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डॉ.येवले को बर्खास्त करने हाईकोर्ट में याचिका दायर, नियुक्ति को बताया अवैध

BhaskarHindi.com | Last Modified - October 11th, 2018 13:38 IST

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डॉ.येवले को बर्खास्त करने हाईकोर्ट में याचिका दायर, नियुक्ति को बताया अवैध

डिजिटल डेस्क,नागपुर। राष्ट्रसंत तुकड़ोजी महाराज नागपुर विश्वविद्यालय के प्र-कुलगुरु डॉ. प्रमोद येवले को पद से बर्खास्त करने से जुड़ी याचिका बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर खंडपीठ में दायर की गई है। यूनिवर्सिटी के फार्मसी विभाग के पूर्व प्रमुख डॉ. नरेश गायकवाड़ ने हाईकोर्ट में यह याचिका दायर की है। मामले में याचिकाकर्ता का पक्ष सुनकर हाईकोर्ट ने प्रतिवादी राज्यपाल, नागपुर यूनिवर्सिटी कुलगुरु और डॉ. येवले का नोटिस जारी कर दो सप्ताह में जवाब मांगा है। डॉ. येवले को 25 जून 2015 को नागपुर विश्वविद्यालय का प्र-कुलगुरु नियुक्त किया गया था। 30 जून को उन्होंने पदभार संभाला।

सहसंचालक को पड़ताल के मिले थे आदेश
राज्य के तत्कालीन विश्वविद्यालय अधिनियम के तहत 15 वर्ष अध्यापन का अनुभव और प्राचार्य रह चुके व्यक्ति को प्र-कुलगुरु नियुक्त किया जाता है। डॉ. येवले वर्धा के औषधि निर्माण महाविद्यालय में वर्ष 1999 से प्राचार्य पद पर थे। उनके प्र-कुलगुरु बनने के बाद वेतनश्रेणी निश्चित करने के लिए उच्च शिक्षा सहसंचालक को प्रस्ताव भेजा गया। उच्च शिक्षा सहसंचालक ने दलील दी कि डॉ. येवले गैर-अनुदानित महाविद्यालय के प्राचार्य थे, ऐसे में उन्हें 67 हजार रुपए ही वेतन मिलना चाहिए। इसके खिलाफ डॉ. येवले ने हाईकोर्ट की शरण ली तो कोर्ट ने सह संचालक को मामले की पड़ताल करके वेतन निर्धारित करने को कहा था।

याचिकाकर्ता ने नियुक्ति को बताया अवैध
याचिकाकर्ता गायकवाड़ ने अपनी याचिका में दावा किया है कि सह संचालक ने डॉ. येवले की नियुक्ति को यूजीसी के नियमों के विरुद्ध पाया। मामले में राज्यपाल को प्रकुलगुरु के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए थी। मगर जब उन्होंने एेसा नहीं किया तो डॉ.गायकवाड़ ने राज्यपाल के पास अर्जी दायर की, जिसपर अब तक राज्यपाल ने कोई कार्रवाई नहीं की। याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका में हाईकोर्ट से प्रार्थना की है कि वे राज्यपाल को उनकी अर्जी पर जल्द से जल्द फैसला लेने के आदेश दें या फिर स्वयं डॉ. येवले की नियुक्ति को अवैध करार दें। मामले में याचिकाकर्ता की ओर से एड. फिरदौस मिर्जा ने पक्ष रखा। 

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