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शहर में 1521 धार्मिक स्थल हैं अनधिकृत, नियमित करने मनपा सरकार को भेजेगी प्रस्ताव

BhaskarHindi.com | Last Modified - August 11th, 2018 16:48 IST

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शहर में 1521 धार्मिक स्थल हैं अनधिकृत, नियमित करने मनपा सरकार को भेजेगी प्रस्ताव

डिजिटल डेस्क, नागपुर। कोर्ट के आदेश पर शहर भर में अनधिकृत धार्मिक स्थलों को हटाने की कार्रवाई शुरू है। इस बीच जनता द्वारा अतिक्रमण हटाने का विरोध करने से राजनीतिक पार्टियों की जमीन खिसकने लगी, जिसके बाद सभी पार्टियों ने विरोध में आवाज बुलंद की। इसी बीच मनपा की आमसभा में शहर के अनधिकृत धार्मिक स्थलों को (रास्ते के बीच आने वाले स्थलों को छोड़ कर) नियमित करने का निर्णय एकमत से लिया गया।

प्रस्ताव मंजूरी के बाद अब पब्लिक यूटीलिटी (सार्वजनिक उपयोगिता) व ओपन स्पेस (खुला क्षेत्र) में बने अनधिकृत धार्मिक स्थलों को शहर विकास योजना प्रारूप (डीपी प्लान) में शामिल करने का प्रस्ताव राज्य सरकार को भेजा जाएगा। प्रस्ताव को राज्य सरकार की मान्यता जरूरी है, जिसके बाद ही यह नियमितिकरण के दायरे में आएंगे। 

नेता भी जनता के साथ 
मनपा की आमसभा में सत्तापक्ष नेता संदीप जोशी ने अनधिकृत धार्मिक स्थलों को शहर विकास योजना प्रारूप में शामिल करने के लिए सभी पार्टियों की सहमति से प्रस्ताव रखा। इसे विपक्ष के नेता तानाजी वनवे व बसपा गट नेता मोहम्मद जमाल के अनुमोदन के बाद मंजूर किया गया। गत दिनों न्यायालय ने मनपा पर नाराजगी व्यक्त करते हुए उससे शहर में अतिक्रमण कर बनाए गए धार्मिक स्थलाें के लिए एक्शन प्लान मांगा था।

21 जून को कोर्ट के आदेश के बाद मनपा ने कार्रवाई शुरू कर सड़क पर यातायात में बाधा बन रहे अतिक्रमण कर बनाए गए धार्मिक स्थलों को तोड़ने की कार्रवाई शुरू की। इसके विरोध में लोग सड़कों पर उतरने लगे। सभी पार्टियों के नेता भी साथ खड़े हो गए। 

हटाए गए धार्मिक स्थल के लिए नियम बने
कांग्रेस के वरिष्ट नगरसेवक प्रफुल्ल गुड़धे ने कहा कि मनपा के प्रस्ताव पर राज्य सरकार की मंजूरी के बाद अनधिकृत धार्मिक स्थलों को हटाया नहीं जाएगा। उस जगह पर अतिक्रमण करने पर उसे स्थायी नहीं किया जाएगा। उस धार्मिक स्थल की अतिरिक्त जगह और निर्माण कार्य की मांग का क्या करेंगे, इन सारे विषयों पर अगली आमसभा में चर्चा की जाए। वहीं इस दौरान हटाए गए धार्मिक स्थलों को दोबारा से स्थापित करने का नियम भी तय हो।

नागरिकों से मांगी जाएगी आपत्ति 
नागरिकों द्वारा जताए जा रहे विरोध के बाद सभी पार्टियों ने मिलकर यह प्रस्ताव शुक्रवार को मनपा सभा में रखा। प्रस्ताव मंजूरी के बाद अब इस पर नागरिकों से सूचना व आपत्ति मंगवाई जाएगी और उस पर सुनवाई की जाएगी। यह प्रस्ताव राज्य सरकार को मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। अनुमति मिलने पर धार्मिक स्थलों को वहीं रखा जाएगा। यहां आपको बता दें कि शहर में 2009 के पहले 1521 व 2009 के बाद 55 अनधिकृत धार्मिक स्थल मनपा ने पंजीकृत किए। इसमें 17 अति प्राचीन स्थल थे, जो (अ) श्रेणी में होने के कारण नियमित किए गए। 175 धार्मिक स्थल 1 मई 1960 के पहले के हैं।

धार्मिक स्थल दो श्रेणियों में विभाजित 
मनपा द्वारा कोर्ट में दिए गए अनधिकृत धार्मिक स्थलों के ब्योरे के अनुसार मनपा ने शहर का सर्वे किया है, जिसमें 1521 धार्मिक स्थल अनधिकृत मिले। इन्हें (ए) और (बी) दो श्रेणियों में विभाजित किया है। ए-श्रेणी के 18 अनधिकृत धार्मिक स्थल ऐसे हैं, जिनसे जनता की भावनाएं जुड़ी हई हैं और इनसे कोई नुकसान नहीं होने के कारण पुलिस ने उन्हें नियमित करने की रिपोर्ट मनपा को दी है, लेकिन बी-श्रेणी के 1503 अतिक्रमण ऐसे हैं, जिनसे शहर में यातायात और विकास कार्यों को व्यवधान पहुंच रहा है और उन्हें हरगिज नियमित नहीं किया जा सकता। वहीं कुल 475 अतिक्रमण सड़क पर हैं, जिससे परेशानी बढ़ी है। 1028 अतिक्रमण खुले मैदन में हैं।  इसमें से 193 अतिक्रमण वर्ष 1960 के पहले के हैं, 1311 अतिक्रमण वर्ष 1960 के बाद स्थापित हुए हैं। 193 अतिक्रमण के खिलाफ जारी कार्रवाई पर आक्षेप लिए जाने के बाद उनका फैसला राज्य स्तरीय समिति के पास विचाराधीन है। शेष के खिलाफ मनपा की कार्रवाई जारी है। 

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