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चुनाव: 1947 से लेकर अब तक बने वो नारे, जो लोगों की जुबां पर ठहर गए

चुनाव: 1947 से लेकर अब तक बने वो नारे, जो लोगों की जुबां पर ठहर गए

हाईलाइट

  • आपातकाल में भी नारों के माध्यम से विरोध किया गया
  • हर चुनाव में कुछ ऐसे नारे सामने आ जाते हैं
  • चुनाव की जीत-हार में भी निभाते हैं भूमिका

डिजिटल डेस्क, भोपाल। भारत में चुनाव और नारों का इतिहास काफी पुराना है। आजादी से लेकर अब तक हर चुनाव में कुछ ऐसे नारे सामने आ ही जाते हैं, जो लोगों के जहन में लंबे समय के लिए अपनी छाप छोड़ देते हैं। चुनाव होता है और उससे पहले प्रचार, सरकारें आती हैं और चली जाती हैं, लेकिन कुछ कलजयी नारे हर चुनाव में लोगों का दिल जीत ले जाते हैं। आइए जानते हैं ऐसे नारों को, जिन्होंने 1947 लेकर अब तक हुए चुनाव में जीत और हार तक का निर्धारण करने में भूमिका निभाई है।

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