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चारों जजों को पद पर रहने का अधिकार नहीं: प्रेस कॉन्फ्रेंस में बोले रिटायर्ड जज

BhaskarHindi.com | Last Modified - January 12th, 2018 16:02 IST

चारों जजों को पद पर रहने का अधिकार नहीं: प्रेस कॉन्फ्रेंस में बोले रिटायर्ड जज


डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट के 4 जजों की तरफ से प्रेस कॉन्फ्रेंस करने के बाद दिल्ली हाईकोर्ट से रिटायर्ड जज आरएस सोढ़ी ने कहा है कि 'इन चारों जजों को अब पद पर रहने का कोई अधिकार नहीं है। इन चारों को महाभियोग लाकर पद से हटा देना चाहिए।' इसके अलावा जस्टिस आरएस सोढ़ी ने सुप्रीम कोर्ट के जजों का इस तरह से मीडिया के सामने आने को भी गलत बताया है। बता दें कि जस्टिस जे. चेलामेश्वर, जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस मदन लोकुर और जस्टिस कुरियन जोसेफ ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी, जिसमें उन्होंने चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा पर कई आरोप लगाए हैं।


चारों जजों को फैसला देने का कोई हक नहीं

दिल्ली हाईकोर्ट से रिटायर्ड जज आरएस सोढ़ी ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि 'इनके खिलाफ महाभियोग चलाया जाना चाहिए, अब इन लोगों को वहां बैठकर फैसला देने का हक नहीं बनता है। ये ट्रेड यूनियनिज्म गलत है। लोकतंत्र खतरे में है ऐसा उन्हें नहीं कहना चाहिए, हमारे यहां संसद है, कोर्ट और पूरी पुलिस प्रणाली काम कर रही है।' इसके आगे जस्टिस आरएस सोढ़ी ने ये भी कहा कि 'ये कोई मसला नहीं है। उनकी शिकायत प्रशानिक मुद्दों पर है। वो सिर्फ 4 जज है, वहां 24 और भी जज हैं। 4 जज एक साथ आ जाते हैं और चीफ जस्टिस को गलत तरीके से पेश करते हैं। यह पूरी तरह से अपरिपक्व और बचकानी हरकत है।'

यह भी पढ़ें : कौन हैं वो 4 जज, जिन्होंने उठाए चीफ जस्टिस पर सवाल?

स्वामी ने की पीएम से दखल देने की मांग

वहीं बीजेपी के सीनियर लीडर और राज्यसभा सांसद सुब्रह्मण्यम स्वामी ने भी इस मसले पर पीएम मोदी से दखल देने की मांग की है। स्वामी ने कहा कि 'हम उन जजों की आलोचना नहीं करते। वो सभी बड़े ईमानदार व्यक्ति हैं। वो चाहते तो सीनियर एडवोकेट रहते काफी पैसा कमा सकते थे। हमें उनका सम्मान करना चाहिए। प्रधानमंत्री को ये सुनिश्चित करना चाहिए कि चारों जजों, सीजेआई और पूरे सुप्रीम कोर्ट को एक राय पर आना चाहिए और आगे काम करना चाहिए।'

ज्यूडीशयरी के लिए काला दिन

इसके अलावा सीनियर एडवोकेट उज्जवल निकम ने आज के दिन को ज्यूडीशियरी के लिए काला दिन बताया है। उज्जवल निकम ने कहा कि 'आज का दिन ज्यूडीशियरी के लिए काला दिन है। आज की प्रेस कॉन्फ्रेंस से एक खराब इमेज बनेगी। अब हर आम नागरिक सुप्रीम कोर्ट के आदेश को शक की तरह देखेगा। हर फैसले पर लोग सवाल उठाएंगे।' वहीं हाईकोर्ट से रिटायर्ड जज मुकुल मुद्गल ने कहा है कि 'अगर उन जजों ने कहा है कि उनके पास प्रेस कॉन्फ्रेंस के अलावा और कोई रास्ता नहीं था, तो फिर इसके पीछे कोई गभीर कारण होगा।'

पहली बार सुप्रीम कोर्ट के जजों ने की प्रेस कॉन्फ्रेंस

देश के इतिहास में पहली बार शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट के 4 जजों ने प्रेस कॉनफ्रेंस की। इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में जस्टिस जे चेलामेश्वर, जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस मदन लोकुर और जस्टिस कुरियन जोसेफ ने मीडिया से बात की। इस दौरान जस्टिस चेलामेश्वर ने कहा कि 'सुप्रीम कोर्ट का प्रशासन ठीक तरीके से काम नहीं कर रहा है और अगर ऐसा ही चलता रहा तो लोकतंत्र खत्म हो जाएगा।' उन्होंने बताया कि इस बात की शिकायत उन्होंने चीफ जस्टिस के सामने भी की, लेकिन उन्होंने बात को नहीं माना। प्रेस कॉन्फ्रेंस में जस्टिस चेलामेश्वर ने कहा कि 'किसी भी देश के लोकतंत्र के लिए जजों की स्वतंत्रता भी जरूरी है। अगर ऐसा नहीं होता है तो लोकतंत्र नहीं बच पाएगा। हमने चीफ जस्टिस को समझाने की बहुत कोशिश की, लेकिन वो नहीं समझ पाए।' उन्होंने आगे कहा कि 'हमारे पास इसके अलावा और कोई रास्ता नहीं था, इसी कारण मजबूरी में हमें मीडिया के सामने आना पड़ा।' इसके अलावा इन चारों जजों ने चीफ जस्टिस पर ये भी आरोप लगाए कि 'चीफ जस्टिस सीनियर जजों की बात नहीं सुनते हैं।'

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