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चिट फंड जैसी पॉन्जी स्किम्स पर लगेगी लगाम, कैबिनेट ने लिया यह बड़ा फैसला

BhaskarHindi.com | Last Modified - February 07th, 2019 15:35 IST

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News Highlights

  • केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को अनरेगुलेटेड डिपोजिट स्कीम्स बिल, 2018 में संशोधन को मंजूरी दे दी।
  • इस संशोधन के बाद वो सभी डिपॉजिट स्कीम जो रेगुलेटेड नहीं है उसे अवैध माना जाएगा।
  • इसका संचालन करने वाले की संपत्ति जब्त की जा सकेगी।


डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। ऐसे समय में जब पश्चिम बंगाल के शारदा चिट फंड स्कैम को लेकर देश में घमासान छिड़ा है, केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को अनरेगुलेटेड डिपोजिट स्कीम्स बिल, 2018 में संशोधन को मंजूरी दे दी। इस संशोधन के बाद वो सभी डिपॉजिट स्कीम जो रेगुलेटेड नहीं है उसे अवैध माना जाएगा। ऐसी स्कीम को चलाने वालों पर कार्यवाही करने के कड़े प्रवाधन भी किए गए हैं। इसका संचालन करने वाले की संपत्ति जब्त की जा सकेगी।

कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने मंत्रिमंडल की बैठक के बाद मीडिया को जानकारी देते हुए कहा कि इससे अवैध जमाखोरी की गतिविधियों से प्रभावी तरीके से निपटा जा सकेगा। इस बिल में तीन प्रकार के अपराधों और उनकी सजा का प्रावधान है। इसके तहत अनरेगुलेटेड डिपॉजिट स्कीम्स को चलाना (विज्ञापन देना, प्रमोट और ऑपरेट करना या उसके लिए धनराशि लेना) अपराध माना जाएगा। यानी अगर कोई ऐसी स्कीम को लेकर विज्ञापन जारी करता है और किसी बड़ी हस्ती को ब्रांड अम्बैसडर बनाकर लोगों को आकर्षित करने की कोशिश करता है तो ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकेगी। दूसरा, रेगुलेटेड डिपॉजिट स्कीम में धोखे से डीफॉल्ट करना और तीसरा जान-बूझकर झूठे तथ्य देकर अनरेगुलेटेड डिपॉजिट स्कीम में निवेश करने के लिए डिपॉजिटर्स को गलत तरीके से उकसाना शामिल है।

सरकार पोंजी स्कीम पर लगाम लगाने के ऐसी कंपनियों का डेटाबेस भी तैयार करेगी। रविशंकर ने बताया कि साल 2015 से 2018 तक सीबीआई ने चिंट फंड के मामले में कुल 166 केस दर्ज किए हैं। बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल और असम जैसे राज्यों में इस तरह की डिपोजिट स्कीम का सबसे ज्यादा प्रभाव पड़ा है। मालूम हो कि अनरेगुलेटेड स्कीम उसे कहा जाता है जो कोई डिपॉजिट टेकिंग स्कीम बिल में लिस्टेड रेगुलेटरों के पास रजिस्टर नहीं की गई हो। वर्तमान में 9 रेगुलेटर विभिन्न डिपॉजिट स्कीम की निगरानी और करते हैं। इनमें भारतीय रिजर्व बैंक (RBI), सिक्योरिटीज़ एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI), कॉरपोरेट मामलों का मंत्रालय और राज्य एवं केंद्र शासित प्रदेशों की सरकारें शामिल हैं।  

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