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वेकोलि के सीएमडी के खिलाफ निकाला था जमानती वारंट, माफी मांगने पर वापस लिया

BhaskarHindi.com | Last Modified - September 13th, 2018 12:49 IST

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वेकोलि के सीएमडी के खिलाफ निकाला था जमानती वारंट, माफी मांगने पर वापस लिया

डिजिटल डेस्क, नागपुर। कोयले की कमी के कारण बिजली उत्पादन में आने वाली परेशानी का रोना रोने वाली वेस्टर्न कोल फील्ड लिमि. (वेकोलि) और महाजेनको के लिए उस समय हाईकोर्ट में चल रही सुनवाई में असहज स्थिति हो गई, जब बहस में निकल कर आया कि वे धारीवाल और आयडियल पॉवर प्लांट को सस्ती दरों में कोयला बेच रहे हैं। कोयले के आवंटन और रख-रखाव में बड़े भ्रष्टाचार का आरोप लगाती अनिल वडपल्लीवार की याचिका पर बुधवार को हाईकोर्ट में हो रही सुनवाई में उनके अधिवक्ता श्रीरंग भंडारकर ने यह मुद्दा उठाया।

अपने बचाव में वेकोिल और महाजेनको ने दलील दी कि वे निजी पॉवर प्लांट को सस्ती दरों में कोयला बेच कर उनके बदले में सस्ते दरों पर बिजली खरीदते हैं। ऐसे में मामले की हकीकत जानने के लिए कोर्ट ने प्रतिवादियों से अब तक निजी कंपनियों को बेचा गया कोयला, उसका मूल्य और बदले में खरीदी गई बिजली की विस्तृत जानकारी प्रस्तुत करने के आदेश दिए। बीती सुनवाई में हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया था कि बिजली निर्माण केंद्रों में नियमानुसार इतना कोयला रखना अनिवार्य है कि उसमें 22 दिन तक काम चल सके। मौजूदा वक्त में महाजेनको के पास केवल 7 दिनों की बिजली उत्पन्न करने लायक कोयला है। ऐसे में कोर्ट ने वेस्टर्न कोल फील्ड और कोयला आपूर्ति में मददगार रेलवे को संयुक्त बैठक करके जरूरी स्टॉक उपलब्ध कराने के आदेश दिए थे।

जमानती वारंट निकाला था, रद्द किया
बुधवार को हुई सुनवाई में याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट में यह भी बताया कि हाईकोर्ट ने बीते दिनों कोयले की कमी न हो इसके लिए जो वेकोलि, महाजेनको और रेलवे की समिति बनाकर उन्हें हल निकालने के लिए कहा था। उस समिति ने अपने कामकाज का ब्यौरा अब तक हाईकोर्ट को नहीं भेजा है। ऐसे में मामले में नाराज हाईकोर्ट ने सुबह के सत्र में वेकोलि के सीएमडी के खिलाफ जमानती वारंट जारी कर दिया। लंच के बाद के सत्र में वेकोलि के अधिवक्ता अजय घारे द्वारा कोर्ट से माफी मांगने और अपना पक्ष समझाने के बाद कोर्ट ने वारंट रद्द कर दिया। मामले की अगली सुनवाई 19 सितंबर को रखी गई है। 

यह है मामला
हाईकोर्ट में अनिल वडपल्लीवार ने यह जनहित याचिका दायर की थी। याचिकाकर्ता के अनुसार देश में सस्ती दरों में मिलने वाले कोयले को खरीदने की जगह महाजेनको ऑस्ट्रेलिया और इंडोनेशिया से कोयला आयात कर रही है। इससे बिजली महंगी हो रही है और उपभोक्ताओं को इस महंगे कोयले के दाम चुकाने पड़ रहे हैं। इस कायले से उपभोक्ताओं पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है। महाजेनको को विदेश से कोयला आयात करने से रोका जाए। इसके बाद महाजेनको, वेस्टर्न कोल फील्ड और रेलवे द्वारा एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप हुए, जिसमें महाजेनको को घटिया दर्जे के कोयले की आपूर्ति हो रही है, रेलवे आपूर्ति करने में मदद नहीं कर रहा है। ऐसे कई मुद्दे सुनवाई के दौरान कोर्ट के सामने आए। हाल ही में महाजेनको को वेस्टर्न कोल फील्ड पर्याप्त कोयला नहीं दे रहा है यह विषय कोर्ट के संज्ञान में लाया गया। 

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