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डोकलाम विवाद : चीन सीमा पर भारतीय सैनिकों के जल्दी पहुंचने के लिए सड़क बनाने का काम तेज

November 24th, 2017 09:47 IST

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। डोकलाम विवाद के बाद सेना ने चीन से लगते सीमाई इलाकों में सड़क निर्माण की प्रक्रिया तेज करने का फैसला किया है। सेना के इंजीनियर्स कोर को इसकी जिम्मेदारी सौंपी गई है। सेना ने चीन-भारत सीमा पर सड़कों के निर्माण में तेजी लाने का फैसला किया है। सेना ने अपनी इंजिनियर्स कोर को यह जिम्मेदारी सौंपी है कि जब भी जरूरत हो सैनिकों की मूवमेंट आसानी से हो सके, यह सुनिश्चित करने के लिए जोर-शोर से जुट जाएं। 73 दिनों तक चले डोकलाम गतिरोध के मद्देनजर सेना के इस कदम को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। 

दुर्गम पर्वतीय क्षेत्रों में सड़क निर्माण के लिए जरूरी अत्याधुनिक उपकरण खरीदने के लिए कदम भी उठाए जा चुके हैं। सड़क सुविधा विकसित होने से भारतीय जवान चीन से लगती तकरीबन 4,000 किलोमीटर लंबी सीमा पर आसानी से और जल्दी आ-जा सकेंगे। गौरतलब है कि भारत और चीन 4,000 किमी लंबी सीमा साझा करते हैं। 237 साल पुरानी CoE सीमायी क्षेत्रों में सैनिकों और तोपों की जल्द से जल्द आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण इंजिनियरिंग सपॉर्ट और कनेक्टिविटी कायम रखने में मदद करती है।

रणनीतिक रूप से संवेदनशील चीन की सीमा पर अच्छी सड़क की जरूरत लंबे समय से महसूस की जाती रही है। इस क्रम में पहाड़ों को काटने और सड़क बनाने की कई मशीनों और उपकरणों के आधुनिक वर्जन्स के ऑर्डर दिए जा रहे हैं। सूत्रों से मिली खबर के मुताबिक सेना मुख्यालय बारूदी सुरंग का पता लगाने के लिए एक हजार से ज्यादा आधुनिक डुअल ट्रैक माइन डिटेक्टर्स खरीदने का आदेश दे चुका है। जिससे सुरंगों का पता लगाने की CoE की क्षमता को बढ़ाया जा सके। इसके अलावा नई टेक्नोलॉजी वाली 100 से ज्यादा खुदाई की मशीनें खरीदी जा रही हैं, जिससे उत्तरी इलाके में पहाड़ी क्षेत्रों के पास ट्रैक तैयार करने के लिए इंजिनियरों की क्षमता बढ़ाई जा सके। असॉल्ट ट्रैक (सड़क निर्माण के लिए अपेक्षाकृत कम वजन वाली सामग्री जिससे सैन्य वाहन आसानी से पूरी रफ्तार के साथ गुजर सकें) खरीदने के लिए भी कदम उठाए चुके हैं। 

योजना के मुताबिक, शुरुआत में सेना के इंजीनियर पर्वतीय इलाकों में सड़क का निर्माण करेंगे और जरूरत पड़ने पर सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) उसे मजबूत करेंगे।
2005 में BRO को चीन-भारत सीमा पर रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्रों में 73 सड़कें बनाने को कहा गया था लेकिन इस प्रॉजेक्ट में काफी देर हो चुकी है। इससे सेना नाखुश है। उनका कहना है कि संवेदनशील सीमावर्ती क्षेत्रों में ढांचागत विकास करना सरकार की उस रणनीति का हिस्सा है, जिससे सशस्त्र बलों की युद्ध के समय की तैयारी को मजबूत किया जा सके। 

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