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पेरिस समझौते से हटा अमेरिका : भारत पर गहराया संकट

BhaskarHindi.com | Last Modified - July 27th, 2017 15:55 IST

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पेरिस समझौते से हटा अमेरिका : भारत पर गहराया संकट

टीम डिजिटल.नई दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का अमेरिका दौरा तय होने से पहले ही इस पर संकट गहरा गया है.दरअसल अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पेरिस जलवायु समझौते से अमेरिका को अलग करने का ऐलान कर दिया है.पेरिस जलवायु समझौते से अमेरिका के पीछे हटने से ग्लोबल वार्मिंग को कम करने और पर्यावरण संरक्षण की कोशिश को झटका लगा है. हालांकि भारत ने अमरीका के बगैर भी इस समझौते से जुड़े रहने का ऐलान किया है. अमेरिका के इस कदम का भारत पर कोई सीधा असर तो नहीं पड़ने वाला है, लेकिन इससे भारत के लिए आगे उत्सर्जन कटौती के लक्ष्य के लिए तेज कदम उठाना मुश्किल होगा, क्योंकि भारत को अब अंतरराष्ट्रीय वित्त और टेक्नोलॉजी हासिल करने में मुश्किल आएगी.

क्या है पेरिस जलवायु समझौता ?
दुनिया भर में ग्रीन हाउस गैस की मात्रा घटाने के लिए पेरिस में एक बैठक हुई थी. दिसंबर 2015 में हुई इस बैठक में 195 देशों के बीच ग्रीन हाउस गैस घटाने को लेकर सहमति बनी थी. नवंबर 2016 में ये पेरिस जलवायु समझौते के नाम से लागू हुआ. तब अमेरिका के प्रेसिडेंट बराक ओबामा थे लेकिन ट्रंप सरकार ने इस समझौते को मानने से इंकार कर दिया है.

ट्रंप ने कहा
ट्रम्प ने अपने बयान में कहा कि पेरिस डील में भारत और चीन जैसे देशों पर प्रदूषण को लेकर कोई खास सख्ती नहीं की गई है. भारत और चीन को कई सहूलियतें दी गईं. जबकि समझौते में अमेरिका के साथ भेदभाव किया गया. उन्होंने कहा, 'भारत को 2020 तक कोयला उत्पादन को दोगुना करने की अनुमति दी जाएगी, यहां तक की यूरोप को भी यह अनुमति थी. उनके मुताबिक इस डील से भारत और चीन को फायदा पहुंचाने की कोशिश की गई है और एशिया के इन दो बड़े देशों पर कड़ाई नहीं बरती गई है.

टेक्नोलॉजी संसाधन मिलने में मुश्कि
अमेरिका जिस तरह के वित्तीय और टेक्नोलॉजी संसाधन मुहैया करा सकता था, वह भारत या चीन जैसे देशों के बस की बात नहीं है. भारत ने साल 2030 तक अपने उत्सर्जन को प्रति जीडीपी ईकाई उत्सर्जन को (साल 2005 के मुकाबले) 2030 तक 35 से 33 फीसदी तक कटौती करने की बात कही है. भारत ने कहा है कि 2030 तक वह अपने कुल बिजली उत्पादन का करीब कम से कम 40 फीसदी हिस्सा जीवाश्म ईंधनों से करेगा.

PM मोदी ने दिया ट्रंप को जवाब
पेरिस जलवायु समझौते पर प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि मत सोचिए कि मैं किसी का पक्ष लूंगा लेकिन भविष्य की पीढ़ी का पक्ष जरूर लूंगा. मैं जर्मनी में पहले ही कह चुका हूं, पेरिस ऑर नो पेरिस. उन्होंने भारत को पर्यावरण शुभचिन्तक बताते हुए कहा कि यह देश प्राचीन काल से ही इस जिम्मेदारी को निभाता आ रहा है.

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