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दिल्ली पुलिस वापस लेगी डेढ़ लाख चालान, मगर चालान के रुपयों की वापसी की गारंटी नहीं (आईएएनएस एक्सक्लूसिव)

October 14th, 2019 22:00 IST
 दिल्ली पुलिस वापस लेगी डेढ़ लाख चालान, मगर चालान के रुपयों की वापसी की गारंटी नहीं (आईएएनएस एक्सक्लूसिव)

नई दिल्ली, 14 अक्टूबर (आईएएनएस)। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के लाखों वाहन चालक दो विभागों के बीच छिड़ी नाक की बेतुकी लड़ाई में अब तक पिस रहे थे। लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) और दिल्ली यातायात पुलिस के बीच महीनों से चल रही धींगामुश्ती का खामियाजा दिल्ली की सड़कों पर चल रहे वाहन चालकों को भुगतना पड़ रहा था। इन दोनों महकमों के अड़ियल रवैये के चलते ही वाहन चालकों की जेब भी खूब ढीली हो रही थी। मूछ की इस लड़ाई में वाहन चालकों के हित में और उनके कड़े विरोध के मद्देनजर अंतत: पांव दिल्ली पुलिस को ही पीछे खींचने पड़े हैं।

दिल्ली यातायात पुलिस अब करीब डेढ़ लाख चालान वापस ले रही है। ये सभी चालान निर्धारित कथित गति सीमा से ज्यादा स्पीड में राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या-24 (अब 9) पर दौड़ने वाले वाहनों से संबंधित हैं।

दिल्ली यातायात पुलिस में उपायुक्त स्तर के एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर आईएएनएस को बताया, करीब डेढ़ लाख चालानों को दिल्ली ट्रैफिक पुलिस वापस ले रही है। ये चालान करीब ढाई महीने (अगस्त से अक्टूबर 10 तक) के भीतर काटे गए हैं। इन चालानों में ज्यादातार चालान निर्धारित गति सीमा से ज्यादा स्पीड (60 किलोमीटर प्रति घंटा की गति से ज्यादा) में वाहन राष्ट्रीय राजमार्ग पर दौड़ाने से संबंधित हैं।

दिल्ली पुलिस के ही एक अन्य अधिकारी के मुताबिक, दरअसल, वापस लिए जाने वाले ये चालान राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 24 (अब 9) पर निजामुद्दीन पुल से गाजीपुर स्थित दिल्ली यूपी (गाजियाबाद) सीमा पर आते-जाते वाहनों के काटे गए हैं। इनमें से अधिकांश चालान ओवर-स्पीडिंग के हैं।

आखिर इन चालानों वापस लेने को मजबूर क्यों होना पड़ा? दिल्ली ट्रैफिक पुलिस के एक अधिकारी ने कहा, दरअसल निर्धारित गति से ऊपर यानी 60 किलोमीटर प्रति घंटा की गति से ऊपर जो वाहन हाईवे पर हमारे कैमरों ने पकड़े, उन सबको ई-चालान भेजे जा रहे थे। बाद में शिकायतें आनी शुरू हुईं कि हाईवे पर पीडब्ल्यूडी विभाग ने निर्धारित गति सीमा 70 किलोमीटर प्रति घंटा के साइन बोर्ड लगा रखे हैं।

दिल्ली ट्रैफिक पुलिस के इसी आला-अफसर के मुताबिक, ट्रैफिक पुलिस काफी समय से पीडब्ल्यूडी से कह रही थी कि वह साइनबोर्ड बदल दे। मतलब अधिकतम 70 किलोमीटर प्रति घंटा की स्पीड वाले पहले से लगे हुए साइन बोर्ड बदलकर, निर्धारित गति सीमा 60 किलोमीटर प्रति घंटा कर दे। काफी प्रयासों के बाद भी जब साइन बोर्ड नहीं बदले गए, तो जनहित में दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने ही करीब डेढ़ लाख चालान वापस लेने की योजना बनाई है। साथ ही दिल्ली ट्रैफिक पुलिस के उन कैमरों में भी अब 70 किलोमीटर प्रति घंटा की अधिकतम गति सीमा फीड कर दी गई है, जो राष्ट्रीय राजमार्ग पर आने-जाने वाले वाहनों की गति दर्ज करते हैं।

दिल्ली ट्रैफिक पुलिस के डीसीपी स्तर के एक अधिकारी ने आईएएनएस से कहा, जिन वाहन चालकों के ई-चालान कट चुके हैं, उन्हें ट्रैफिक पुलिस अपनी बेवसाइट से हटा लेगी।

मगर सवाल यह उठता है कि अब तक जो लोग करोड़ों रुपये के ऑनलाइन चालान की रकम दिल्ली ट्रैफिक पुलिस के जरिए दिल्ली सरकार को जमा कर चुके हैं, उसकी वापसी कैसे होगी? दिल्ली ट्रैफिक पुलिस के किसी भी आला-अफसर के इस सवाल का माकूल जबाब नहीं है।

दूसरी ओर दिल्ली ट्रैफिक पुलिस द्वारा उठाए गए इस अविश्वसनीय कदम के बारे में सूत्र बताते हैं कि, अचानक डेढ़ लाख चालान वापस लेने का फैसला दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने यूं ही नहीं लिया है। दिल्ली ट्रैफिक पुलिस को कहीं से भनक लग चुकी थी कि यह मुद्दा कुछ वाहन चालक जनहित याचिका के रूप में उच्च न्यायालय के सामने लेकर पहुंचने की तैयारी में हैं। जैसे ही कानूनी रूप से खुद की गर्दन फंसती नजर आई, दिल्ली ट्रैफिक पुलिस को आनन-फानन में जनहित का ख्याल आ गया। और उसने वक्त गंवाए बिना एकदम डेढ़ लाख चालान वापस लेने का निर्णय ले लिया। अगर दिल्ली ट्रैफिक पुलिस की इस बे-सिर-पैर की कमाने के कथित जुगाड़ में पीडब्ल्यूडी ने भी साथ दे दिया होता, तो बेकसूर वाहन चालक न मालूम कब तक दिल्ली ट्रैफिक पुलिस का करा-धरा भरते रहते!

उल्लेखनीय है कि लाल बत्ती जंप करने वालों और वाहन गति सीमा कानून की धज्जियां उड़ाने वालों से निपटने के लिए दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने हाल ही में करीब 24 नए कैमरे राष्ट्रीय राजधानी में लगाए हैं। ये कैमरे जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय, आईएसबीटी, नेलसन मंडेला मार्ग, अगस्त क्रांति मार्ग, भलस्वा-वजीराबाद रोड, दिल्ली-नोएडा-दिल्ली फ्लाईवे, जीटी करनाल रोड पर लगाए गए हैं।

दूसरी ओर आंकड़े बताते हैं कि केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय ने जबसे (2017 से) ई-चालान एप विकसित कराया है, तब से इसे 17 राज्य अमल में ला रहे हैं। एनआईसी द्वारा विकसित किए गए इस ई-चालान एप के जरिए देश में करीब दो हजार तीन सौ करोड़ रुपये का राजस्व सिर्फ यातायात नियमों का उल्लंघन करने वालों से ही वसूला/जमा करवाया जा चुका है।

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क्या है ड्रोन ? देश की सुरक्षा के लिए कितना घातक हो सकता है, जानें सबकुछ

क्या है ड्रोन ? देश की सुरक्षा के लिए कितना घातक हो सकता है, जानें सबकुछ

डिजिटल डेस्क, श्रीनगरजम्मू कश्मीर की सीमा के आसपास ड्रोन की हलचलें लगातार तेज होती जा रही हैं। इसके बाद भारत ने भी ये मुद्दा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाया है कि ड्रोन की इस तरह की गतिविधियां न सिर्फ भारत बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सुरक्षा के दृष्टिकोण से घातक साबित हो सकती हैं। इस हमले के बाद से भारत में ड्रोन के इस्तेमाल को लेकर बहस छिड़ गई है। इस रिपोर्ट में जानिए आखिर ड्रोन है क्या और यह कैसे ऑपरेट होते हैं? इसके इस्तेमाल और इससे क्या नुकसान हो सकता है और देश में ड्रोन्स को उड़ाने को लेकर सरकार की क्या गाइडलाइन्स हैं।

ड्रोन क्या होता है?
ड्रोन्स को UAV यानी Unmanned aerial vehicles या RPAS यानी Remotely Piloted Aerial Systems भी कहा जाता है। आम बोल चाल वाली भाषा में इसे मिनी हैलिकॉप्टर भी कहते हैं। अक्सर शादी के दौरान फोटोग्राफी के लिए आपने ड्रोन का इस्तेमाल होते हुए देखा होगा। यह एक ऐसा यंत्र है, जिसमें एचडी कैमरे, ऑनबोर्ड सेंसर और जीपीएस लगा होता है। इसे नियंत्रित करने के लिए एक सॉफ्टवेयर की आवश्यकता होती है। इसके चारों और 4 रोटर्स लगे होते हैं, जिनकी मदद से यह आसमान में ऊंचा उड़ने में सक्षम होता है। एक ड्रोन का वजन 250 ग्राम से लेकर 150 किलोग्राम से भी ज्यादा हो सकता है।

ड्रोन को उड़ाने के लिए सॉफ्टवेयर, जीपीएस और रिमोट की आवश्यकता होती है। रिमोट के जरिए ही ड्रोन को ऑपरेट और कंट्रोल कर सकते हैं। ड्रोन पर लगे रोटर्स की गति को रिमोट की जॉयस्टिक के जरिए कंट्रोल किया जाता है। वहीं, जीपीएस दिशाएं बताता हैं, जीपीएस दुर्घटना होने से पहले ही ऑपरेटर को चेतावनी भेज देता है। 

ड्रोन हमले किस तरह से हो सकते हैं?
ड्रोन का इस्तेमाल कई देशों की सेनाएं कर रही हैं, क्योंकि ये साइज में छोटे होते हैं इसलिए रडार की पकड़ में आसानी से नहीं आ पाते हैं, साथ ही दुर्गम इलाकों में भी गुपचुप घुसपैठ कर सकते हैं। यही कारण है कि सेना में इनका इस्तेमाल बढ़ने लगा है।ड्रोन हमले दो प्रकार से संभव हैं। एक तरीका ये है कि ड्रोन में हथियार या विस्फोटक लगा दिए जाते हैं और ड्रोन इन हथियारों या विस्फोटक को लक्ष्य पर ड्रॉप कर देता है। ड्रोन से हमले का दूसरा तरीका है ड्रोन को खुद ही एक विस्फोटक में बदल दिया जाए। 

कितने घातक हो सकते हैं ड्रोन हमले?
ये ड्रोन के प्रकार और पेलोड पर निर्भर है। पेलोड मतलब ड्रोन कितना वजन अपने साथ लेकर उड़ सकता है। ड्रोन की पेलोड क्षमता जितनी ज्यादा होगी वो अपने साथ उतनी ज्यादा मात्रा में विस्फोटक सामग्री लेकर उड़ सकता है। अमेरिका के MQ-9 रीपर ड्रोन अपने साथ 1700 किलो तक वजन ले जाने में सक्षम हैं।

ड्रोन से अबतक के बड़े हमले
2020 में अमेरिका ने ईरानी मेजर जनरल सुलेमानी को मार गिराया था। इससे पहले 2019 में यमन के हूती विद्रोहियों ने साऊदी अरब की अरामको ऑयल कंपनी पर ड्रोन हमला किया था। पाकिस्तान के वजीरिस्तान में 2009 के दौरान एक ड्रोन हमले में 60 लोग मारे गए थे।

देश में ड्रोन्स के इस्तेमाल को लेकर गाइडलाइन्स 
देश में नागरिक उड्डयन मंत्रालय(Ministry of Civil Aviation) ने ड्रोन उड़ाने पर कई तरह के प्रतिबंध लगा रखे हैं। ड्रोन के वजन और साइज के अनुसार इन प्रतिबंधों को कई वर्ग में बांटा गया है।

1.नेनो ड्रोन्स- इसको उड़ाने के लिए लाइसेंस की आवश्यकता नहीं पड़ती।

2.माइक्रो ड्रोन्स- इसको उड़ाने के लिए UAS Operator Permit-I से अनुमति लेनी पड़ती है और ड्रोन पायलट को SOP(Standard operating procedure) का पालन करना होता है। 

इनसे बड़े ड्रोन उड़ाने के लिए डीजीसीए से परमिट(लाइसेंस ) की आवश्यकता होती है। अगर आप किसी प्रतिबंधित जगह पर ड्रोन उड़ाना चाहते हैं तो इसके लिए भी आपको डीजीसीए से अनुमति लेनी पड़ेगी। बिना अनुमति के ड्रोन उड़ाना गैरकानूनी है और इसके लिए ड्रोन ऑपरेटर पर भारी जुर्माने का भी प्रावधान है।

ड्रोन उड़ाने के लिए प्रतिबंधित जगह

  • मिलिट्री एरिया के आसपास या रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण इलाका।
  • इंटरनेशनल एयरपोर्ट के 5 किलोमीटर और नेशनल एयरपोर्ट के 3 किलोमीटर का दायरा।
  • इंटरनेशनल बॉर्डर के 25 किलोमीटर का दायरा ।
  • इसके अलावा ड्रोन की कैटेगरी को मद्देनजर रखते हुए इन्हें कितनी ऊंचाई तक उड़ाया जा सकता है वो भी निर्धारित है।

ड्रोन उड़ाने के लिए जरूरी हैं लाइसेंस
नैनो ड्रोन्स को छोडकर किसी भी तरह के ड्रोन्स को उड़ाने के लिए लाइसेंस या परमिट की जरूरत पड़ती है।ड्रोन उड़ाने के लिए लाइसेंस दो कैटेगरी के अंतर्गत दिए जाते हैं, जिसमें पहला है स्टूडेंट रिमोट पायलट लाइसेंस और दूसरा है रिमोट पायलट लाइसेंस।इन दोनों लाइसेंस को प्राप्त करने के लिए ड्रोन ऑपरेटर की न्यूनतम उम्र 18 साल और अधिकतम 65 साल होनी चाहिए। लाइसेंस के लिए ऑपरेटर कम से कम 10वीं पास या 10वीं क्लास के बराबर उसके पास किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड से डिग्री होना अति आवश्यक हैं।आवेदन करने वाले व्यक्ति को डीजीसीए स्पेसिफाइड मेडिकल एग्जामिनेशन भी पास करना जरूरी है। लाइसेंस के लिए बैकग्राउंड भी चेक होता है।

जुर्माने का प्रावधान

  • बिना लाइसेंस उड़ाने पर 25000 रुपए का जुर्माना।
  • नो-ऑपरेशन जोन यानी प्रतिबंधित क्षेत्र में उड़ान भरने पर 50000 रुपए का जुर्माना।
  • ड्रोन का थर्ड पार्टी बीमा ना होने पर 10000 रुपए का जुर्माना लग सकता है।