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लद्दाख: एलएसी पर चीन को जवाब देने के लिए बोफोर्स तैयार कर रही भारतीय सेना, 21 साल पहले करगिल दिलाई थी जीत

लद्दाख: एलएसी पर चीन को जवाब देने के लिए बोफोर्स तैयार कर रही भारतीय सेना, 21 साल पहले करगिल दिलाई थी जीत

हाईलाइट

  • करगिल में बोफोर्स ने ऊंची पहाड़ियों पर बने पाकिस्तान के बंकर तबाह कर दिए थे
  • सेना के इंजीनियर बोफोर्स तोपों की सर्विसिंग में जुटे

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। पूर्वी लद्दाख में एलएसी पर चीन के साथ बढ़ते तनाव को देखते हुए इंडियन आर्मी किसी भी आकस्मि​क स्थिति से निपटने के लिए तैयारी कर रही है। भारतीय सेना अब वहां तैनाती के लिए बोफोर्स होवित्जर तैयार कर रही है। समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार लद्दाख में बोफोर्स तोपों के लिए मेंटेनेंस केंद्र में सेना के इंजीनियर इन तोपों की सर्विसिंग कर रहे हैं। बता दें कि इन बोफोर्स तोपों ने 21 साल पहले पाकिस्तान के खिलाफ करगिल में जीत दिलाई थी। उधर, फॉरवर्ड लोकेशन पर साजो-सामान की सप्लाई के लिए वायुसेना ने सबसे बड़े ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट सी-17 ग्लोबमास्टर और आईएल-76 ल्यूशिन को तैनात किया है। इनके साथ ही चिनूक हेलिकॉप्टर भी इस काम में लगा है।

न्यूज एजेंसी एएनआई ने बुधवार को यह जानकारी दी। इसके मुताबिक, सेना के इंजीनियर बोफोर्स तोपों की सर्विसिंग में जुटे हैं। ये तोपें कुछ दिनों में बॉर्डर पर तैनात कर दी जाएंगी। फॉरवर्ड लोकेशंस पर आर्मी की तैयारियों के सिलसिले में सर्विसिंग और मेंटेनेंस के काम को लेकर लेफ्टिनेंट कर्नल प्रीति कंवर ने जानकारी दी। उन्होंने बताया कि वर्कशॉप में आर्मी के इंजीनियर उन हथियारों के मेंटेनेंस का ध्यान रखते हैं, जिनकी विशेष परिस्थितियों में जरूरत होती है। टेक्निकल स्टोर ग्रुप्स एक टैंक की फायरिंग पिन से लेकर इंजन तक हर चीज मुहैया करवाते हैं। मोबाइल स्पेयर्स वैन के जरिए हम फॉरवर्ड इलाकों में टेक्नीशियंस को कंपोनेंट पहुंचाते हैं।

बोफोर्स तोपों को ऑर्टिलरी रेजिमेंट में 1980 के दशक के मध्य में शामिल किया गया था। ये तोप उच्च और निम्न दोनों कोण (एंगल) से फायरिंग करने में सक्षम हैं। इनकी सर्विसिंग का काम पूरा होने के बाद इन्हें लद्दाख में तैनात किया जाएगा। इसके साथ ही भारतीय वायु सेना लद्दाख की फॉर्वर्ड पोस्ट तक जरूरी सामग्री पहुंचाने का काम कर रही है। अधिकारियों के मुताबिक इन तोपों को समय-समय पर सर्विसिंग और मेंटेनेंस की जरूरत होती है। इसके लिए टेक्नीशियंस को तैनात किया गया है। बता दें कि जिस वर्कशॉप में यह काम होता है वहां के सेना के इंजीनियरों की यह जिम्मेदारी होती है कि आकस्मिक परिस्थिति में जरूरी पड़ने वाले सभी हथियारों की सर्विसिंग और मेंटेनेंस दुरुस्त रहे।

करगिल में बोफोर्स तोपों ने पाकिस्तान का भारी नुकसान किया था
1999 में पाकिस्तान के खिलाफ करगिल की जंग जिताने में भी इनकी अहम भूमिका रही थी। बोफोर्स तोपों ने बहुत ज्यादा ऊंची पहाड़ियों पर बने पाकिस्तान के बंकरों और ठिकानों को आसानी से तबाह कर दिया था। इससे पाकिस्तान की सेना को भारी नुकसान हुआ था।

भारत-चीन सीमा पर पिछले 20 दिन में 3 बार गोलियां चलीं
लद्दाख में भारत-चीन के बीच मई से तनाव बना हुआ है। 15 जून को गलवान में दोनों देशों की झड़प में भारत के 20 जवान शहीद हो गए थे। चीन के 40 से ज्यादा सैनिक मारे गए, लेकिन उसने कबूला नहीं। ताजा विवाद 29-30 अगस्त की रात से शुरू हुआ, जब चीन ने पैंगॉन्ग झील के दक्षिणी छोर की पहाड़ी पर कब्जे की कोशिश की थी, लेकिन भारतीय जवानों नाकाम कर दी। बीते 20 दिन में दोनों तरफ से 3 बार हवा में गोलियां चल चुकी हैं।

  • पहली बार: 29-31 अगस्त के बीच पैंगॉन्ग झील के दक्षिणी छोर पर।
  • दूसरी बार: 7 सितंबर को मुखपारी हाइट्स इलाके में।
  • तीसरी बार: 8 सितंबर को पैंगॉन्ग झील के उत्तरी छोर पर।

फास्ट सप्लाई के लिए मैकेनिज्म तैयार किया

  • सेना ने फॉरवर्ड लोकेशन पर बिना रुकावट और तेज सप्लाई का मैकेनिज्म डेवलप किया है। सी-17, आईएल-76 एयरक्राफ्ट रोज टेंट, कपड़े,खाने का सामान, पानी की बोतलें जैसी चीजें लेकर लद्दाख जा रहे हैं।
  • लद्दाख के अलग-अलग इलाकों में सी-17 और आईएल-76 सामान पहुंचाते हैं। वहां इन्हें आर्मी सैनिटाइज करती है और इसके बाद चिनूक हेलिकॉप्टर के जरिए इन्हें फॉरवर्ड लोकेशन पर पहुंचाया जाता है।
  • दिनभर चिनूक के जरिए विभिन्न फॉरवर्ड लोकेशन पर सप्लाई का काम चलता है। आर्मी अफसर ने न्यूज एजेंसी को बताया कि विभिन्न राज्यों से ये सामान लद्दाख लाने और फिर फॉरवर्ड लोकेशन पर भेजने में कुछ घंटों का वक्त लगता है।
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