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इराक में 'सजा ए मौत', 38 आतंकियों को लटकाया फांसी पर

December 22nd, 2017 19:09 IST

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। ISIS और अलकायदा के 38 आतंकियों को इराक में फांसी की सजा सुनाई गई है। इन आतंकियों को सुरक्षा बलों के सदस्यों की हत्या और कार बम धमाकों के लिए यह सजा मिली है। हालांकि मानव अधिकार आयोग ने इराक में इस तरह की फांसी की सजा देने का विरोध किया है।

नसीरिया शहर की जेल में फांसी

प्रांतीय परिषद के वरिष्ठ अधिकारी दाखिल काजिम के मुताबिक कारागार प्रबंधन ने गुरुवार को 38 कैदियों को दक्षिणी इराक के नसीरिया शहर की एक जेल में फांसी दी है। कानून मंत्री हैदल अल ज़मेली के सामने ये सजा दी गई है। इन सुन्नी आतंकवादियों कासंबंध अलकायदा और दाएश (IS) से था। इससे पहले 25 सितंबर को इसी कारागार में एक साथ 42 आतंकियों को फांसी दी गई थी। 

फांसी देना दाग की तरह

इराक में मौत की सजा दिए जाने को लेकर एमनेस्टी इंटरनेशनल कई बार चिंता जता चुका है। 25 सितंबर को इसी कारागार में एक साथ 42 आतंकियों को फांसी दी गई थी। एमनेस्टी इंटरनेशनल ने इसे एक दाग की तरह बताया है। एमनेस्टी इंटरनेशनल का कहना है कि इराक में IS के खिलाफ मिली जीत पर आतंकवादियों को फांसी देना एक दाग है।

ह्यूमन राइट कमिशन की आपत्ति

मानल अधिकार आयोग ने भी इराक में आतंकवादियों को इस तरह की सजा देने पर एतराज जताया है। मानव अधिकार आयोग ने कहा कि वह इस तरह की सजा देना का विरोध करता है। ऐसी सजा को किसी भी तरह से जायज नहीं ठहराया जा सकता। 

42 आतंकियों को लटकाया था फांसी पर

आपको बतां दे कि 25 सिंतंबर के बाद आतंकियों को फांसी देने की ये सबसे बड़ी सजा है। 25 सितंबर को इसी कारागार में एक साथ 42 आतंकियों को फांसी दी गई थी   2003 में इराक के हमले के बाद, अमेरिकी प्रशासक एल पॉल ब्रेमर ने 10 जून को फांसी की सजा पर रोक लगा दी थी। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त मानव अधिकारों के उल्लंघन की दुहाई देकर ये रोक लगाई गई थी। हालांकि 8 अगस्त 2004 को इराक में दोबारा मौत की सज़ा पर से रोक हटा दी गई। 

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