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होलाष्टक आज से प्रारंभ, विपरीत परिणाम लाएंगे इन 8 दिनाें के शुभ कार्य

BhaskarHindi.com | Last Modified - February 23rd, 2018 07:37 IST

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। भारतीय धर्म संस्कृति में प्रत्येक शुभ कार्य के लिए समय निर्धारित किया गया है। इस शुभकाल में प्रारंभ किया गया कार्य अवश्य ही पुण्य फलदायी एवं शुभकारी बताया गया है, किंतु इसी काल निर्धारण में ऐसा भी समय होता है जब शुभ कार्य वर्जित माने जाते हैं। एक ऐसा ही काल होता है होलाष्टक जो भारतीय धर्म एवं ज्योतिषशास्त्र में मंगल कार्यों के लिए उत्तम नही माना गया है। किसी भी परिस्थिति में ये आपके लिए बुरे परिणाम लाने वाला दुखद एवं कष्टकारी ही साबित होता है। 

ला सकता है विपरीत परिणाम

साल 2018 में होलाष्टक 23 फरवरी से प्रारंभ हो रहा है, जो कि 1 मार्च होलिका दहन के साथ समाप्त होगा। अर्थात इन दिनों में कोई भी शुभ कार्य प्रारंभ करना वर्जित होगा। ज्योतिशास्त्र के अनुसार होलाष्टक के दौराना किया गया कार्य विपरीत परिणामा लेकर आ सकता है और ये आपके लिए पीड़ादायी एवं कष्टकारी बन सकता है। विवाह विच्छेद, कलह एवं मृत्यु का कारक भी वह बन सकता है।

 

पीड़ादायी होगा इस दौरान शुरू किया शुभ कार्य
ज्योतिष की दृष्टि से होलाष्टक एक दोष माना जाता है, जिसमें किसी भी तरह का मंगल या शुभ कार्य प्रारंभ करने पर वह अत्यंत ही पीड़ादायी सिद्ध होता है। होलाष्टक के आठ दिन किसी भी ऐसे कार्य करने के लिए पूर्णत अशुभ माने जाते हैं, जो आपके जीवन में मंगलकारी माने गए हैं। 

गलती से भी ना करें ये कार्य

नामकरण, विवाह की चर्चाएं, मुंडन, हवन, विवाह, गृह शांति, गर्भाधान, गृह प्रवेशा, गृह निर्माण, विद्यारंभ सहित अनेक शुभ कर्म। यदि आप चाहते हैं कि आपके द्वारा किया गया कार्य सुख एवं समृद्धि लेकर आए तो इन दिनों किसी भी तरह के कार्य करने से बचना चाहिए। होलाष्टक समाप्त होते ही धुरेड़ी अर्थात रंगों के त्योहार का प्रारंभ होगा। फाल्गुन माह में होलिका दहन के पश्चात रंग-गुलाल की होली होगी, एवं शुभ घड़ी पुनः प्रारंभ होगी। 

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