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जय जगत पैदल यात्रा 2 अक्टूबर से, दुनिया को बचाने के लिए भारत समेत 14 देश निकले

जय जगत पैदल यात्रा 2 अक्टूबर से, दुनिया को बचाने के लिए भारत समेत 14 देश निकले

डिजिटल डेस्क, नागपुर। हिंसा, गरीबी, सामाजिक बहिष्कार, जलवायु परिवर्तन पूरे विश्व की बड़ी समस्या हैं। इसके अनेक कारण हैं। अहिंसा के अर्थशास्त्र से इन समस्याओं काे जड़ से मिटाया जा सकता है। जय जगत पैदल यात्रा के माध्यम से विश्व को यह संदेश देने का सौभाग्य भारत को मिला है। 2 अक्टूबर 2019 को राजघाट दिल्ली से यात्रा का शुभारंभ होगा, जो  2 अक्टूबर 2020 काे जिनेवा पहुंचेगी। यूनाइटेड नेशन जनरल से इस यात्रा को हरी झंडी मिलने की जानकारी जय जगत यात्रा के इंटरनेशनल एडवाजर कमेटी मेंबर राजगोपाल पीवी ने साझा की।

व्यवसाय बढ़ाने हिंसा को बढ़ावा

राजगोपाल पीवी ने कहा कि हथियार बनाने वाली कंपनियां हिंसा को बढ़ावा दे रहीं है। स्कूलों में सीएसआर फंड लगाकर विद्यार्थियों में हिंसा के बीज बोए जा रहे हैं। अपने व्यवसाय को बाजार उपलब्ध कराने का यह हथकंडा है। महात्मा गांधी के अहिंसावादी विचारों का कुप्रचार इसी साजिश का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि हिंसा को बढ़ावा मिलने की एक बड़ी वजह गरीबी भी है। आर्थिक विषमता इसकी मुख्य वजह है। अमीर और गरीबों के बीच संघर्ष से हिंसा को बढ़ावा मिल रहा है। विश्व के अनेक देश इस समस्या से जूझ रहे हैं। इस समस्या पर शांति परिषद में विश्वव्यापी समाधान ढूंढ़ा जाएगा।

जलवायु परिवर्तन का संदेश

जानकारों का मानना है कि 10 वर्ष में दुनिया का विनाश हो जाएगा। अपने लाभ के लिए प्रकृति से छेड़छाड़ करने वाला इंसान इसके लिए पूरी तरह जिम्मेदार है। इस खतरे से बचने के लिए जय जगत यात्रा विश्व को जलवायु परिवर्तन का संदेश देगी।

शिक्षा पद्धति में बदलाव जरूरी  राजगोपाल पीवी का कहना है कि विश्वव्यापी इन समस्याओं को जड़ से मिटाने के लिए शिक्षा पद्धति में परिवर्तन जरूरी है। जय जगत यात्रा के माध्यम से विश्व स्तर पर यह मुहिम छेड़ी जाएगी।

विश्वस्तर पर संवाद स्थापित करने का प्रयास

जय जगत यात्रा महात्मा गांधी की 150वीं जयंती पर 2 अक्टूबर 2019 को राजघाट दिल्ली से शुरू होगी। 2 अक्टूबर 2020 को जिनेवा पहुंचेगी। भारत से पाकिस्तान तक 200 लोग इस यात्रा में शामिल होंगे। पाकिस्तान से 150 लोगों का काफिला आगे बढ़ेगा। जैसे-जैसे आगे बढ़ेंगे, अन्य देशों के लोग जुड़ते जाएंगे। भारत से स्वीट्जरलैंड पहुंचने तक रास्ते में 14 देश के नागरिक इस यात्रा से जुड़ेंगे। रास्ते में 8 शांति परिषदें होंगी। जिनेवा में िवविध कार्यक्रम के माध्यम से िवश्व में अहिंसा की पैरवी करने वाले सामाजिक संगठनों को एकजुट कर संयुक्त राष्ट्र संस्थानों के साथ संवाद स्थापित किया जाएगा।

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