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जिला परिषद की 1000 स्कूलें हो जाएंगी डिजिटल, साल अंत तक पूरा करने की तैयारी

BhaskarHindi.com | Last Modified - September 13th, 2018 16:08 IST

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जिला परिषद की 1000 स्कूलें हो जाएंगी डिजिटल, साल अंत तक पूरा करने की तैयारी

डिजिटल डेस्क, नागपुर। सीएसआर फंड से 10 करोड़ रुपए खर्च कर इस वर्ष जिला परिषद के और 250 स्कूल डिजिटल किए जाएंगे। इससे पहले 750 स्कूलों को डिजिटल किया जा चुका है और वर्ष के अंत तक जिला परिषद के डिजिटल स्कूलों का आंकड़ा 1000 हो जाएगा। नागपुर जिला परिषद ने ग्राम पंचायतों के डिजिटलाइजेशन का राज्य में प्रथम सम्मान प्राप्त करने के बाद अब अपनी स्कूलों को डिजिटल करने का "मिशनमोड' कार्यक्रम शुरू किया है। जिला परिषद के 1563 स्कूल हैं। इसमें से आधे स्कूल डिजिटल किए गए हैं। इन स्कूलों में विद्यार्थियों को एलसीडी प्राजेक्टर के साथ कम्प्यूटर और मोबाइल टैब के माध्यम से विद्यार्थियों को पढ़ाया जा रहा है।

सभी स्कूलों का डिजिटलाइजेशन का लक्ष्य लेकर कदम आगे बढ़ाते हुए चालू शैक्षणिक वर्ष में 250 स्कूलों को बनाया जा रहा है। प्रगत शैक्षणिक महाराष्ट्र सरकार के निर्णय के अनुसार विद्यार्थियों के शैक्षणिक विकास का कार्यक्रम तैयार किया गया है। विद्यार्थियों के शैक्षणिक विकास की जिम्मेदारी शिक्षकों पर निश्चित की गई है। शैक्षणिक रूप से पिछड़े विद्यार्थी के विकास के लिए कृतिशील अध्ययन पद्धति अपनाकर शिक्षकों से स्वच्छ उपक्रम पर अमल करने के निर्देश शिक्षा विभाग की ओर से दिए गए हैं। जिला परिषद की ओर से स्कूलों का डिजिटलाइजेशन कर विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के प्रयास जारी है, इसके बावजूद जिला परिषद के स्कूलों में विद्यार्थियों की तेजी से कम हो रही संख्या चिंता का विषय बनी हुई है।

एक दिवसीय ग्रंथ प्रदर्शनी    
तिरपुडे समाजकार्य महाविद्यालय की ओर से ग्रंथालयशास्त्र के जनक डॉ. एस.आर. रंगनाथन की जयंती पर एक दिवसीय ग्रंथ प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। प्रदर्शनी का उद्देश्य एमएसडब्ल्यू व बीएसडब्ल्यू के प्रथम सत्र के छात्रों को ग्रंथालय में उपलब्ध विविध विषयों के ग्रंथ तथा ई-पाठ्य सामग्री की जानकारी देना था। उद्घाटन प्राचार्य डॉ. केएस पाटील ने किया। बतौर मुख्य अतिथि प्राध्यापिका डा. स्वाति धर्माधिकारी ने विद्यार्थियों को पुस्तकों का महत्व व पढ़ने की रुचि कैसे बढ़ाई जाए, इस पर मार्गदर्शन किया। छात्रों द्वारा बनाए गए पोस्टर भी प्रदर्शनी में लगाई गई। संचालन उत्तरा चौरे ने तथा आभार हेमंत खेडीकर ने माना।
 

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