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इस एक विटामिन की कमी के चलते होता है पुरूषों और महिलाओं की फर्टिलिटी पर असर

इस एक विटामिन की कमी के चलते होता है पुरूषों और महिलाओं की फर्टिलिटी पर असर

हाईलाइट

  • विटामिन डी की कमी से होता है फर्टिलिटी पर असर
  • विटामिन डी की कमी पूरी करने के लिए सूर्य की रोशनी में रहे
  • जानें क्या है विटामिन डी की कमी के लक्षण

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में ये जरूरी है कि हम अपनी सेहत का ख्याल रखें। हम जो भी चीज खाते-पीते है उसका सीधा असर हमारे हैल्थ पर पड़ता है और बहुत जल्दी ही वो हमारे शरीर व चेहरे पर दिखने लगता है। यही वजह है कि डाइट हमारे जीवन जीने के तरीके यानी लाइफस्टाइल में अहम भूमिका निभाती है। जितनी जरूरी हमारी डाइट होती है उतना ही जरूरी है हमारे शरीर के लिए पोषक तत्वों की आपूर्ति। खासकर हमारे जीवन में विटामिन्स का भरपूर मात्रा में होना अति अवश्यक है। इसलिए हमें विटामिन्स से भरपूर चीजें खानी चाहिए।

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विटामिन्स के कई फायदे होते हैं, लेकिन हर चीज सही मात्रा में ही खाना-पीना चाहिए क्योंकि किसी भी चीज कि अधिकता नुकसान देह होती है। खासकर बात जब शरीर की हो तो विशेष रूप से इस बात का ख्याल रखना चाहिए। विटामिन्स में मौजूद पोषक तत्व ऐसे तो कई शारीरिक कार्यों के लिए जरूरी और उचित हैं लेकिन खास तौर पर इसका हमारे इम्यून सिस्टम, प्रजनन क्षमता, स्किन केयर और स्ट्रेस कम करने मे महत्वपूर्ण योगदान रहता है। 

क्या जानते है कि पुरूष और महिलाओं की फर्टिलिटी एक विशेष प्रकार की विटामिन की कमी के चलते प्रभावित होती है। विटामिन डी की कमी के चलते महिला व पुरूष दोनों को हि काफी हद तक परेशानी का सामना करना पड़ सकता है क्योंकि इसका सीधा असर फर्टिलिटी पर होता है। इतना ही नहीं विटामिन डी की कमी डिमेंशिया और सेहत में गिरावट का कारण बनती है। इसलिए ध्यान रखें की त्वचा का रंग जितना गहरा होगा, विटामिन डी उतना ही कम बनेगा और फिर धीरे धीरे इसकी कमी भी होती चली जाएगी। बहुत ज्यादा वजन भी आपको विटामिन डी की कमी की ओर ले जाता है।

भोजन के माध्यम से और सूर्य के प्रकाश के संपर्क में आने से विटामिन डी मिलता है। अधिकांश वयस्कों के लिए, विटामिन डी की कमी चिंता का विषय नहीं है। कुछ, विशेष रूप से गहरे रंग की त्वचा वाले और 65 वर्ष से अधिक उम्र के वयस्कों को इस स्थिति का अधिक खतरा होता है। ज्यादातर लोगों में कोई लक्षण नहीं होते हैं। गंभीर मामलों में विटामिन डी की कमी के कारण पतली, भंगुर या मिसफेन हड्डियां हो सकती हैं। हालांकि विटामिन डी सप्लीमेंट इसका मुख्य उपचार है। विटामिन डी कैल्शियम को पचाने में और अवशोषण में शरीर की मदद करता है। शरीर की कोशिकाओं को स्वस्थ रखने के लिए यह भोजन और अन्य विकल्पों से कैल्शियम ग्रहण करता है।

विटामिन डी कुछ खाद्ध पदार्थों में भी उपस्थित होता है जैसे दूध में। इसके अलावा कुछ अन्य खाद्ध पदार्थ जैसे की मछली और डेरी उत्पाद में भी इसकी मौजूदगी होती है। हालांकि सिर्फ आहार के माध्यम से विटामिन डी की पूर्ति करना संभव नहीं है। 

विटामिन डी की कमी से थकान, हड्डियों में दर्द, शरीर के पीछे निचले हिस्से में दर्द, अवसाद, घाव को भरने में अधिक वक्त लगना, हड्डियों में कमी, बाल ड़ना, मांसपेशियों में दर्द आदि की समस्याएं होती हैं। 

इसके अलावा अगर आपकी जीवन शैली या दिनचर्या इश प्रकार की है कि आप सूर्य की रोशनी नहीं ले पाते तब आपको निम्न लक्षण महसूस हो सकते है, जिससे आपको अनुभव हो जाएगा कि आपको विटामिन डी की कमी है।

विटामिन डी की कमी के लक्षण
1. उदास रहना
2. वजन बढ़ना
3. बार-बार संक्रमण की चपेट में आना
4. अधिक थकान महसूस करना
5. घाव आसानी से न भर पाना 
6. हड्डियों की कमी
7. पाचन संबंधी परेशानी
8. हड्डियों और जोड़ो पर दर्द होना
9. सिर से पसीना आना
10. बाल झड़ना

विटामिन डी की कमी के कारण
इसका मुख्य कारण होता है सूर्य की रोशनी नहीं ले पाना या फिर विटामिन डी को अपने आहार में सम्मिलित ना करना।


विटामिन डी की कमी से बचाव
विटामिन डी युक्त खाद्ध पदार्थ खाना शुरू करें। 
रोजाना 15-20 मिनट धूप लें।
प्रत्येक दिन सूर्य की रोशनी में कुछ समय व्यतीत करें।
यदि पेट, लिवर और किडनी संबंधित बीमारी है तो इन्हें ठीक करने के लिए दवाईयां लें और इनकी स्थिति में सुधार लाएं। 
विटामिन डी के सप्लीमेंट का उपयोग करें।


विटामिन डी के कुछ अन्य स्त्रोत और खाद्ध पदार्थ
1.स्त्रोत-----
मशरूम
अंडा
दूध 
कलेजी 
पनीर

2.खाद्ध पदार्थ-----
डेरी उत्पाद
संतरे का जूस
सोया मिल्क
अनाज 

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डिजिटल डेस्क, जबलपुर। किसी के लिए भी प्रॉपर्टी खरीदना जीवन के महत्वपूर्ण कामों में से एक होता है। आप सारी जमा पूंजी और कर्ज लेकर अपने सपनों के घर को खरीदते हैं। इसलिए यह जरूरी है कि इसमें इतनी ही सावधानी बरती जाय जिससे कि आपकी मेहनत की कमाई को कोई चट ना कर सके। प्रॉपर्टी की कोई भी डील करने से पहले पूरा रिसर्च वर्क होना चाहिए। हर कागजात को सावधानी से चेक करने के बाद ही डील पर आगे बढ़ना चाहिए। हालांकि कई बार हमें मालूम नहीं होता कि सही और सटीक जानकारी कहा से मिलेगी। इसमें bhaskarproperty.com आपकी मदद कर सकता  है। 

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कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।