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पेट्रोल, डीजल को जीएसटी के तहत लाए सरकार : कांग्रेस

June 14th, 2020 22:00 IST
 पेट्रोल, डीजल को जीएसटी के तहत लाए सरकार : कांग्रेस

हाईलाइट

  • पेट्रोल, डीजल को जीएसटी के तहत लाए सरकार : कांग्रेस

नई दिल्ली, 14 जून (आईएएनएस)। पेट्रोल और डीजल की कीमतें लगातार आठवें दिन बढ़ाए जाने के बीच कांग्रेस ने रविवार को सरकार से मांग की कि ईंधन को वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के दायरे में लाया जाए और साथ ही कच्चे तेल की कम कीमतों का लाभ आम जनता को दिया जाए।

कांग्रेस के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी रणदीप सिंह सुरजेवाला ने एक बयान में कहा, नरेंद्र मोदी सरकार हर हाल में पेट्रोल, डीजल और तरलीकृत पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) के दाम घटाकर अगस्त 2014 के स्तर पर लाए।

सुरजेवाला ने कहा कि कच्चे तेल की कीमत मौजूदा समय में 2014 के स्तर पर लगभग 40 डॉलर प्रति बैरल है, लेकिन उपभोक्ता तेल के लिए भारी बिल चुका रहे हैं। उन्होंने कहा कि अगस्त 2014 में दिल्ली में पेट्रोल 36.81 रुपये प्रति लीटर, डीजल 24.16 रुपये प्रति लीटर और एलपीजी 261.60 रुपये प्रति सिलिंडर था। लेकिन मौजूदा समय में पेट्रोल 75.78 रुपये प्रति लीटर, डीजल 74.03 रुपये प्रति लीटर और एलपीजी 593 रुपये प्रति सिलिंडर है।

उन्होंने मांग की, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी-केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की सरकार हर हाल में पेट्रोल पर 23.78 रुपये और डीजल पर 28.37 रुपये बढ़ाए गए उत्पाद शुल्क को तत्काल वापस ले।

ईंधन कीमतों में वृद्धि को लेकर सरकार की निंदा करते हुए सुरजेवाला ने कहा, आज 130 करोड़ भारतीय कोरोवायरस महामारी से जूझ रहे हैं। गरीब, प्रवासी मजदूर, दुकानदार, किसान, छोटे और मझौले व्यापारी और नौकरियां गंवा चुके लोग मोदी सरकार द्वारा बर्बाद की गई अर्थव्यवस्था के बीच जीवन के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

उन्होंने कहा, लेकिन इन सभी के बोझ को कम करने के बदले निर्दयी और जन विरोधी भाजपा सरकार न सिर्फ हर रोज ईंधन कीमतें बढ़ाकर जनता को लूट रही है, बल्कि कच्चे तेल की कम कीमतों का लाभ भी जनता को नहीं दे रही है।

कांग्रेस नेता ने कहा कि पिछले आठ दिनों में पेट्रोल और डीजल की कीमतें क्रमश: 4.52 रुपये प्रति लीटर और 4.64 रुपये प्रति लीटर बढ़ाई गई हैं, जबकि कच्चे तेल की कीमतें कम हैं।

उन्होंने कहा कि यह रिकॉर्ड का एक मामला है कि जब मई 2014 में मोदी सरकार ने सत्ता संभाली थी, तब पेट्रोल पर उत्पाद शुल्क 9.20 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर 3.46 रुपये प्रति लीटर था।

उन्होंने कहा, पिछले छह वर्षो में पेट्रोल पर अतिरिक्त 23.78 रुपये और डीजल पर अतिरिक्त 28.37 रुपये उत्पाद शुल्क बढ़ाया गया। यह पेट्रोल पर उत्पाद शुल्क में 258 प्रतिशत और डीजल पर 820 प्रतिशत की वृद्धि है।

सुरजेवाला ने यह भी कहा कि वित्त वर्ष 2014-15 और 2019-20 के बीच मोदी सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर 12 बार कर बढ़ाए हैं और पिछले छह सालों के दौरान 17,80,056 करोड़ रुपये इकट्ठा किए हैं।

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छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

डिजिटल डेस्क, भोपाल। 21वीं सदी में भारत की राजनीति में तेजी से बदल रही हैं। देश की राजनीति में युवाओं की बढ़ती रूचि और अपनी मौलिक प्रतिभा से कई आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। बदलते और सशक्त होते भारत के लिए यह राजनीतिक बदलाव बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा ऐसी उम्मीद हैं।

अलबत्ता हमारी खबरों की दुनिया लगातार कई चहरों से निरंतर संवाद करती हैं। जो सियासत में तरह तरह से काम करते हैं। उनको सार्वजनिक जीवन में हमेशा कसौटी पर कसने की कोशिश में मीडिया रहती हैं।

आज हम बात करने वाले हैं मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस (सोशल मीडिया) प्रभारी व राष्ट्रीय समन्वयक, भारतीय युवा कांग्रेस अभय तिवारी से जो अपने गृह राज्य छत्तीसगढ़ से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखते हैं और छत्तीसगढ़ को बेहतर बनाने के प्रयास के लिए लामबंद हैं।

जैसे क्रिकेट की दुनिया में जो खिलाड़ी बॉलिंग फील्डिंग और बल्लेबाजी में बेहतर होता हैं। उसे ऑलराउंडर कहते हैं अभय तिवारी भी युवा तुर्क होने के साथ साथ अपने संगठन व राजनीती  के ऑल राउंडर हैं। अब आप यूं समझिए कि अभय तिवारी देश और प्रदेश के हर उस मुद्दे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगातार अपना योगदान देते हैं। जिससे प्रदेश और देश में सकारात्मक बदलाव और विकास हो सके।

छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या बहुत पुरानी है. लाल आतंक को खत्म करने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही है. बावजूद इसके नक्सल समस्या बरकरार है।  यह भी देखने आया की पूर्व की सरकार की कोशिशों से नक्सलवाद नहीं ख़त्म हुआ परन्तु कांग्रेस पार्टी की भूपेश सरकार के कदम का समर्थन करते हुए भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर अभय तिवारी ने विश्वास जताया है कि कांग्रेस पार्टी की सरकार एक संवेदनशील सरकार है जो लड़ाई में नहीं विश्वास जीतने में भरोसा करती है।  श्री तिवारी ने आगे कहा कि जितने हमारे फोर्स हैं, उसके 10 प्रतिशत से भी कम नक्सली हैं. उनसे लड़ लेना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन विश्वास जीतना बहुत कठिन है. हम लोगों ने 2 साल में बहुत विश्वास जीता है और मुख्यमंत्री के दावों पर विश्वास जताया है कि नक्सलवाद को यही सरकार खत्म कर सकती है।  

बरहाल अभय तिवारी छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री बघेल के नक्सलवाद के खात्मे और छत्तीसगढ़ के विकास के संबंध में चलाई जा रही योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं. ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने यह कई बार कहा है कि अगर हथियार छोड़ते हैं नक्सली तो किसी भी मंच पर बातचीत के लिए तैयार है सरकार। वहीं अभय तिवारी  सर्कार के समर्थन में कहा कि नक्सली भारत के संविधान पर विश्वास करें और हथियार छोड़कर संवैधानिक तरीके से बात करें।  कांग्रेस सरकार संवेदनशीलता का परिचय देते हुए हर संभव नक्सलियों को सामाजिक  देने का प्रयास करेगी।  

बीते 6 महीने से ज्यादा लंबे चल रहे किसान आंदोलन में भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अभय तिवारी की खासी महत्वपूर्ण भूमिका हैं। युवा कांग्रेस के बैनर तले वे लगातार किसानों की मदद के लिए लगे हुए हैं। वहीं मौजूदा वक्त में कोरोना की दूसरी लहर के बाद बिगड़ी स्थितियों में मरीजों को ऑक्सीजन और जरूरी दवाऐं निशुल्क उपलब्ध करवाने से लेकर जरूरतमंद लोगों को राशन की व्यवस्था करना। राजनीति से इतर बेहद जरूरी और मानव जीवन की रक्षा के लिए प्रयासरत हैं।

बहरहाल उम्मीद है कि देश जल्दी करोना से मुक्त होगा और छत्तीसगढ़ जैसा राज्य नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ देगा। देश के बाकी संपन्न और विकासशील राज्यों की सूची में जल्द शामिल होगा। लेकिन ऐसा तभी संभव होगा जब अभय तिवारी जैसे युवा और विजनरी नेता निरंतर रणनीति के साथ काम करेंगे तो जल्द ही छत्तीसगढ़ भी देश के संपन्न राज्यों की सूची में शामिल होगा।