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घोटालेबाज डीई रौतेल निलंबित, डीएमएफ फंड से विद्युतीकरण मामले में हुई कार्रवाई

January 13th, 2018 21:35 IST
घोटालेबाज डीई रौतेल निलंबित, डीएमएफ फंड से विद्युतीकरण मामले में हुई कार्रवाई

  डिजिटल डेस्क सिंगरौली (वैढऩ)। मप्र पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के सिंगरौली ग्रामीण क्षेत्र के कार्यपालन अभियंता मनोज कुमार रौतेल को निलंबित कर दिया गया है। शुक्रवार को इस संबंध में मप्रपूक्षेविविकं के मुख्य मानव संसाधन एवं प्रशासन महाप्रबंधक द्वारा श्री रौतेल का निलंबन पत्र जारी किया। पत्र में निलंबन का कारण बताते हुये कहा गया कि श्री रौतेल पर वित्तीय अनियमितता करने, अपूर्ण कार्यों के देयक का भुगतान करने, गुणवत्ताहीन विद्युतीकरण कार्य करने और विद्युतीकरण के स्वीकृत से कम कार्य कराना पाया गया है। जिससे कंपनी द्वारा उन्हे निलंबित करने का निर्णय लिया गया है। साथ ही श्री रौतेल को निलंबन अवधि दौरान तक के लिये मुख्य अधीक्षण अभियंता, संचालन एवं संधारण वृत्त छतरपुर कार्यालय के लिये अटैच किया गया है इस दौरान इन्हे जीवन निर्वाह का भत्ता देने की पात्रता दी गई है। खास बात यह भी है कि डीई ग्रामीण श्री रौतेल पर हुई इस कार्रवाई की खबर निलंबन पत्र आने के पहले ही शुक्रवार को स्थानीय बिजली कंपनी कार्यालय में पहुंच गई। जिससे हडक़ंप मच गया था और इस संबंध में कोई भी अधिकारी-कर्मचारी खुलकर कुछ भी बोलने को तैयार नहीं था। हालांकि दबी जुबान में ज्यादातर कर्मचारी वर्ग खुशी जाहिर कर रहा था। बताया जाता है कि श्री रौतेल की कार्यशैली को लेकर कर्मचारी वर्ग में काफी रोष भी व्याप्त था, ऐसे में हो न हो कर्मचारियों की दबी मुस्कान की बड़ी वजह होगी।
इन कार्यो में की थी अनियमितता
बताया जाता है कि श्री रौतेल के खिलाफ की गई शिकायत में आरोप लगाया गया था कि उन्होंने डीएमएफ के 20 करोड़ की राशि का विद्युतीकरण कार्य बिना ऑनलाइन प्रक्रिया के अपने चहेते ठेकेदारों को दे दिया था। जिसमें उस दौरान तत्कालिक कलेक्टर का नाम काफी जोर-शोर से उछला था। शिकायत में कहा गया था कि डीई रौतेल ने डीएमएफ के फंड में से 3 करोड़ रूपये का भुगतान उस एक ठेकेदार को कर दिया था जिसने विद्युतीकरण का कोई कार्य तक नहीं कराया था। आरोप है कि इसके एवज में उन्होंने खासी मोटी रकम भी ली थी। जबकि अन्य ठेकेदारों द्वारा किये गये कार्यो को भी उन्होंने गलत तरीके से गुणवत्तापूर्ण कार्य करने का सर्टिफिकेट दे दिया था, जो गलत था। डीई रौतेल के इन सभी अनियमिततापूर्ण कार्यो की लगातार शिकायत शुरूआत से ही की जा रही थी।
लगातार की गई शिकायत
बताया जाता है श्री रौतल जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में विद्युतीकरण कार्यो के नाम पर इतने व्यापक स्तर पर अनियमितता कर चुके हैं कि उसकी गूंज कंपनी मुख्यालय से लेकर मुख्यमंत्री, लोकायुक्त और पीमएओ तक पहुंच चुकी थी। श्री रौतेल की अनियमितताओं की शिकायत कंपनी के कर्मचारी एवं मप्र विद्युत कर्मचारी संघ के प्रांतीय उपाध्यक्ष नरेन्द्र मिश्रा द्वारा की कई बार हर स्तर पर की गई थी। जिसमें डीएमएफ के 20 करोड़ की राशि से विद्युतीकरण कार्य के नाम पर की गई लूटखसोट की पहली शिकायत अप्रैल 2017 में श्री मिश्रा ने की थी।
चार माह पहले पूर्ण हो चुकी थी जांच
बताया जाता है कि डीई रौतेल के घोटाले की जांच कंपनी के एक अधीक्षण यंत्री और 3 कार्यपालन यंत्री की टीम कर रही थी जिसने जांच पूर्ण करके करीब चार माह पूर्व ही रिपोर्ट मुख्यालय जबलपुर को सौंप दी थी। लेकिन इसके बाद डीई रौतेल और उनके हमदर्द बने जनप्रतिनिधियों के दवाब से रिपोर्ट को ठंडे बस्ते में डालने का भी प्रयास किया जाता रहा। लेकिन मामले को लेकर आखिरी शिकातय जो पीएमओ को श्री मिश्रा द्वारा की गई तो उसके बाद फिर से मामले को लेकर हलचल शुरू हो गई थी और अब जारी हुये निलंबन आदेश को उसी का नतीजा बताया जा रहा है।
देवसर-चितरंगी की जांच है प्रस्तावित
मामले को लेकर बताया जाता है कि डीई रौतेल पर जो कार्रवाई हुई है वह 20 करोड़ में 3 करोड़ की भुगतान की गई राशि की है जो कि वैढऩ ब्लॉक क्षेत्र की है। ऐसे में बाकी राशि के देवसर व चितरंगी ब्लॉक क्षेत्रों से जुड़े हैं। जिसकी जांच भी अभी प्रस्तावित है। सूत्र बताते हैं डीई रौतेल पर हुई इस कार्रवाई से मामले में फंसे ठेकेदारों के भी होश उड़े हुये हैं और वह अपना भुगतान निकलवाने की फिराक में है।
लोकायुक्त में एफआईआर दर्ज कराने की मांग
मामले की शिकायत करके अनियमितता सामने लाने वाले श्री मिश्रा का कहना है अभी वह इस मामले को लेकर लोकायुक्त पुलिस में एफआईआर दर्ज कराने की मांग करेंगे ताकि, इस भष्टाचार की जड़ खोदी जा सके।

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