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Election 2019

मॉडरेशन पॉलिसी से बिगड़ा एडमिशन का समीकरण

मॉडरेशन पॉलिसी से बिगड़ा एडमिशन का समीकरण

डिजिटल डेस्क, नागपुर।  सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकंडरी एजुकेशन बोर्ड ने 2 मई को 12वीं कक्षा के बोर्ड परिणाम जारी किए। अब परिणामों से असंतुष्ट विद्यार्थी अपील दायर कर रहे हैं। 3 से 8 मई तक मार्क्स वेरिफिकेशन के आवेदन स्वीकारे गए, वहीं 20 और 21 मई को आवेदन करके उत्तर पुस्तिका की फोटो कॉपी प्राप्त की जा सकती है। 24 और 25 मार्च को रि-वैल्यूएशन के लिए आवेदन किए जाएंगे, लेकिन परिणामों में असंतुष्टि का हर समाधान विद्यार्थियों के पास मौजूद नहीं है। सीबीएसई की मॉडरेशन पॉलिसी को लेकर फिर एक बार नाराजगी और विवाद बढ़ गया है। दावा किया जा रहा है कि इस साल अपनाए गए मॉडरेशन के कारण कॉलेज एडमिशन का समीकरण बिगड़ सकता है।  सीबीएसई मॉडरेशन पॉलिसी के तहत विद्यार्थियों को कठिन प्रश्नों के एवज में कुछ अतिरिक्त अंक दिए जाते हैं। 

विवादित है पॉलिसी
मॉडरेशन पॉलिसी सीबीएसई की एक विवादित पॉलिसी है, जिसके कारण मूल्यांकन में भेदभाव के आरोप लगते हैं। हालांकि सीबीएसई ने इसे बंद करने की घोषणा की थी, लेकिन पिछले वर्ष हाईकोर्ट के आदेश के बाद सीबीएसई ने इसे जारी रखा। 

इस साल के नतीजों पर ऐसा असर
इस साल जारी नतीजों में विशेषज्ञ दावा कर रहे हैं कि सीबीएसई ने 12वीं कक्षा के मूल्यांकन में मॉडरेशन पॉलिसी अपनाते हुए गणित और अकाउंटेंसी जैसे विषयों में विद्यार्थियों के अनावश्यक अंक बढ़ाए हैं। 

गणित विषय में सर्वाधिक विद्यार्थियों को 95 अंक दिए गए हैं। इसमें ऐसे भी विद्यार्थी शामिल हैं, जिनके अंक 85 से 90 के पास थे। हां, जिन विद्यार्थियों को वाकई 95 अंक मिले, उनकी कोई वृद्धि नहीं हुई। गणित में विद्यार्थियों को 95, 45 या फिर 35 अंकों पर पहुंचाया गया है। 

इसी तरह अकाउंटेंसी विषय में भी कई विद्यार्थियों को 95 अंक दिए गए हैं। इसके अलावा कम अंक वाले विद्यार्थियों को 40 और 55 अंकों के ग्राफ तक पहुंचाया गया है। ऐसे में यह मुद्दा उठा रहा है कि कॉलेजों में प्रवेश के लिए जहां कट ऑफ बढ़ता जा रहा है। होनहार विद्यार्थियों की भी प्रतिस्पर्धा बढ़ती जा रही है। 

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