वीं सदी में भारत की राजनीति में तेजी से बदल रही हैं। देश की राजनीति में युवाओं की बढ़ती रूचि और अपनी मौलिक प्रतिभा से कई आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। बदलते और सशक्त होते भारत के लिए यह राजनीतिक बदलाव बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा ऐसी उम्मीद हैं।

अलबत्ता हमारी खबरों की दुनिया लगातार कई चहरों से निरंतर संवाद करती हैं। जो सियासत में तरह तरह से काम करते हैं। उनको सार्वजनिक जीवन में हमेशा कसौटी पर कसने की कोशिश में मीडिया रहती हैं।

आज हम बात करने वाले हैं मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस (सोशल मीडिया) प्रभारी व राष्ट्रीय समन्वयक, भारतीय युवा कांग्रेस अभय तिवारी से जो अपने गृह राज्य छत्तीसगढ़ से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखते हैं और छत्तीसगढ़ को बेहतर बनाने के प्रयास के लिए लामबंद हैं।

जैसे क्रिकेट की दुनिया में जो खिलाड़ी बॉलिंग फील्डिंग और बल्लेबाजी में बेहतर होता हैं। उसे ऑलराउंडर कहते हैं अभय तिवारी भी युवा तुर्क होने के साथ साथ अपने संगठन व राजनीती  के ऑल राउंडर हैं। अब आप यूं समझिए कि अभय तिवारी देश और प्रदेश के हर उस मुद्दे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगातार अपना योगदान देते हैं। जिससे प्रदेश और देश में सकारात्मक बदलाव और विकास हो सके।

छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या बहुत पुरानी है. लाल आतंक को खत्म करने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही है. बावजूद इसके नक्सल समस्या बरकरार है।  यह भी देखने आया की पूर्व की सरकार की कोशिशों से नक्सलवाद नहीं ख़त्म हुआ परन्तु कांग्रेस पार्टी की भूपेश सरकार के कदम का समर्थन करते हुए भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर अभय तिवारी ने विश्वास जताया है कि कांग्रेस पार्टी की सरकार एक संवेदनशील सरकार है जो लड़ाई में नहीं विश्वास जीतने में भरोसा करती है।  श्री तिवारी ने आगे कहा कि जितने हमारे फोर्स हैं, उसके 10 प्रतिशत से भी कम नक्सली हैं. उनसे लड़ लेना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन विश्वास जीतना बहुत कठिन है. हम लोगों ने 2 साल में बहुत विश्वास जीता है और मुख्यमंत्री के दावों पर विश्वास जताया है कि नक्सलवाद को यही सरकार खत्म कर सकती है।  

बरहाल अभय तिवारी छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री बघेल के नक्सलवाद के खात्मे और छत्तीसगढ़ के विकास के संबंध में चलाई जा रही योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं. ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने यह कई बार कहा है कि अगर हथियार छोड़ते हैं नक्सली तो किसी भी मंच पर बातचीत के लिए तैयार है सरकार। वहीं अभय तिवारी  सर्कार के समर्थन में कहा कि नक्सली भारत के संविधान पर विश्वास करें और हथियार छोड़कर संवैधानिक तरीके से बात करें।  कांग्रेस सरकार संवेदनशीलता का परिचय देते हुए हर संभव नक्सलियों को सामाजिक  देने का प्रयास करेगी।  

बीते 6 महीने से ज्यादा लंबे चल रहे किसान आंदोलन में भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अभय तिवारी की खासी महत्वपूर्ण भूमिका हैं। युवा कांग्रेस के बैनर तले वे लगातार किसानों की मदद के लिए लगे हुए हैं। वहीं मौजूदा वक्त में कोरोना की दूसरी लहर के बाद बिगड़ी स्थितियों में मरीजों को ऑक्सीजन और जरूरी दवाऐं निशुल्क उपलब्ध करवाने से लेकर जरूरतमंद लोगों को राशन की व्यवस्था करना। राजनीति से इतर बेहद जरूरी और मानव जीवन की रक्षा के लिए प्रयासरत हैं।

बहरहाल उम्मीद है कि देश जल्दी करोना से मुक्त होगा और छत्तीसगढ़ जैसा राज्य नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ देगा। देश के बाकी संपन्न और विकासशील राज्यों की सूची में जल्द शामिल होगा। लेकिन ऐसा तभी संभव होगा जब अभय तिवारी जैसे युवा और विजनरी नेता निरंतर रणनीति के साथ काम करेंगे तो जल्द ही छत्तीसगढ़ भी देश के संपन्न राज्यों की सूची में शामिल होगा।