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बैंगलूरु की कंपनी कराएगी राज्य में कृत्रिम बारिश, धान से इथेनॉल-सीएनजी बनाने भंडारा में लगेगा कारखाना

बैंगलूरु की कंपनी कराएगी राज्य में कृत्रिम बारिश, धान से इथेनॉल-सीएनजी बनाने भंडारा में लगेगा कारखाना

डिजिटल डेस्क, मुंबई। भंडारा में धान के पराली से इथेनॉल और सीएनजी बनाने की परियोजना लगाई जाएगी। इस परियोजना से बायो इथेनॉल तैयार किया जाएगा। इससे जिले के धान उत्पादक किसानों को काफी फायदा होगा। गुरुवार को मंत्रालय में प्रदेश के सार्वजनिक निर्माण कार्य राज्य मंत्री व भंडारा के पालक मंत्री डॉ. परिणय फुके ने यह जानकारी दी। फुके ने कहा कि परियोजना के संबंध में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में हाल ही बैठक हुई है। जल्द ही परियोजना का काम शुरू होगा। फुके ने कहा कि परियोजना के लिए भंडारा जिले के मकरधोकडा में जमीन उपलब्ध कराने का फैसला किया गया है। इस संबंध में आवश्यक कार्यवाही जिलाधिकारी के माध्यम से की जाएगी। इसके साथ ही एमआईडीसी इस परियोजना के लिए जरूरी  मदद करेगी। फुके ने कहा कि भंडारा में 3.84 लाख टन और गोंदिया में 3.46 लाख टन पराली उपलब्ध होता है। फिलहाल इस पराली को जला दिया जाता है। इससे अब इथेनॉल व गैस बनाई जाएगी। उन्होंने कहा कि इस परियोजना के लिए भारत पेट्रोलियम अत्याधुनिक तकनीक उपलब्ध कराएगा। फुके ने कहा कि भारत में पेट्रोल व डीजल में मिश्रण के लिए 1 प्रतिशत इथेनॉल उपलब्ध नहीं है। इसलिए इस तरह की परियोजना की देश में जरूरत है। भारत में इथेनॉल बनाने की 12 परियोजनाएं लगाई जा रही हैं। इसमें से 4 परियोजना चालू है। इसी दौरान फुके ने बताया कि गोरेवाडा प्राणी संग्रहालय के प्रथम चरण का काम 15 अगस्त से पहले पूरा करने का लक्ष्य है। 

नवेगाव- नागझिरा प्रकल्प में लाई जाएगी बाघिन

फुके ने बताया कि भंडारा- गोंदिया स्थित नवेगाव- नागझिरा व्याघ्र प्रकल्प में 5 बाघिन छोड़ी जाएगी। इन बाघिन को चंद्रपुर के ब्रम्हपुरी से लाया जाएगा। उन्होंने कहा कि बाघों की संख्या बढ़ाने की दृष्टि से यह फैसला किया गया है। 

बैंगलूरु की कंपनी कराएगी राज्य में कृत्रिम बारिश- अगस्त में होगा प्रयोग 

राज्य सरकार ने मानसून के दौरान कृत्रिम बारिश के लिए बैंगलूरु की कंपनी ख्याली क्लाइमेट का चयन किया है। सरकार इस महीने के अंत तक सूखा ग्रस्त मराठवाडा के इलाके में कृत्रिम बारिश कराने की योजना बना रही है। राज्य के जलापूर्ति मंत्री बबनराव लोणकर के मुकाबिक 30 जुलाई के बाद कृत्रिम बारिश कराई जाएगी। सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी से मिली जानकारी के मुताबिक कृत्रिम बारिश को लेकर आए आवेदनों में से सरकार ने सभी पहलूओं पर विचार करने के बाद ख्याती क्लाइमेट कंपनी का चयन किया है। कंपनी को कृत्रिम बारिश के संबंध में कार्यादेश भी जारी कर दिया गया है। सरकार ने पिछले साल भी कृत्रिम बारिश के लिए इसी कंपनी का चयन किया था। लेकिन बाद में ठीक-ठाक बरसात होने के चलते कृत्रिम बरसात की योजना को रद्द कर दिया गया था। इस बार सरकार ने पहले ही सूखा प्रभावित इलाकों में कृत्रिम बारिश से जुड़े प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान कर दी है। कृत्रिम बारिश के लिए 30 करोड़ रुपए खर्च किए जाएगे। जिसमें से 20 करोड़ रुपए वित्त विभाग ने उपलब्ध करा दिए हैं। इस रकम से एयरक्राफ्ट व रडार सिस्टम की खरीदी की जाएगी। 22 जुलाई तक रडार की खरीदी कर ली जाएगी जिसे औरंगाबाद में लगाया जाएगा। और एयरक्राफ्ट को भी औरंगाबाद एयरपोर्ट में तैयार करके रखा जाएगा। इसके अलावा राज्य के दूसरे इलाकों में लगे रडार का परीक्षण किया जाएगा। 

पशुरोग निदान संस्था अब अटलबिहारी पशुरोग प्रयोगशाला

पुणे स्थित प्रदेश सरकार की पशुरोग निदान संस्था रोग अन्वेषण विभाग का नाम बदल दिया गया है। यह संस्था अब भारतरत्न अटल बिहारी वाजपेयी राज्यस्तरीय पशुरोग जांच प्रयोगशाला के नाम से जानी जाएगी। गुरुवार को सरकार के पशुपालन विभाग की ओर से इस संबंध में शासनादेश जारी किया गया। केंद्र सरकार ने पुणे के औंध स्थित संस्था रोग अन्वेषण विभाग को पश्चिम विभागीय संदर्भ प्रयोगशाला का दर्जा प्रदान किया है। महाराष्ट्र, गोवा, गुजरात, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, दीव दमन और दादरानगर हवेली जैसे राज्य में होने वाले पशुओं के विभिन्न संक्रामक रोगों के निदान के लिए यह संस्था काम करती है। 
 

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