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अजब-गजब : इस रेस्टोरेंट में खाने के नहीं लगते पैसे

BhaskarHindi.com | Last Modified - July 25th, 2018 09:06 IST

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डिजिटल डेस्क । भारत में जब से गुड्स एंड सर्विसेस टैक्स (GST) टैक्स प्रणाली लागू हुई है, तब से ही रेस्टोरेंट्स में खाना महंगा हो गया है। इसलिए अब कोई भी खाना खाने के लिए बाहर जाने से बचता है। अब तो लोगों को घर की दाल रोटी ही सुहाती है। खास कर मिडिल क्लास फैमिली के लिए तो एसी रेस्टोरेंट में बैठकर इत्मिनान से खाना खाना सपना ही रह गया है, लेकिन अगर आपको पता चले कि आप रेस्टोरेंट्स में खाना खाने जाएं और आपको बिल ना देना पड़े तो शायद आप यकीन नहीं करेंगे, लेकिन यकीन मानिए दुनिया में एक रेस्टोरेंट ऐसा है जहां खाना खाने के बाद बिल नहीं देना पड़ता। भारत में तो फ्री का खाना, किसी के घर, शादी-ब्याह या लंगर में ही मिलता है। इसलिए रेस्टोरेंट में खाना फ्री में खाने की बात हजम करना जरा मुश्किल होता है। बिना बिल चुकाए भला कोई रेस्टोरेंट खाना खिलाता है। आपका पहला और शायद आखिरी जवाब होगा, कतई नहीं। भला ये कैसे हो सकता है कि पेट भर के खाएं और वो भी बिना बिल भरे और ऐसा होता है हमारे ही देश में। जी हां गुजरात के अहमदाबाद शहर में गुजराती सेवा कैफे में आप फ्री में खाना खा सकते है। वहां जमकर खाना खाइए और वो भी बिना बिल पे किए हुए, क्योंकि आपका लंच या डिनर एक तोहफा है, किसी अनजान शख्स की तरफ से।

''मूव्ड बॉय लव" वालंटियर के लिए इमेज परिणाम

पिछले 11 सालों से सेवा कैफे इसी तरह से काम कर रहा है। एक तरफ जहां दुनिया पैसे और धंधे के पीछे भाग रही है, वहीं मानव सदन, ग्राम श्री और स्वच्छ सेवा जैसे एनजीओ मिलकर सेवा कैफे चला रहे हैं। ये सेवा कैफे गिफ्ट इकॉनमी के मॉडल पर काम करता है।

Gujarati service café free food के लिए इमेज परिणाम

गिफ्ट इकॉनमी का मतलब होता है कि ग्राहक अपनी इच्छानुसार पे करते हैं, जिसके एवज में किसी अन्य ग्राहक को फूड सर्व किया जाएगा। कैफे के संचालक बताते हैं कि इसे वालंटियर्स मिलकर चलाते हैं और हर आने वाले को प्रेम से खाना खिलाते हैं। इसलिए सेवा कैफे में किसी भी तरह का बिल नहीं लिया जाता, बल्कि गिफ्ट इकॉनमी को ही आगे बढ़ाने पर जोर दिया जाता है।

''मूव्ड बॉय लव" वालंटियर के लिए इमेज परिणाम

यहां के वालंटियर्स खुद को ''मूव्ड बाय लव" वालंटियर कहते हैं और इन वालंटियर्स को सेवा के बदले कैफे की तरफ से तरह-तरह के तोहफे भी मिलते रहते हैं। सेवा कैफे में पहली बार आने वाले कई लोग इस नये मॉडल को नहीं समझ पाते हैं और बिना पेमेंट या फिर कम पेमेंट करने का मूड बनाते लेते हैं। मगर कैफे के माहौल और वालंटियर्स की लगन को देखकर कुछ ज्यादा ही पैसे देकर चले जाते हैं।


कैफे की एक वालंटियर बताती हैं कि जब वे पहली बार अपने दोस्तों के साथ सेवा कैफे आईं थीं, तो उन्होंने सोचा था कि खाने के बाद टेबल पर खाली लिफाफा छोड़ देंगी। मगर कैफे के सेवा भाव को देखकर कुछ ज्यादा ही पैसे लिफाफे में रख कर चली गईं। सेवा कैफे गुरुवार से रविवार शाम 7 से रात 10 बजे तक खुला रहता है या जब तक 50 मेहमानों को खाना न खिला दिया जाए।

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