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मेहर बाबा का जन्मोत्सव 25 फरवरी को, जानें उनके जीवन के बारे में 

BhaskarHindi.com | Last Modified - February 12th, 2019 19:33 IST

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मेहर बाबा का जन्मोत्सव 25 फरवरी को, जानें उनके जीवन के बारे में 

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। मेहर बाबा आध्यात्मिक गुरु, सूफी, वेदांत और रहस्यवादी दर्शन से प्रभावित एक रहस्यवादी सिद्ध पुरुष थे। वे कई वर्षों तक वे मौन साधना में रहने वाले संत रहे हैं। मेहर बाबा के अनुयाई उन्हें ईश्वर का अवतार मानते थे। 25 फरवरी 1894 में मेहर बाबा का जन्म पूना में पारसी परिवार में हुआ था। उनका मूल नाम मेरवान एस. ईरानी (मेरवान शेरियर ईरानी) था। वह एस. मुंदेगर ईरानी के दूसरे नंबर के पुत्र थे। जन्म से वे एक परसीयन थे। उनकी बचपन की पढ़ाई क्रिश्चियन हाईस्कूल, पूना तथा बाद में डेकन कॉलेज पूना में हुई थी। मेहर बाबा एक अच्छे कवि और वक्ता थे तथा उन्हें कई भाषाओं का ज्ञान था। 

हजरत बाबाजान 
19 वर्ष की आयु में उनकी भेंट रहस्यदर्शी महिला संत हजरत बाबाजान से हुई और उनका जीवन बदल गया। इसके बाद उन्होंने नागपुर के हजरत ताजुद्दीन बाबा, केदगांव के नारायण महाराज, शिर्डी के सांई बाबा और साकोरी के उपासनी महाराज अर्थात पांच महत्वपूर्ण हस्तियों को अपना गुरु बनाया। उत्तरप्रदेश के हमीरपुर जिले में बाबा के भक्त परमेश्वरी दयाल पुकर ने 1964 ई. में मेहर मंदिर का निर्माण करवाया था। 18 नवंबर 1970 ई. को मंदिर में अवतार मेहर बाबा की प्रतिमा स्थापित की गई थी। यहां पर प्रति वर्ष 18 और 19 नवंबर को मेहर प्रेम मेले का आयोजन किया जाता है। 

विदेश यात्राएं 
इसके अलावा भी मेहर बाबा के कई मंदिर है। मेहर बाबा ने छ: बार विदेश यात्राएं भी की। मेहर बाबा तीस साल मौन रहे। कोई दूसरा व्यक्ति इतने लंबे समय तक मौन नहीं रहा। मेहर बाबा ने शब्द छोड़ दिए थे, लेकिन वे मुद्राएं नहीं छोड़ सके। उनके जो निकटवर्ती शिष्य थे। उन्होंने उनकी मुद्राओं को समझाकर लिखना शुरू किया और तीस साल बाद जो किताब प्रकाशित हुई उसका शीर्षक बड़ा अजीब था जैसा कि होना चाहिए था उसका शीर्षक था गॉड स्पीहक्सष मतलब ईश्व्र बोलता है। 

मौन ही प्रखर वक्तव्य 
मेहर बाबा ने कभी बात नहीं की। लेकिन उनका मौन ही प्रखर वक्तव्य था उनकी अभिव्यक्तिश, उनका गीत। उनका विशालकाय आश्रम महाराष्ट्र के अहमदनगर के पास मेहराबाद में हैं, जो मेहर बाबा के भक्तों की गतिविधियों का केंद्र माना जाता है। मेहराबाद में आज भी बाबा की समाधि है। इसके पहले मुंबई में उनका आश्रम था।

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