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चारपाई बनी एम्बुलेंस, गंभीर हालत में जच्चा-बच्चा को लादकर पैदल अस्पताल पहुंचे परिजन

BhaskarHindi.com | Last Modified - November 08th, 2018 23:15 IST

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चारपाई बनी एम्बुलेंस, गंभीर हालत में जच्चा-बच्चा को लादकर पैदल अस्पताल पहुंचे परिजन

डिजिटल डेस्क, गड़चिरोली। नक्सल प्रभावित इलाकों में बुनियादी सुविधाओं के दावे उस वक्त हवा होते दिखे, जब डिलेवरी के बाद गंभीर हालत में महिला को चारपाई पर लादकर पीड़ित परिवार अस्पताल पहुंचा। इस दौरान काफी लंबा रास्ता पैदल ही तय करना पड़ा। पीड़ित महीला छत्तीसगढ़ के मिचगांव की रहने वाली है। उसका नाम संकुती जहरसाई एक्का है, जो प्रसूती के लिए अपने मायके चामोर्शी के सोमनपल्ली आई थी।

गांव की आशा वर्कर और पावीमुरांडा स्वास्थ्य उपकेंद्र की महिला कर्मचारी गर्भवती के इलाज में मदद कर रही थी। मंगलवार को जब उसे पेट में दर्द हुआ तो घर में ही उसकी डिलेवरी कराई गई। महिला ने बेटी को जन्म दिया, लेकिन खून ज्यादा बहने से उसकी हालत बिगड़ने लगी। जान बचाने के लिए जच्चा-बच्चा दोनो को अस्पताल भर्ती करना जरूरी था। परिजन ने उसे अस्पताल ले जाने की तैयारी शुरू कर दी, लेकिन सोमनपल्ली-पावीमुरांडा मार्ग के नाले पर पुलिया नहीं होने के कारण वहां कोई वाहन नहीं पहुंच पा रहा था। ऐसे में परिजन और स्वास्थ्य कर्मचारियों ने महिला और नवजात को चारपाई पर लिटाया और काफी लंबा पैदल सफर किया।

नाला पार करने के बाद वाहन ही सहायता से दोनों को स्वास्थ्य उपकेंद्र ले जाया गया। तस्वीर में आप देख सकते हैं कि महिला की चारपाई को बल्ली के सहारे से उठाया गया है। साथ ही महिला स्वास्थ्यकर्मी ने सिलाइन की बॉटल हाथ में पकड़ रही है। यह नजारा देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि अभी भी कई इलाकों में बुनियादी सुविधाओं का खासा टोटा है। वहां लोग जुगाड़ की जुगत से जी रहे हैं। महिला की हालत गंभीर होने के कारण उसे गड़चिरोली के महिला व बाल अस्पताल में लाया गया। जहां उपचार शुरु कर दिया गया। इसके बाद दोनो की हालत में सुधार बताया जा रहा है।

यदि महिला के परिजन और स्वास्थ्यकर्मी तत्परता नहीं दिखाते, तो शायद जान पर बन सकती थी। इससे पहले भी ऐसी कई घटनाएं उजागर हुई हैं। इसके बावजूद प्रशासन के कान पर जूं तक नहीं रेंग रही। 

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