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VIDEO : अगस्तेश्वर महादेव, यहां हवाओं में भी सुनाई देता है 'ॐ नमः शिवाय'

BhaskarHindi.com | Last Modified - November 15th, 2017 09:30 IST

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डिजिटल डेस्क, उज्जैन। महाकाल की नगरी में हर ओर मंदिर देखने मिलते हैं। जहां महादेव साक्षात विराजमान हैं। ऐसे 84 मंदिर यहां हैं जहां महादेव अपने विरल स्वरूप में विराजमान हैं। यही वजह है कि इसे मंदिरों का शहर या पवित्र नगरी भी कहा जाता है। वैसे तो सृष्टि के कण-कण में महादेव विराजे हैं, लेकिन इस नगर में हर ओर महादेव का बसेरा देखने मिलता है। ये भी मान्यता है कि यहां की हवाओं में ओम नमः शिवाय की गूंज सुनाई देती है। आज हम आपको एक ऐसे ही मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसे अगस्तेश्वर महादेव के नाम से जाना जाता है। यह मंदिर संतोषी माता मंदिर परिसर में  माता हरसिद्धि मंदिर के पीछे स्थित है। 


प्रचलित है ये कथा

पौराणिक ग्रंथों में उल्लेख के अनुसार एक बार जब राक्षसों ने देवताओं पर विजय प्राप्त कर ली तो वे निराश हो गए और कहीं आसिरा ना पाकर पृथ्वी पर भ्रमण करने लगे। तभी वन में भटकते हुए एक दिन उन्होंने अगस्तेश्वर तपस्वी को देखा जो कि सूर्य के समान तेजस्वी थे। इनकी आभा चारों दिशाओं में फैल रही थी। 

देवता अपनी दशा पर दुखी थे, अगस्त्य ऋषि देवताओं के हाल को देखकर क्रोधित हुए। तभी उनके शरीर से क्रोध स्वरूप एक ज्वाला उत्पन्न हुई और स्वर्ग पर आधिपत्य जमाए बैठे दानव जलकर गिरने लगे। इससे भयभीत होकर ऋषि आदि पाताल चले गए।  अगस्त्य ऋषि इससे दुखी हुए।  ब्रम्हाजी के पास जाकर उन्होंने अपनी व्यथा सुनाई और कहा, मैंने ब्रम्ह हत्या की हैै मेरा उद्धार करो।

ब्रह्मदेव ने उन्हें बताया कि महाकाल वन के उत्तर में वट यक्षिणी के पास उत्तम लिंग है। उनकी आराधना करो इससे तुम पाप से मुक्त हो जाओगे। ब्रह्माजी के कथन पर अगस्त्य ऋषि ने तप कर महाकाल को प्रसन्न कर दिया। उन्होंने अगस्त्य ऋषि को वरदान दिया कि यह शिवलिंग अब तुम्हारे नाम पर ही पूजा जाएगा। तीनों लोगों में इसकी ख्याति अगस्त्य महादेव के नाम से होगी। जो मनुष्य भावभक्ति से अगस्तेश्वर का दर्शन करेगा उसे पापों से मुक्ति मिलेगा और वह उत्तम धाम को प्राप्त होगा। उसकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होंगी। इसी प्रकार काशी यात्रा के दाैरान भी अगस्त्य महादेव के दर्शन हाेते हैं।

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