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करतारपुर कॉरिडोर: जब PM मोदी और मनमोहन सिंह की हुई मुलाकात


हाईलाइट

  • गुरु नानक देव के 550वें प्रकाश पर्व पर करतारपुर कॉरिडोर की शुरुआत हुई
  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कॉरिडोर का उद्घाटन किया
  • 500 से भी ज्यादा लोगों का जत्था पाकिस्तान के लिए रवाना हुआ

डिजिटल डेस्क, गुरदासपुर। गुरु नानक देव के 550वें प्रकाश पर्व पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज (शनिवार) गुरदासपुर के डेरा बाबा नानक में करतारपुर कॉरिडोर का उद्घाटन किया। इस मौके पर उन्होंने विशेष सिक्का व डाक टिकट भी जारी किया। इसके साथ ही पीएम मोदी ने 500 से भी ज्यादा लोगों के जत्थे को इस कॉरिडोर से पाकिस्तान के लिए रवाना भी किया। कार्यक्रम के बाद पीएम मोदी और देश के पूर्व प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह के बीच मुलाकात हुई। दोनों ही नेता एक-दूसरे से गर्मजोशी के साथ मिलते नजर आएं। इस दौरान पूर्व पीएम मनमोहन सिंह के साथ उनकी पत्नी गुरशरण कौर भी मौजूद थी।

अपने संबोधन में पीएम मोदी ने पाकिस्तान प्रधानमंत्री इमरान खान का भारतीय भावनाओं का सम्मान करने के लिए आभार व्यक्त किया। 

उन्होंने बताया कि करतारपुर कॉरिडोर के बनने से अब गुरुद्वारा दरबार साहब के दर्शन आसान हो जाएंगे। उन्होंने कहा कि गुरु नानक देव जी के 550वें प्रकाश-उत्सव से पहले इंटीग्रेटेड चेकपोस्ट, करतारपुर साहिब कॉरिडोर का खुलना सभी के लिए दोहरी खुशी लेकर आया है। साथ ही उन्होंने बताया कि गुरु नानक देव सिर्फ भारत या सिख पंथ के नहीं, बल्कि पूरी मानवता के लिए प्रेरणा पुंज हैं।

पीएम मोदी ने कहा कि करतारपुर केवल गुरुनानक देव की कर्मभूमि ही नहीं है बल्कि करतापुर के कण-कण में गुरुनानक देव के पसीने की महक मिली हुई है। साथ ही उन्होंने कहा कि करतारपुर की वायु में उनकी वाणी घुली हुई है और करतारपुर से मिली गुरुवाणी की ऊर्जा सिर्फ हमारे सिख भाई-बहनों को ही नहीं बल्कि हर भारतवासियों को अपना आशीर्वाद देगी।

उन्होंने कहा कि हमारी गुरु परंपराओं, संत परंपराओं और ऋषि परंपराओं ने अलग-अलग कालखंड में अपने-अपने हिसाब से चुनौतियों से निपटने के रास्ते बताए हैं। उनके रास्ते जितने तब सार्थक थे, उतने ही आज भी अहम हैं।

यह कॉरिडोर भारत के पंजाब के गुरदासपुर जिले के डेरा बाबा नानक धर्मस्थान को पाकिस्तान के पंजाब के नरोवल जिले स्थित करतारपुर के दरबार साहिब से जोड़ता है। बता दें कि यह कॉरिडोर साल भर खुला रहेगा। इसका इस्तेमाल भारतीय नागरिकों द्वारा केवल अपने भारतीय पासपोर्ट के जरिए और बिना वीजा के ही किया जा सकेगा। जो श्रद्धालुगण दर्शन के लिए सुबह के समय में पाकिस्तान जाएंगे उन्हें शाम तक वहां से शाम तक वापस लौटना होगा। इसके अलावा देश के ओवरसीज सिटीजन भी इस गलियारे का लाभ उठा सकेंगे। बता दें कि करतारपुर कॉरिडोर पर श्रद्धालुगणों की सुविधाओं के सारे इंतजाम किए गए हैं।

सिख धर्म के संस्थापक बाबा गुरु नानक जी ने अपने जीवन के अंतिम साल करतारपुर में गुजारे थे और वह इसी स्थान में अवलोक हुए थे। इसी स्थान पर दरबार साहिब गुरुद्वारा स्थित है। भारत और पाकिस्तान के बीच हुए करार के मुताबिक रोजाना करीब पांच हजार श्रद्धालु गलियारे से होकर इस गुरुद्वारे तक मत्था टेकने जाएंगे।

दरबार साहिब गुरुद्वारा के कस्टोडियन रमेश सिंह अरोड़ा ने कहा कि सिख श्रद्धालु इसे लेकर बेहद उत्साहित हैं। उन्होंने कहा कि जैसी पहल करतारपुर गुरुद्वारे के लिए दोनों देशों ने की है, उम्मीद है कि पाकिस्तान स्थित अन्य सिख धर्मस्थलों तक लोगों को जाने देने के लिए ऐसी ही पहल होगी। उन्होंने कहा, अगर आप इतिहास देखें तो पाएंगे कि सिख धर्म की बुनियाद पाकिस्तान में है।

बीते कई महीनों से गुरुद्वारे समेत पूरे करतारपुर में निर्माण कार्य चलता रहा। सैकड़ों की संख्या में मजदूरों ने गुरुद्वारे की साज-सज्जा की, इसके आसपास के इलाकों को सुधारा गया, एक पुल और एक सीमा आव्रजन चौकी भी बनाई गई। भारत लंबे समय से पाकिस्तान के लिए ऐसे एक गलियारे के लिए आग्रह कर रहा था लेकिन दोनों देशों के बीच के राजनैतिक तनाव के कारण इस दिशा में बीते सालों में पहल नहीं हो सकी थी। इस गलियारे का उद्घाटन 12 नवंबर को मनाए जाने वाले बाबा गुरु नानक के 550वें प्रकाशोत्सव के अवसर पर किया जा गया है। दुनिया के कई हिस्सों से करतारपुर पहुंचे सिख श्रद्धालुओं ने यह उम्मीद भी जताई कि यह गलियारा भारत और पाकिस्तान के रिश्तों को सुधारने का रास्ता बनेगा।

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