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कुमारस्वामी के शपथ ग्रहण में 42 लाख खर्च, 10 लाख सिर्फ चंद्रबाबू नायडू और केजरीवाल पर

BhaskarHindi.com | Last Modified - August 10th, 2018 12:07 IST

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कुमारस्वामी के शपथ ग्रहण में 42 लाख खर्च, 10 लाख सिर्फ चंद्रबाबू नायडू और केजरीवाल पर

News Highlights

  • तेलगु देशम पार्टी के नेता नायडू पर सबसे ज्यादा 8,72,485 रुपए खर्च किए गए।
  • कुमारस्वामी के शपथ ग्रहण समारोह में देशभर से 42 नेताओं को बुलाया गया था।


डिजिटल डेस्क, बेंगलुरू। कर्नाटक के मुख्यमंत्री कुमारस्वामी के शपथ ग्रहण समारोह में नेताओं पर 42 लाख रुपए खर्च करने की बात सामने आई है। इसमें 10 लाख रुपए तो सिर्फ आंध्रप्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर खर्च किए गए। आरटीआई से हुए खुलासे के मुताबिक तेलगु देशम पार्टी के नेता चंद्रबाबू नायडू पर सबसे ज्यादा 8,72,485 रुपए और आम आदमी पार्टी के मुखिया अरविंद केजरीवाल पर 1.85 लाख रुपए खर्च किए गए। 

 

कर्नाटक में कांग्रेस और जनता दल सेक्युलर (जेडीएस) ने गठबंधन सरकार बनाई है। जेडीएस नेता एचडी कुमारस्वामी ने 23 मई 2018 को कर्नाटक के सीएम पद की शपथ ली थी। कुमारस्वामी का शपथ ग्रहण समारोह 7 मिनट तक चला था, जिसमें देशभर के 42 बड़े नेताओं को बुलाया गया था। केजरीवाल ने कर्नाटक आने से दिल्ली वापस जाने तक 71,025 रुपए खाने-पीने और 5000 रुपए बेवरेज में खर्च किए। दिल्ली सीएम 23 मई को 9.49 होटल वेस्ट एंड पहुंचे थे। उन्होंने 24 मई को 5.34 बजे चेक आउट किया था। केजरीवाल और नायडू के सोनिया गांधी, राहुल गांधी, ममता बनर्जी, अखिलेश यादव, मायावती, तेजस्वी यादव, अजीत सिंह, शरद यादव, सीताराम येचुरी, मल्लिकार्जुन खड़गे, डी राजा, नारायणसामी शामिल हुए थे। एक रिपोर्ट के मुताबिक 13 मई 2013 को सिद्दारमैया और 17 मई 2018 को बीएस येदियुरप्पा के शपथ ग्रहण समारोह में मेहमानों खर्च सरकार ने नहीं उठाया था।

 

 

अब जेडीएस को घेर रहे सभी दल
केजरीवाल के समर्थन में उतरे कर्नाटक के आप संयोजक पृथ्वी रेड्डी ने इसका दोष जेडीएस पर मढ़ा है। उन्होंने कहा कि कुमारस्वामी जेडीएस के नेता हैं, इसलिए उनकी पार्टी को बिल का भुगतान करना चाहिए था। आप प्रवक्ता अश्वथ नारायण ने कहा कि जेडीएस के खाते से 42 लाख रुपए की वसूली की जाए। राज्य सरकार की पूर्व लोकायुक्त जस्टिस संतोष हेगड़े ने कहा कि किसी को भी इस तरह जनता के पैसों की बर्बादी की इजाजत नहीं मिलनी चाहिए। इन पैसों का उपयोग राज्य के विकास के लिए किया जाना चाहिए था।

 

 

 

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