दैनिक भास्कर हिंदी: सपा का दामन छोड़ नरेश अग्रवाल हुए बीजेपी में शामिल

March 12th, 2018

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। समाजवादी पार्टी के दिग्गज नेता नरेश अग्रवाल ने बीजेपी का दामन थाम लिया है। माना जा रहा है कि नरेश अग्रवाल सपा अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से राज्यसभा सीट पर उनकी जगह जया बच्चन को टिकट देने से नाराज थे। नरेश अग्रवाल का जाना समाजवादी पार्टी के लिए एक बड़े झटके के रूप में देखा जा रहा है। बता दें कि नरेश अग्रवाल ने कांग्रेस से अपनी राजनीतिक पारी की शुरुआत की थी। फिलहाल वह राज्यसभा सासंद है, उनका कार्यकाल 23 मार्च को खत्म हो रहा है।

बीजेपी हेडक्वॉटर में की सदस्यता ग्रहण
नरेश अग्रवाल ने सोमवार को दिल्ली में बीजेपी हेडक्वॉर्टर पहुंचकर बीजेपी की औपचारिक रूप से सदस्यता ग्रहण की। सपा की तरफ से जया बच्चन को राज्यसभा का टिकट दिए जाने के बाद से ही ये खबरे लगातार आ रही थी की नरेश अग्रवाल बीजेपी का दामन थाम सकते है। आखिरकर सोमवार को ये खबरे सही साबित हुई और नरेश अग्रवाल ने अपनी पार्टी बदल ली। सपा के सबसे बड़े सियासी दुश्मन बजीपी से हाथ मिलाना सपा के लिए तगड़ा झटका है। राष्ट्रीय राजनीति में सपा का सबसे मुखर चेहरा नरेश अग्रवाल ही थे। 

नरेश ने दिया था अखिलेश का साथ
वैसे तो समाजवादी पार्टी के छह राज्यसभा सांसद किरणमय नंदा, दर्शन सिंह यादव, नरेश अग्रवाल, जया बच्चन, मुनव्वर सलीम और आलोक तिवारी रिटायर हो रहे हैं, लेकिन राज्यसभा में सपा के पास अब 47 वोट है। इसलिए अखिलेश यादव केवल एक ही नेता को राज्यसभा भेज सकते है। नरेश अग्रवाल को उम्मीद थी की उन्हें पार्टी में तरजीह दी जाएगी और राज्यसभा भेजा जाएगा। समाजवादी पार्टी में जब अखिलेश बनाम मुलायम की जंग छिड़ी हुई थी तब नरेश अग्रवाल ने खुलकर अखिलेश यादव का साथ दिया था, लेकिन इसके बावजूद पार्टी ने जया बच्चन को राज्यसभा भेजने का फैसला किया और उनका पत्ता काट दिया।

राज्यसभा का फॉर्मूला
राज्यसभा चुनाव का फॉर्मूला है, खाली सीटें में एक जोड़ से विधानसभा की सदस्य संख्या से भाग देना। निष्कर्ष में भी एक जोड़ने पर जो संख्या आती है। उतने ही वोट एक सदस्य को राज्यसभा चुनाव जीतने के जरूरी होता है। 10 सीटों में 1 को जोड़ा तो हुए 11। अब 403 को 11 से भाग देते हैं तो आता है 36.63। इसमें 1 जोड़ा जाए तो आते हैं 37.63। यानी यूपी राज्यसभा चुनाव जीतने के लिए एक सदस्य को औसतन 38 विधायकों का समर्थन चाहिए।

दलबदल है नरेश अग्रवाल का राजनीतिक करियर
नरेश अग्रवाल पहली बार 1980 में कांग्रेस विधायक चुने गए। इसके बाद 1989 से 2008 तक लगातार यूपी विधानसभा के सदस्य रहे। 1997 में उन्होंने कांग्रेस का साथ छोड़ते हुए लोकतांत्रिक कांग्रेस पार्टी का गठन किया। इसके बाद उन्होंने बसपा ज्वाइन की। मायावती पर पैसा लेने का आरोप लगाते हुए पार्टी छोड़ दी। इसके बाद लंबे समय तक सपा में रहे। 1997 से 2001 तक वो यूपी सरकार में ऊर्जा मंत्री रहे। 2003 से 2004 तक पर्यटन मंत्री रहे। 2004 से 2007 तक उन्होंने यूपी के परिवहन मंत्री का कार्यभार संभाला। बाद में वे राज्यसभा के लिए चुने गए और संसद की कई कमेटियों में महत्वपूर्ण पदों पर रहे। उनके परिवार में पत्नी, एक बेटा और एक बेटी है। उनके बेटे नितिन अग्रवाल अखिलेश सरकार में मंत्री रह चुके हैं और वर्तमान में हरदोई से सपा के विधायक हैं। उन्हें समाजवादी पार्टी में बड़ा वैश्य चेहरा माना जाता था। माना जा रहा है कि नरेश अग्रवाल 2019 में हरदोई से भाजपा के लोकसभा प्रत्याशी भी हो सकते हैं।