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अनंत-पद्मनाभस्वामी की रखवाली करता है रहस्यमयी मगरमच्छ, पुजारी खिलाते हैं प्रसाद

BhaskarHindi.com | Last Modified - December 08th, 2017 07:31 IST

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डिजिटल डेस्क, केरल। मंदिर की रखवाली मगरमच्छ करता है, आपको सुनकर अजीब लग सकता है, किंतु ये सत्य है। यह मगरमच्छ शाकाहारी है। यह भी कहा जाता है कि जब एक मगरमच्छ की मृत्यु हो जाती है तो दूसरा रहस्यमयी ढंग से प्रकट हो जाता है और मंदिर की रखवाली में लग जाता है। ये सिलसिला करीब 60 सालों से जारी है। इस मगरमच्छ का नाम बबिया है। 

अनंत-पद्मनाभस्वामी का मंदिर 

दरअसल, यह मंदिर केरल का अनंतपुर मंदिर जो कासरगोड में स्थित है। यह एकमात्र ऐसा मंदिर है जहां मंदिर में ही झील है। इस झील का पानी हर मौसम में एक सा ही रहता है। बबिया मगरमच्छ इसी के अंदर रहता है और पुजारी रोज उसे अपने हाथों से खाना खिलाते हैं। वह पूर्णतः शाकाहारी है। बबिया के नाम से ही फेमस करीब दो एकड़ की झील के बीचों-बीच बना यह मंदिर भगवान विष्णु भगवान अनंत-पद्मनाभस्वामी का है। यहां इनकी सुंदर एवं अति अलौकिक प्रतिमा विराजमान है। पुजारी मगरमच्छ के मुंह में मंदिर का प्रसाद ही डालते हैं वह भी हाथ से। 

प्रसाद खिलाने की अनुमति सिर्फ मंदिर प्रबंधन को

बबिया को प्रसाद खिलाने की अनुमति सिर्फ मंदिर प्रबंधन को है। कोई और उसे प्रसाद नही खिलाता। यह पूरी तरह से शाकाहारी और झील में रहने वाले जीव इससे पूरी तरह सुरक्षित रहते हैं। वह कभी भी किसी को भी नुकसान नही पहुंचाता। 

मूर्तियां 70 प्रकार की औषधियों से निर्मित

यह मंदिर तिरुअनंतपुरम के अनंत-पद्मनाभस्वामी का मूल स्थान माना जाता है। यहां की मूर्तियां 70 प्रकार की औषधियों से निर्मित हैं। यहां मौजूद मगरमच्छ देवों का दूत माना जाता है और स्थानीय लोगों के अनुसार किसी भी आपदा की सूचना ये पहले ही दे देता है। भक्तों को मगरमच्छ के दर्शन होना अतिशुभ माना जाता है। कहा जाता है कि एक बार एक अंग्रेज अधिकारी ने उसे गोली मार दी थी, लेकिन दूसरे ही दिन वह फिर झील में नजर आया। कुछ दिनों उस अधिकारी की सांप के काटने से मौत हो गई।

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