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कंबल बांटने की होड़, BJP महिला सांसद ने विधायक पर उठाई चप्पल

September 06th, 2018 16:11 IST

डिजिटल डेस्क, सीतापुर। उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले में बीजेपी सांसद और विधायक के बीच शनिवार को इस कदर तनातनी हो गई। इस दौरान नौबत यहां तक आ गई कि बीजेपी की महिला सांसद चप्पल लेकर खड़ी हो गई। दरअसल, महोली तहसील कार्यालय में बीजेपी सांसद रेखा वर्मा को कंबल वितरण करना था। उसी समय महोली से बीजेपी विधायक शशांक त्रिवेदी भी समर्थकों के साथ वहां पहुंच गए। कंबल वितरण के दौरान ही दोनों नेताओं के समर्थकों में आपस में भिड़ंत हो गई। इस भिड़ंत में कुछ समर्थक मामूली रूप से जख्मी हो गए। मामला बिगड़ने पर मौके पर पहुंची पुलिस ने दोनों पक्षों का शांत कराया।

कंबल बांटने का क्रेडिट लेने में हुई बहस

बता दें कि कंबल बांटने का क्रेडिट लेने के फेर में दोनों पक्षों के बीच बहस शुरू हो गई। इस दौरान विधायक शशांक के समर्थकों ने सांसद के बेटे अनमेश वर्मा की पिटाई कर दी। जिसके बाद मामला इतना गर्म हुआ कि सांसद रेखा वर्मा ने तो चप्पल तक निकाल ली और एसडीएम के सामने ही विधायक को धमकी दे डाली। इसके साथ ही चप्पल लेकर मारने भी दौड़ी, हालांकि वहां मौजूद कार्यकर्ताओं ने उन्हें ऐसा करने से रोक लिया। वहीं विधायक के समर्थकों ने भी मेज उठा ली और उसे सांसद समर्थकों पर फेंकने का प्रयास किया। इस घटना के बाद सब डिविजनल मजिस्ट्रेट डी पी सिंह ने बताया कि सांसद और विधायक में फिलहाल समझौता हो गया है और किसी पक्ष ने इस संबंध में कोई एफआईआर नहीं कराई है।

एसडीएम को भी दी धमकी

सांसद और विधायक के बीच जब महोली तहसील में झगड़ा हो रहा था, तो उस वक्त एसडीएम भी वहां मौजूद थे। सांसद रेखा वर्मा ने एसडीएम को धमकी दी कि आगे से ऐसा हुआ तो वह उनका ट्रांसफर करा देंगी। वहीं विधायक शशांक त्रिवेदी के गनर पर आरोप है कि उसने सांसद रेखा वर्मा के बेटे के साथ मारपीट की है। हालांकि मामला शांत होने पर विधायक और सांसद समर्थकों ने कहा कि यह विवाद उनके बीच नहीं कंबल लेने आए लाभार्थियों के बीच हुई था।

प्रशासनिक अमला भी बना मूकदर्शक 

मामला सांसद व विधायक के समर्थकों के बीच का था, इसलिए वहां मौजूद प्रशासनिक अमला भी मूकदर्शक बनकर रह गया। कंबल लेने पहुंचे ग्रामीण तोहक्के-बक्के होकर वहां से निकल भागे। डीएम डॉ. सारिका मोहन, एसपी आनंद कुलकर्णी, भाजपा जिलाध्यक्ष अजय गुप्ता ने सांसद व विधायक के साथ एसडीएम कार्यालय में बैठक की। एक घंटे बाद जब कार्यालय का दरवाजा खुला, तब तक मामला सुलझ चुका था।

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