दैनिक भास्कर हिंदी: बांग्लादेश के विदेश मंत्री ने किया भारत दौरा रद्द, नागरिकता बिल के चलते फैसला

December 12th, 2019

हाईलाइट

  • बांग्लादेश के विदेश मंत्री एके अब्दुल मोमन ने अपना भारत दौरा रद्द कर दिया
  • वह दिल्ली डॉयलॉग में शामिल होने के लिए 3 दिवसीय यात्रा पर आने वाले थे
  • नागरिकता बिल से उत्पन्न स्थिति को लेकर उन्होंने अपनी भारत यात्रा रद्द की

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। बांग्लादेश के विदेश मंत्री एके अब्दुल मोमन ने अपना भारत दौरा रद्द कर दिया है। वह फॉरेन मिनिस्ट्री की ओर से आयोजित दिल्ली डॉयलॉग में शामिल होने के लिए तीन दिवसीय यात्रा (12-14 दिसंबर) के लिए भारत आने वाले थे। संसद में विवादास्पद नागरिकता (संशोधन) विधेयक के पारित होने से उत्पन्न स्थिति को लेकर उन्होंने अपनी भारत यात्रा रद्द की है। हालांकि अब्दुल मोमन ने यात्रा रद्द करने का दूसरा कारण बताया है। 

ANI ने मंत्री के हवाले से बताया, 'मुझे अपनी नई दिल्ली की यात्रा रद्द करनी पड़ी, क्योंकि मुझे 'बुडिजिब देबोश' और 'बिजॉय देबोश' में भाग लेना है। हमारे राज्य मंत्री भी विदेशी दौरे पर मैड्रिड और फॉरेन सेक्रेटरी हेग में है। उन्होंने कहा, 'मैं जनवरी में अगली बैठक में भाग लेने के लिए उत्सुक हूं। मैं अपने डीजी को इस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए भेज रहा हूं।'

इससे पहले बुधवार को, एके अब्दुल मोमन ने कहा था कि नागरिकता (संशोधन) विधेयक एक धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र के रूप में भारत के ऐतिहासिक चरित्र को कमजोर कर सकता है। उन्होंने उन आरोपों को भी खारिज कर दिया कि अल्पसंख्यक उनके देश में धार्मिक उत्पीड़न का सामना कर रहे हैं। मंत्री ने यह भी कहा कि बांग्लादेश और भारत वर्तमान में घनिष्ठ मैत्रीपूर्ण संबंध है। ये द्विपक्षीय संबंधों का 'सुनहरा अध्याय' है। इसलिए स्वाभाविक रूप से हमारे लोग (बांग्लादेशी) उम्मीद करते हैं कि भारत ऐसा कुछ भी नहीं करेगा जिससे उनमें चिंता पैदा हो।

बता दें कि राज्यसभा से बुधवार को नागरिकता (संशोधन) बिल 2019 पास हो गया। बिल के पक्ष में 125 जबकि विरोध में 105 वोट पड़े। लोकसभा में बिल के पक्ष में वोटिंग करने वाली शिवसेना ने राज्यसभा में वॉकआउट किया और वोटिंग में शामिल नहीं हुई। अब इस बिल को राष्ट्रपति के पास भेजा जाएगा। राष्ट्रपति की मुहर के बाद ये बिल कानून बन जाएगा। 

इस कानून के जरिए पड़ोसी तीनों देशों पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश के छह अल्पसंख्यक समुदायों (हिंदू, बौद्ध, जैन, पारसी, ईसाई और सिख) से ताल्लुक़ रखने वाले लोगों को भारतीय नागरिकता मिल सकेगी।