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वर्धा-यवतमाल-नांदेड रेल मार्ग के लिए 26 करोड़ मंजूर, अब जिलाधिकारियों को चारा छावनी के लिए लेनी होगी इजाजत

February 13th, 2019 21:36 IST
वर्धा-यवतमाल-नांदेड रेल मार्ग के लिए 26 करोड़ मंजूर, अब जिलाधिकारियों को चारा छावनी के लिए लेनी होगी इजाजत

डिजिटल डेस्क, मुंबई। वर्धा-यवतमाल-नांदेड के नए रेलमार्ग के लिए राज्य सरकार ने अपने हिस्से के रूप में 26.05 करोड़ रुपए की निधी और मंजूर कर दी है। बुधवार को गृहविभाग ने इससे जुड़ा शासनादेश जारी किया है। बता दें कि इस नए रेल मार्ग का कुल अंदाजित खर्च 2501.05 करोड़ रुपए है। इसमें से 60 फीसदी खर्च केंद्र सरकार और 40 फीसदी राज्य सरकार को देना है। राज्य सरकार को परियोजना के खर्च के रुप में कुल 1000.42 करोड़ रुपए रेलवे बोर्ड को देने हैं। पिछले साल मार्च तक रेलवे इस परियोजना पर 603.67 करोड़ रुपए खर्च कर चुका है जबकि मार्च 2019 तक 79 करोड़ रूपए और खर्च होने का अनुमान है। वित्तवर्ष 2017-18 तक राज्य सरकार ने परियोजना के लिए 254.06 करोड़ रुपए निधी उपलब्ध कराई थी। जबकि मौजूदा वित्त वर्ष के दौरान 175 करोड़ रुपए का आवंटन किया गया है। अब राज्य सरकार ने परियोजना खर्च के अपने हिस्से के रूप में और 26.05 करोड़ रुपए को मंजूरी दी है।   

नागपुर के कामठी स्थित खेडी-सोनेगांव के लिए 1.93 करोड़

नागपुर के कामठी तहसील के बाढ़ प्रभावित गांव खेडी और सोनेगांव राजा में मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए 1 करोड़ 93 लाख 41 हजार रुपए की निधि मंजूर की गई है। नागपुर के विभागीय आयुक्त कार्यालय को बजट वितरण प्रणाली के माध्यम से उपलब्ध कराई जाएगी। बुधवार को राज्य सरकार के राजस्व विभाग ने इस संबंध में शासनादेश जारी किया। इसके अनुसार सरकार ने बाढ़ प्रभावित पुनर्वसित गांव खेडी और सोनेगांव राजा में नागरी सुविधाओं को उपलब्ध कराने के लिए मंजूरी दी थी। उस समय 78 लाख 3 हजार रुपए दिए गए थे।

राजस्व मंडल में शुरु हो सकेगा एक से अधिक चारा छावनी 

प्रदेश में जानवरों के लिए नई चारा छावनी शुरू करने की मंजूरी देते समय जिलाधिकारियों को अब संबंधित पालक मंत्रियों से सहमति लेनी पड़ेगी। जिलाधिकारी एक राजस्व मंडल में एक से अधिक चारा छावनी शुरू करने की कार्यवाही कर सकेंगे। सरकारी अनुदान के बगैर चलने वाले स्वयंसेवी संस्थाओं की चारा छावनी में जानवरों की संख्या की अधिकतम सीमा नहीं रहेगी। राज्य सरकार ने चारा छावनी शुरू करने की नीति में संशोधन करने का फैसला किया है।  बुधवार को इससे संबंधित शासनादेश राजस्व विभाग ने जारी किया। इसके अनुसार एक राजस्व मंडल में एक से अधिक चारा छावनी शुरू होने के बाद भी संबंधित राजस्व मंडल के अन्य गांवों में चारा छावनी शुरू किया जा सकेगा। सरकार ने जिलाधिकारियों को जिले के बड़े और छोटे पशुधन संख्या के आधार पर पशुधन के लिए विभिन्न योजनाओं के जरिए उपलब्ध होने वाले चारे के बारे में समीक्षा करने को कहा है। जिले में पशुओं की संख्या का विचार करते हुए यदि राजस्व मंडल में एक से अधिक चारा छावनी शुरू करने की जरूरत महसूस होगी तो जिलाधिकारी चारा छावनी खोलने के लिए कार्यवाही कर सकेंगे। सरकार ने प्रदेश के 26 जिलों के 151 तहसीलों के अलावा 268 राजस्व मंडलों और 931 गांवों में सूखा घोषित किया है। 

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